Home Latest News & Updates पिछले सौ वर्षों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सेवा, एकता और राष्ट्रीय चेतना के आदर्शों को किया है सुदृढ़: उपराष्ट्रपति

पिछले सौ वर्षों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सेवा, एकता और राष्ट्रीय चेतना के आदर्शों को किया है सुदृढ़: उपराष्ट्रपति

by Kamlesh Kumar Singh 17 July 2026, 7:36 PM IST
17 July 2026, 7:36 PM IST
पिछले सौ वर्षों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सेवा, एकता और राष्ट्रीय चेतना के आदर्शों को किया है सुदृढ़:उपराष्ट्रपति

Pustak Vimochan: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति भवन में श्याम जाजू और अनुपम त्रिवेदी द्वारा लिखित पुस्तक ‘आरएसएस @100: एक सदी संकल्प की’ (‘RSS@100 A Century of Service, Unity & Sacrifice’ in english) का विमोचन किया. इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में प्रकाशित इस पुस्तक के विमोचन में सहभागी होना उनके लिए व्यक्तिगत गौरव का विषय है. उन्होंने कहा कि उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ दीर्घकालिक जुड़ाव रहा है.

गंगा से की RSS की तुलना

संघ पर आधारित एक तमिल कविता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना पवित्र गंगा से की गई है, जो निःस्वार्थ भाव से दूसरों के कल्याण के लिए निरंतर प्रवाहित होती है. पुस्तक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मूल दर्शन और कार्य-परंपरा का प्रभावी चित्रण करने के लिए लेखकों की सराहना करते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि संघ की यात्रा भारत की सांस्कृतिक जड़ों, विरासत और परंपराओं के पुनर्जागरण, सुदृढ़ीकरण और पुनर्स्थापन की यात्रा रही है. पुस्तक के शीर्षक में ‘सेवा, एकता और त्याग ‘ का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि इन मूल आदर्शों ने स्वयंसेवकों की पीढ़ियों को प्रेरित किया है.

राष्ट्रीय चरित्र की कार्यशाला है RSS

उन्होंने कहा कि ‘सेवा’ समाज के प्रति निस्वार्थ प्रतिबद्धता को दर्शाती है. ‘एकता’ भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता से ऊपर उठकर बंधनों को मजबूत करती है और ‘त्याग’ हमें स्मरण कराता है कि स्थायी संस्थाएं समर्पण, दृढ़ता और निस्वार्थ प्रयास से ही बनाई जाती हैं. उपराष्ट्रपति ने आरएसएस द्वारा चरित्र-निर्माण और नेतृत्व विकास पर भी जोर दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि ये मूल्य रोजाना के शाखाओं के माध्यम से विकसित किए जाते हैं. ये शाखाएं अनुशासन, समय की पाबंदी, शारीरिक फिटनेस, टीम वर्क और समाज व राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की भावना पैदा करती हैं. इस पुस्तक का हवाला देते हुए उन्होंने शाखा को आत्मा की एक ऐसा कार्यशाला बताया जहां युवाओं की अपरिपक ऊर्जा को राष्ट्रीय चरित्र में ढाला जाता है.

विरासत, परंपराओं और आध्यात्मिक चिंतन पर गर्व

सीपी राधाकृष्णन ने आगे कहा कि आरएसएस ने लगातार भारत की सांस्कृतिक विरासत, विविध परंपराओं, भाषाओं और आध्यात्मिक चिंतन पर गर्व महसूस कराते हुए सांस्कृतिक निरंतरता और राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा दिया है. उन्होंने कहा कि यह शताब्दी वर्ष उन लाखों स्वयंसेवकों के समर्पण व निष्ठा को मान्यता देने करने का अवसर है जिन्होंने खुद को समाज सेवा में समर्पित कर दिया है. उन्होंने यह भी कहा कि संस्थाएं तभी जीवित रहती हैं जब उन्हें दृढ़विश्वास, प्रतिबद्धता और आम लोगों की बड़े उद्देश्यों के लिए काम करने की इच्छा का समर्थन मिले.

मोदी ने ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत को सर्वोपरि रखा

पुस्तक के विशेष अध्याय ‘एक स्वयंसेवक से प्रधानमंत्री : मोदी युग’ का संदर्भ देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक स्वयंसेवक से प्रधान सेवक तक की यात्रा को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने लगातार सेवा और ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत को शासन को सर्वोपरि रखा है. यह निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण की ओर आरएसएस के स्थायी झुकाव को दर्शाता है.

कार्यकर्ता के रूप में की थी सार्वजनिक जीवन की शुरुआत

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ हुई अपनी बातचीत का उल्लेख करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि दोनों ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से प्रेरित जमीनी कार्यकर्ता के रूप में की थी. उन्होंने गंगा का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार गंगा एक छोटी धारा के रूप में प्रारंभ होकर विशाल नदी का स्वरूप ग्रहण करती है, उसी प्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी विनम्र शुरुआत से आगे बढ़कर आज विश्व के सबसे बड़े स्वैच्छिक संगठनों में से एक बन गया है.

इस अवसर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संघचालक पवन जिंदल, पुस्तक के सह-लेखक श्याम जाजू एवं अनुपम त्रिवेदी, प्रभात प्रकाशन के प्रबंध निदेशक प्रभात कुमार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.

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