Home Top News सावधान! आ रहा है इबोला: WHO की चेतावनी के बाद एक्शन में आया भारत, एयरपोर्ट पर जांच हुई सख्त

सावधान! आ रहा है इबोला: WHO की चेतावनी के बाद एक्शन में आया भारत, एयरपोर्ट पर जांच हुई सख्त

by Sanjay Kumar Srivastava 23 May 2026, 9:44 PM IST (Updated 23 May 2026, 9:45 PM IST)
23 May 2026, 9:44 PM IST (Updated 23 May 2026, 9:45 PM IST)
सावधान! आ रहा है इबोला: WHO की चेतावनी के बाद एक्शन में आया भारत, हवाई अड्डों पर जांच हुई सख्त

Ebola virus: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला फैलने की घोषणा के बाद भुवनेश्वर हवाई अड्डे के अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए थर्मल स्क्रीनिंग अनिवार्य कर दिया है. बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निदेशक प्रसन्न प्रधान ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई है.

उन्होंने कहा कि अधिकारी प्रत्येक यात्री के 21 दिन के यात्रा इतिहास की भी गहन जांच कर रहे हैं. प्रधान ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी इबोला स्क्रीनिंग दिशानिर्देशों के अनुसार अलगाव और परीक्षण के लिए हवाईअड्डा परिसर में भी व्यवस्था की गई है. बैंकॉक से एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान शनिवार को यहां हवाईअड्डे पर उतरी और उस देश से आने वाले यात्रियों पर कड़ी निगरानी रखी गई.

ब्रेस्ट कैंसर से हर साल होती है 6-7 लाख महिलाओं की मौत, जानें किसको है ज्यादा खतरा और कैसे करें बचाव

यात्रियों को सलाह

सभी यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे तेज बुखार, शरीर में दर्द या असामान्य थकान जैसे किसी भी लक्षण के बारे में रिपोर्ट करें. विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में इबोला के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निगरानी, ​​अस्पताल की तैयारी और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की स्क्रीनिंग बढ़ाने को कहा है.

घातक संक्रामक बीमारी है इबोला

इबोला वायरस मनुष्यों में होने वाली एक अत्यंत दुर्लभ, गंभीर और घातक संक्रामक बीमारी है, जिसे चिकित्सा विज्ञान में ‘इबोला वायरस रोग’ (EVD) या ‘इबोला हेमोरेजिक बुखार’ कहा जाता है. कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में इबोला के खतरनाक रूप ‘बुंडिबुग्यो स्ट्रेन’ के तेजी से फैलते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वैश्विक आपातकाल घोषित किया है. अफ्रीका के इस हिस्से में लगातार बढ़ती मौत और इस दुर्लभ स्ट्रेन की कोई स्वीकृत वैक्सीन न होने के कारण पूरी दुनिया में एक बार फिर हाई अलर्ट की स्थिति बन गई है.

हंतावायरस से भारत में घबराने की जरूरत नहीं, इन जगहों पर न जाएं, बचाव के लिए गाइडलाइंस जारी

इबोला वायरस का इतिहास

इबोला वायरस ‘फिलोविरीडे’ परिवार से संबंधित एक आरएनए (RNA) वायरस है. इसकी संरचना धागे जैसी होती है. यह मुख्य रूप से जंगली जानवरों, विशेष रूप से ‘फ्रूट बैट्स’ (चमगादड़ की एक प्रजाति), बंदरों, चिंपैंजी और गोरिल्ला से इंसानों में स्थानांतरित होता है.

कैसे हुआ नामकरण?

इस खतरनाक वायरस की खोज सबसे पहले वर्ष 1976 में हुई थी. उस समय अफ्रीका के कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला नदी के पास स्थित एक गांव में इसके पहले मरीज की पहचान की गई थी. नदी के नजदीक खोजे जाने के कारण वैज्ञानिकों ने इस वायरस का नाम ‘इबोला वायरस’ रख दिया.

