Home Latest News & Updates व्यावसायिक शिक्षा की दिशा में बड़ा कदमः भारत में खुलेंगे पांच राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, ITI को मिलेगा बढ़ावा

व्यावसायिक शिक्षा की दिशा में बड़ा कदमः भारत में खुलेंगे पांच राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, ITI को मिलेगा बढ़ावा

by Sanjay Kumar Srivastava 7 May 2025, 3:16 PM IST (Updated 12 May 2025, 3:16 PM IST)
7 May 2025, 3:16 PM IST (Updated 12 May 2025, 3:16 PM IST)
National Center For Excellence

पांच साल की अवधि में 20 लाख युवाओं को ऐसे पाठ्यक्रमों के माध्यम से कुशल बनाया जाएगा, जिनसे उद्योग जगत की मानव पूंजी की जरूरतें पूरी होती हों.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) के उन्नयन और कौशल विकास हेतु पांच राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना के लिए मंजूरी दे दी है. जिसमें 60 हजार करोड़ रुपये का परिव्यय (केंद्रीय हिस्सा: 30 हजार करोड़ रुपये, राज्य हिस्सा: 20 हजार करोड़ रुपये और उद्योग हिस्सा: 10 हजार करोड़ रुपये) होगा. एशियाई विकास बैंक और विश्व बैंक द्वारा समान रूप से केंद्रीय हिस्से के 50% की सीमा तक का सह-वित्तपोषण किया जाएगा. यह भारत की व्यावसायिक शिक्षा में बदलाव लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

20 लाख युवाओं को बनाया जाएगा कुशल

यह योजना उद्योग जगत के अनुरूप फिर से तैयार किए गये पाठ्यक्रमों के साथ एक हजार सरकारी आईटीआई के उन्नयन और पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) की क्षमता वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करेगी, जिसमें इन संस्थानों में कौशल विकास के लिए पांच राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना शामिल है. पांच साल की अवधि में 20 लाख युवाओं को ऐसे पाठ्यक्रमों के माध्यम से कुशल बनाया जाएगा, जिनसे उद्योग जगत की मानव पूंजी की जरूरतें पूरी होती हों. यह योजना स्थानीय कार्यबल आपूर्ति और उद्योग जगत की मांग के बीच तालमेल सुनिश्चित करेगी. जिससे उद्यमियों को कुशल श्रमिक मिलेंगे.

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उद्योग जगत की मांग के अनुरूप तैयार होंगे कुशल श्रमिक

पहली बार यह योजना आईटीआई उन्नयन की योजना और प्रबंधन में उद्योग जगत के साथ स्थाई आधार पर गहन संबंध स्थापित करेगी. इस योजना के तहत प्रशिक्षकों के बेहतर प्रशिक्षण (टीओटी) से जुड़ी सुविधाओं के लिए पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) में प्रशिक्षित किया जाएगा. ये संस्थान भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना में स्थित हैं. इसके अतिरिक्त 50 हजार प्रशिक्षकों को सेवा-पूर्व और सेवाकालीन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा. अवसंरचना, पाठ्यक्रम प्रासंगिकता, रोजगार योग्यता और व्यावसायिक प्रशिक्षण की धारणा में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का समाधान करके, इस योजना का उद्देश्य कुशल जनशक्ति की आवश्यकता को पूरा करने में आईटीआई को सबसे आगे रखना है, जो देश की वैश्विक विनिर्माण और नवाचार महाशक्ति बनने की यात्रा के अनुरूप है. यह उद्योग जगत की मांग के अनुरूप कुशल श्रमिकों को तैयार करेगा, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे उच्च-विकास क्षेत्रों में कौशल की कमी को दूर किया जा सकेगा.

प्रधानमंत्री के विकसित भारत के विज़न के अनुरूप है योजना

प्रस्तावित योजना प्रधानमंत्री के विकसित भारत के विज़न के अनुरूप है, जिसमें वर्तमान और भविष्य की उद्योग जगत की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कौशल विकास को एक प्रमुख क्षमता-प्रदाता के रूप में शामिल किया गया है. 1950 के दशक से ही औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) भारत में व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण के मुख्य आधार रहे हैं, जिनका संचालन राज्य सरकारों के अधीन होता है. इसमें उद्योग की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम सामग्री और डिजाइन शामिल किया गया है, ताकि कुशल श्रमिक तैयार किए जा सके.

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