Largest Producer of LPG: एलपीजी सिलेंडर की किल्लत और उसकी ताजा कीमतों ने हर तरफ हलचल मचा रखी है. लेकिन आप उस देश का नाम जानते हैं, जो वाकई में LPG का किंग है.
28 March, 2026
आज के दौर में किचन की जान और फैक्ट्रियों की शान अगर कोई है, तो वो है एलपीजी (LPG) यानी लिक्विड पेट्रोलियम गैस. ब्लू फ्लेम पर पकते खाने से लेकर सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों तक, एलपीजी हमारी लाइफस्टाइल का एक खास हिस्सा बन चुकी है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके किचन तक पहुंचने वाले इस साफ-सुथरे फ्यूल का असली पावरहाउस कौन है? दुनिया में पावर का खेल बदल रहा है और इस खेल में एक ऐसा खिलाड़ी है जिसने सबको पीछे छोड़ दिया है. आप आपको उसी के बारे में पूरी डिटेल देंगे.
नंबर-1 LPG प्रोड्यूसर
अगर आप सोच रहे हैं कि कोई खाड़ी गल्फ कंट्री या रूस इस लिस्ट में टॉप पर होगा, तो आप गलत हैं. दरअसल, दुनिया में सबसे ज्यादा एलपीजी पैदा करने वाला देश कोई और नहीं, बल्कि अमेरिका है. पिछले एक दशक से अमेरिका ने ग्लोबल मार्केट में अपना दबदबा बनाया हुआ है. इसकी सबसे बड़ी वजह वहां आया ‘शेल गैस रेवोल्यूशन’ है. पर्मियन बेसिन और मार्सेलस शेल जैसे इलाकों में मॉर्डन टेक्निक का इस्तेमाल करके, अमेरिका हर साल लगभग 84 मिलियन टन एलपीजी प्रोड्यूस करता है. दुनिया की कुल LPG सप्लाई का करीब 26% हिस्सा अकेले अमेरिका से आता है. आज वो न सिर्फ सबसे बड़ा प्रोड्यूसर है, बल्कि एशिया, यूरोप और लैटिन अमेरिका जैसी बड़ी मार्केट को एलपीजी एक्सपोर्ट करने में भी सबसे आगे है.
टॉप-5 LPG धुरंधर
- साल 2025-2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल एनर्जी मार्केट में अमेरिका के बाद भी कई ऐसे देश हैं जो इस रेस में मजबूती से टिके हुए हैं.
- अमेरिका: 84 मिलियन टन (26% शेयर)
- चीन: 32 मिलियन टन (10% शेयर)
- सऊदी अरब: 26 मिलियन टन (8% शेयर)
- रूस: 17 मिलियन टन (5% शेयर)
- कनाडा: 12 मिलियन टन (4% शेयर)
भारत की कहानी
भारत में LPG मुख्य रूप से तेल रिफाइनिंग के दौरान एक बाई-प्रोडक्ट के रूप में बनाई जाती है. इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां अपनी बड़ी रिफाइनरियों के जरिए घरेलू सप्लाई में बड़ा योगदान देती हैं. हालांकि, भारत एक बड़ा देश है और हमारी जरूरतें बहुत ज्यादा हैं. इसी भारी डिमांड को पूरा करने के लिए भारत को अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से इम्पोर्ट करना पड़ता है, जिससे हम दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी खरीदारों में से एक बन गए हैं.
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कैसे बनती है ये गैस?
- एलपीजी सीधे जमीन से नहीं निकलती. इसे 2 बड़े प्रोसेस के जरिए हासिल किया जाता है.
- नेचुरल गैस प्रोसेसिंग: दुनिया की लगभग 60% एलपीजी तब निकाली जाती है जब जमीन से नेचुरल गैस निकाली जा रही होती है.
- कच्चे तेल की रिफाइनिंग: बाकी 40% हिस्सा तब बनता है जब कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल से पेट्रोल और डीजल बनाया जाता है.
- इसके बाद इस गैस को प्रेशर डालकर लिक्विड में बदल दिया जाता है, जिससे इसे सिलेंडर में भरकर घर-घर पहुंचाना आसान हो जाता है.
मल्टीपल अवतार
- एलपीजी सिर्फ दाल-चावल पकाने के काम नहीं आती, इसके और भी कई रूप हैं.
- ट्रांसपोर्ट: ऑटोगैस के रूप में, जो पेट्रोल के मुकाबले सस्ती और कम प्रदूषण फैलाने वाली है.
- इंडस्ट्री: कांच और सिरेमिक बनाने वाली फैक्ट्रियों में फ्यूल के तौर पर.
- खेती: फसल को सुखाने और फार्म मशीनरी चलाने के लिए.
मजेदार फैक्ट्स
वैसे गैस की अपनी कोई गंध यानी स्मेल नहीं होती. इसमें मर्कैप्टन नाम का एक केमिकल मिलाया जाता है ताकि अगर कहीं लीक हो, तो आपको उसकी खास स्मेल आ जाए और खतरा टल सके. अगर गैस लीक होती है, तो ये ऊपर उड़ने के बजाय जमीन पर या निचले इलाकों में बैठ जाती है क्योंकि ये हवा से डेंस होती है. इसके अलावा जब एलपीजी लिक्विड से वापस गैस बनती है, तो ये अपने असली वॉल्यूम से 270 गुना ज्यादा फैल जाती है. यही वजह है कि एक छोटा सा सिलेंडर भी हफ्तों तक चलता है. साथ ही कोयले या लकड़ी के मुकाबले एलपीजी बहुत कम धुआं छोड़ती है, जिससे ये एनवायरमेंट के लिए एक बेहतर ऑप्शन मानी जाती है.
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