Monsoon Session : 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले विपक्ष के साथ साथ सरकार ने अपनी पूरी रणनीति तैयार कर ली है. शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दफ्तर में हुई हाई-लेवल बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा, एस. जयशंकर, किरेन रिजिजू समेत एनडीए के शीर्ष नेताओं ने फ्लोर मैनेजमेंट और बड़े विधायी एजेंडे पर मंथन किया. सरकार सिर्फ बिल पास कराने की नहीं, बल्कि संविधान संशोधन जैसे बड़े प्रस्तावों के लिए भी संख्या बल को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है.
बैठक में बीजेपी के वरिष्ठ नेता हुआ शामिल
एक तरफ विपक्ष मानसून सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी में जुट गया है. वहीं, दूसरी तरफ सत्ता पक्ष ने अपना राजनीतिक गणित बिछा दिया है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दफ्तर में हुई हाई-लेवल मीटिंग में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, दोनों सदनों के चीफ व्हिप और NDA के सहयोगी दलों के नेता शामिल हुए. बैठक में संसद के फ्लोर मैनेजमेंट के साथ-साथ सरकार के सबसे बड़े विधायी एजेंडे पर चर्चा हुई.
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कई बिल को पास कराने पर बनी योजना
परिसीमन, महिला आरक्षण, एक देश-एक चुनाव, 129 , 130 और 131वां संविधान संशोधन जैसे अहम मुद्दों पर रणनीति बनाई गई. साथ ही यह भी तय किया गया कि किन विधेयकों को सबसे पहले सदन से पारित कराया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक बैठक में विपक्ष के रुख की भी समीक्षा हुई. आकलन यह है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को छोड़कर कई विपक्षी दल अलग-अलग तरीके से सरकार का रास्ता आसान कर सकते हैं. कहीं समर्थन, कहीं वॉकआउट, कहीं मतदान से दूरी तो कहीं अनुपस्थिति की संभावना पर चर्चा हुई.
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क्या दो-तिहाई बहुमत जुटा पाएगा NDA?
सूत्रों के अनुसार बैठक में टीएमसी और शिवसेना (उद्धव) के बागी सांसदों के संभावित विलय और उन्हें अलग दल के रूप में मान्यता मिलने की स्थिति पर भी चर्चा हुई. सरकार का दावा है कि जरूरत पड़ने पर दो-तिहाई बहुमत जुटाने में संख्या बल की कमी नहीं होगी. डीएमके के कुछ नेताओं से भी संपर्क बनाए रखा गया है. इधर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी अलग अलग मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है. सरकार की प्राथमिकता उन अध्यादेशों और विधेयकों को पहले पारित कराने की है जो पहले से लंबित हैं. इनमें इनकम टैक्स संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय सम्मान को नुकसान पहुंचाने पर सजा से जुड़ा विधेयक, सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने से संबंधित विधेयक अन्य लंबित महत्वपूर्ण विधेयक शामिल है.
सूत्रों के मुताबिक वंदे मातरम् से जुड़े प्रस्ताव को पहले राज्यसभा में लाने की रणनीति पर भी विचार हुआ. मानसून सत्र में सिर्फ हंगामे की नहीं बल्कि बड़े राजनीतिक और संवैधानिक फैसलों की भी आहट है. अब सबकी नजर संसद के फ्लोर पर होगी, जहां सरकार अपनी संख्या और रणनीति दोनों की परीक्षा देगी.
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