कितना खतरनाक है यह: मृत्यु दर दहलाने वाली

इबोला को पृथ्वी पर मौजूद सबसे घातक और जानलेवा वायरसों में गिना जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक, इबोला रोग में औसत मृत्यु दर लगभग 50% है. हालांकि, अलग-अलग समय पर हुए इसके प्रकोपों में इसकी संहारक क्षमता 25% से लेकर 90% तक दर्ज की गई है. इसका सीधा मतलब यह है कि यदि इबोला से 10 लोग संक्रमित होते हैं, तो सही समय पर इलाज न मिलने की स्थिति में उनमें से 9 लोगों तक की मौत हो सकती है. इस बीमारी में मरीज की मौत शरीर से अत्यधिक खून बहने के बजाय उल्टी-दस्त के कारण होने वाले गंभीर डिहाइड्रेशन (तरल पदार्थों की भारी कमी) और मल्टीपल ऑर्गन फेलियर (अंगों का काम बंद करना) की वजह से होती है.

हर बुखार मलेरिया नहीं! ये 5 लक्षण दिखें तो तुरंत हो जाएं सावधान, जागरुकता बचा सकती है जिंदगी

क्या यह हवा से फैलता है?

आम लोगों में यह गलतफहमी होती है कि इबोला कोरोना वायरस (COVID-19) की तरह हवा के जरिए फैलता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. इबोला वायरस हवा या पानी के जरिए नहीं फैलता है. यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी, दस्त, लार, पसीना, मूत्र या वीर्य के सीधे संपर्क में आने से फैलता है. संक्रमित मरीज द्वारा इस्तेमाल किए गए कपड़े, बिस्तर, सुई (Syringe) या अन्य चिकित्सा उपकरणों को छूने से भी लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं. इबोला से मृत व्यक्ति का शरीर सबसे ज्यादा संक्रामक होता है. यदि अंतिम संस्कार के दौरान मृत देह को सीधे छुआ जाए तो यह बेहद तेजी से स्वस्थ लोगों में फैल जाता है.

कितने दिन में दिखते हैं लक्षण?

जब कोई व्यक्ति इबोला वायरस की चपेट में आता है, तो वह इबोला वायरस रोग (EVD) से ग्रसित हो जाता है. वायरस के शरीर में प्रवेश करने से लेकर लक्षण दिखने की अवधि 2 से 21 दिन की होती है, लेकिन आमतौर पर 8 से 10 दिनों में लक्षण उभरने लगते हैं. यह बीमारी मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) और रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को पूरी तरह नष्ट कर देती है. शुरुआत में यह सामान्य फ्लू या मलेरिया जैसा लगता है, जिससे मरीज धोखा खा जाता है. इसके अलावा अत्यधिक कमजोरी और थकान महसूस होना, मांसपेशियों, जोड़ों और सिर में तेज दर्द व गले में गंभीर खराश के भी लक्षण दिखते हैं.

यह अब तक किन-किन देशों में फैल चुका है?

  • कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और सूडान: यहीं से 1976 में इसकी शुरुआत हुई थी और अब तक कांगो में इसके सबसे ज्यादा 17 बार प्रकोप आ चुके हैं.
  • पश्चिम अफ्रीका का महाप्रकोप (2014-2016): यह इतिहास का सबसे भीषण इबोला प्रकोप था, जिसने गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन को पूरी तरह तबाह कर दिया था. इस दौरान 28,600 से अधिक लोग संक्रमित हुए थे और 11,300 से अधिक लोगों की जान चली गई थी.
  • युगांडा, गैबॉन और आइवरी कोस्ट: इन पूर्वी और मध्य अफ्रीकी देशों में समय-समय पर सूडान और बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के मामले सामने आते रहे हैं.
  • गैर-अफ्रीकी देश (सीमित फैलाव): चिकित्साकर्मियों या यात्रा इतिहास के कारण अमेरिका (USA), यूनाइटेड किंगडम (UK), स्पेन, इटली, नाइजीरिया, माली और सेनेगल जैसे देशों में भी इसके छिटपुट मामले और स्थानीय संक्रमण दर्ज किए जा चुके हैं.

अब स्टेम सेल थेरेपी से नहीं होगा सेरेब्रल पाल्सी और ऑटिज्म का इलाज, इस वजह से लगी रोक

WHO की ताजा चेतावनी क्या है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों के तहत कांगो और युगांडा में फैल रहे मौजूदा इबोला प्रकोप को ‘ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी’ घोषित किया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साफ किया है कि वर्तमान में फैल रहा वायरस ‘ज़ैरे स्ट्रेन’ नहीं है, बल्कि ‘बुंडिबुग्यो’ है. इस स्ट्रेन के लिए चिकित्सा जगत के पास वर्तमान में कोई भी अनुमोदित वैक्सीन या पुख्ता दवा उपलब्ध नहीं है. भले ही वैश्विक स्तर पर वर्तमान खतरा कम है, लेकिन पूर्वी अफ्रीकी देशों और उनके पड़ोसियों के लिए स्वास्थ्य प्रणालियों के कमजोर होने के कारण यह जोखिम बेहद उच्च श्रेणी में है.

