Houthi Attack Mecca: सऊदी अरब के मिलिट्री प्रवक्ता, मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने कहा कि मंगलवार शाम को हूतियों ने पवित्र शहर मक्का में ड्रोन से हमला किया. उन्होंने कहा सऊदी एयर डिफेंस ने मक्का एयरस्पेस में घुसने से पहले एक ड्रोन को इंटरसेप्ट करके नष्ट कर दिया. मक्का को इस्लाम का सबसे पवित्र शहर माना जाता है. यह पैगंबर मुहम्मद का जन्मस्थान और काबा की जगह है, जहां दुनिया भर के मुसलमान दिन में पांच बार नमाज पढ़ते हैं. सऊदी मिलिट्री प्रवक्ता ने कहा कि पवित्र शहर की सिक्योरिटी उनके लिए एक “रेड लाइन” है और सऊदी मिलिट्री दुश्मन या आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ एक्शन लेने में हिचकिचाएगी नहीं. मक्का के इतिहास में पहली बार हवाई हमले का इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया है.
हूतियों ने हमले से किया इनकार
वहीं दूसरी तरफ यमन के हूती विद्रोहियों ने इस बात से साफ मना कर दिया है कि वे मक्का या किसी भी इस्लामिक पवित्र जगह को टारगेट कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह दावा कि वे पवित्र जगहों को धमका रहे हैं, पूरी तरह से झूठ है. हूती विद्रोहियों के पोलित ब्यूरो के सदस्य हजम अल-असद ने एक्स पर लिखा, “मक्का को टारगेट करने का दावा एक पुराना झूठ है. इसे पहले भी इस्तेमाल किया जा चुका है.”
पीछे हटा अमेरिका
यमन के UN एम्बेसडर अब्दुल्ला अल-सादी ने मंगलवार को UN सिक्योरिटी काउंसिल को बताया कि यमन की सरकारी सेना फिर से इकट्ठा हो रही है और कुछ इलाकों पर कंट्रोल वापस पा रही है. उन्होंने हूतियों पर हथियारों की रोक लागू करने और उनके बढ़ते असर की बुराई करने की अपील की. उन्होंने चिंता जताई कि अगर हूतियों का असर बढ़ता रहा, तो व्यापार और ऊर्जा के लिए जरूरी समुद्री रास्ते बड़े दबाव और राजनीतिक मोलभाव का जरिया बन सकते हैं.
इस बीच, सऊदी अरब अपने सबसे अहम सहयोगी अमेरिका से मिलने वाले सपोर्ट को लेकर चिंतित है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप US कांग्रेस के चुनाव पास आने के साथ मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को बढ़ाने को लेकर सतर्क हैं. वहीं संयुक्त अरब अमीरात हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब के साथ पहले जितना सक्रिय नहीं है. UAE अपने सहयोगियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते मतभेदों के बाद यमन में संघर्ष से काफी हद तक हट गया है.
सऊदी ने मिस्र से मांगा सहयोग
इस बीच, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मिस्र के प्रेसिडेंट अब्देल-फतह अल-सिसी से मुलाकात की और क्षेत्रीय सुरक्षा पर सहयोग मांगा. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब हूती हमले सऊदी अरब के शिपिंग और ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव डाल रहे हैं. इन घटनाओं का असर इंटरनेशनल ऑयल मार्केट पर भी पड़ा है और तेल की कीमतों में तेजी आई है.
सऊदी में तेल संकट
सऊदी अरब लंबे समय से ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों से लड़ रहा है. हाल के दिनों में, हूतियों ने यमन में अपना असर और इलाकाई कंट्रोल बढ़ाया है, जिससे रेड सी के जरिए सऊदी ऑयल एक्सपोर्ट की सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है. कुछ दिन पहले हूतियों ने सऊदी अरब की प्रमुख ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन पर हमला किया, जिसे तेल का निर्यात रुक गया. रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस हमले के पीछे इराक में ईरान के सपोर्ट वाले मिलिशिया का हाथ था. अधिकारियों के मुताबिक, पाइपलाइन की मरम्मत में कई हफ्ते लग सकते हैं, जिससे रोजाना कई मिलियन बैरल तेल की सप्लाई में रुकावट आ गई है.
सऊदी पाइपलाइन पर हमला और लाल सागर पर हूती का कब्जा: वैश्विक तेल आपूर्ति ठप, बढ़ा संकट
News Source: PTI
