Student Education: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से नए सिरे से बनाना होगा ताकि बच्चों के लिए तनाव-मुक्त और सुरक्षित माहौल बन सके और माता-पिता को अपनी कुर्बानियों का फल मिल सके.
गांधी ने X पर देहरादून में शुक्रवार को हुई अपनी ‘छात्रों की गूंज’ रैली का एक वीडियो क्लिप शेयर किया.
पेपर लीक ने कई परिवारों से उनके बच्चे छीने
गांधी ने मंच पर रिया कुमारी के पिता राजेश कुमार को बुलाया था. रिया ने मई में पेपर लीक के आरोपों के बाद NEET-UG परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या कर ली थी. X पर हिंदी में किए गए अपने पोस्ट में गांधी ने कहा कि रिया के पिता राजेश अपनी बेटी को खोने के गम में इतने टूट गए थे कि उन्हें देखकर हर किसी की आंखों में आंसू आ गए. यह सिर्फ़ एक परिवार का दर्द नहीं है. पेपर लीक ने ऐसे कई परिवारों से उनके बच्चे छीन लिए हैं. लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि हर नाम के पीछे एक मां और एक पिता होते हैं, जिनके लिए अब कोई कल नहीं बचा है.
शैक्षणिक संस्थान पर न हो किसी का कब्जा
गांधी ने कहा कि इस व्यवस्था को पूरी तरह से नए सिरे से बनाना होगा. ऐसा माहौल बनाना होगा जहां बच्चों को तनाव के बजाय सुरक्षा मिले और माता-पिता को अपनी कुर्बानियों का फल मिले, न कि आंसू. गांधी ने शुक्रवार को कहा था कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान पर किसी राजनीतिक दल या संगठन का कब्ज़ा नहीं होना चाहिए. उन्होंने पेपर लीक के मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाने की वकालत की और इसे सबकी ज़िम्मेदारी बताया. शुक्रवार शाम देहरादून में रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि ऊपर से नीचे तक पूरी शिक्षा व्यवस्था पेपर लीक में शामिल है, जिसकी वजह से अब तक 7.5 करोड़ छात्रों को नुकसान उठाना पड़ा है.
उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें पूरा ढांचा शामिल है जैसे कोचिंग सेंटर, परीक्षा केंद्र, पेपर सेट करने वाले, अनुवादक, ट्रांसपोर्टर और वेंडर से लेकर NTA और सबसे ऊपर (शिक्षा) मंत्रालय तक. गांधी ने कहा था कि इस भ्रष्ट व्यवस्था के कारण पेपर लीक के मामले दिन-ब-दिन बढ़ रहे हैं, लेकिन अब तक दोषियों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई है और न ही उन्हें सज़ा मिली है.
मौजूदा सिस्टम 19वीं सदी जैसा
गांधी ने यह भी कहा था कि मौजूदा टेस्टिंग सिस्टम 19वीं सदी जैसा पुराना है, जिसे 21वीं सदी के हिसाब से अपडेट करने की ज़रूरत है. आज का सिस्टम एग्जामिनर-केंद्रित, सरकार-केंद्रित और टेस्टिंग-केंद्रित है, जबकि हम एक स्टूडेंट-केंद्रित सिस्टम चाहते हैं. टेस्टिंग सिस्टम स्टूडेंट्स के लिए होना चाहिए और यह लचीला होना चाहिए. एक सुरक्षित क्वेश्चन बैंक और रैंडमाइज़्ड क्वेश्चन पेपर होने चाहिए. हम टेक्नोलॉजी की मदद से क्वेश्चन पेपर को रैंडमाइज़ कर सकते हैं, जैसा कि GMAT और दूसरे एग्ज़ाम में होता है.
पंजाब के आर्यन और हरियाणा के पांशुल बने टॉपर, 2025 के टॉपर से 29 अंक आगे रहे इस साल के…
News Source: PTI