अंतरराष्ट्रीय सीमा पार फैलाव

कांगो के इतूरी प्रांत से यात्रा कर युगांडा की राजधानी कंपाला पहुंचे लोगों में इसके मामले मिलने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यह सीमा पार बहुत तेजी से बढ़ सकता है. सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और सीमाओं पर थर्मल स्कैनिंग व निगरानी कड़ी करने की हिदायत दी गई है.संयुक्त राष्ट्र ने शुक्रवार को कहा कि उसने कांगो और क्षेत्र में सहायता में तेजी लाने के लिए अपने केंद्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया कोष से 60 मिलियन अमेरिकी डॉलर जारी किए हैं.

सांसों में जहर: क्या PM 2.5 बढ़ा रहा फेफड़ों के कैंसर का खतरा? वायु प्रदूषण पर AIIMS का पहला व्यापक रिसर्च

अमेरिका ने कांगो और युगांडा में प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए 23 मिलियन अमरीकी डालर की धनराशि देने का वादा किया है, और कहा है कि वह प्रभावित क्षेत्रों में 50 इबोला उपचार क्लीनिकों की स्थापना के लिए भी धनराशि देगा. युगांडा के अधिकारियों ने कहा कि लक्षण दिखाने वाले मरीजों की बड़े उपचार केंद्र में रेफर करने से पहले अस्पताल में जांच की जाती है, जिससे नर्सों और डॉक्टरों को संभावित संक्रमण का पता चलता है.

इबोला वायरस से बचने के उपाय

  • प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा से बचें: जब तक बहुत जरूरी न हो, कांगो, युगांडा या अन्य प्रभावित अफ्रीकी देशों की यात्रा टाल दें.
  • सीधे संपर्क से दूरी: इबोला के संदिग्ध या पुष्ट मरीज के शारीरिक तरल पदार्थों (खून, लार, दस्त) के संपर्क में आने से पूरी तरह बचें.
  • हाथों की स्वच्छता: नियमित रूप से साबुन और साफ पानी से हाथ धोएं, या कम से कम 60% अल्कोहल वाले सैनिटाइज़र का उपयोग करें.
  • जंगली जानवरों से दूरी: चमगादड़ों, बंदरों या बीमार जानवरों के सीधे संपर्क में न आएं. जंगली जानवरों के कच्चे या कम पके मांस का सेवन बिल्कुल न करें.
  • सुरक्षित अंतिम संस्कार: यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु इबोला से हुई है, तो पारंपरिक रीति-रिवाजों को दरकिनार करते हुए प्रशिक्षित स्वास्थ्य टीमों द्वारा ही पीपीई किट पहनकर सुरक्षित अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए.
  • पीपीई (PPE) किट का प्रयोग: अस्पतालों में डॉक्टरों और नर्सों को इबोला रोगियों का इलाज करते समय डबल ग्लव्स, फेस शील्ड, गाउन और विशेष मास्क पहनना अनिवार्य है ताकि कोई आकस्मिक संक्रमण न हो.

भारत की स्थिति क्या है?

राहत की बात यह है कि भारत में अब तक इबोला वायरस का एक भी मामला सामने नहीं आया है. हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अलर्ट के तुरंत बाद भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक उच्चस्तरीय एडवाइजरी जारी कर दी है. अफ्रीकी देशों से भारत आने वाले यात्रियों की कड़ी निगरानी की जा रही है और देश की प्रमुख प्रयोगशालाओं को अलर्ट मोड पर रखा गया है.स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि किसी भी संक्रामक बीमारी से बचने के लिए अफवाहों से दूर रहें और केवल आधिकारिक स्वास्थ्य सूचनाओं पर ही भरोसा करें.

कोरोना से 30 गुना ज्यादा खतरनाक है हंता वायरस; कैसे होता है और क्या हैं लक्षण, जानें इसकी हर डिटेल

Follow Us On: Facebook | X | LinkedIn | YouTube Instagram

You may also like

LT logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?