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परमाणु बारूद के ढेर पर दुनिया: 9 देशों के पास 12 हजार से ज्यादा बम, महाविनाश से बस एक क्लिक दूर

by Sanjay Kumar Srivastava 10 June 2026, 8:45 PM IST (Updated 10 June 2026, 8:58 PM IST)
10 June 2026, 8:45 PM IST (Updated 10 June 2026, 8:58 PM IST)
परमाणु बारूद के ढेर पर दुनिया: 9 देशों के पास 12 हजार से ज्यादा बम, महाविनाश से बस एक क्लिक दूर

Nuclear Weapons: दुनिया का सुरक्षा ढांचा अभी बहुत नाज़ुक दौर से गुजर रहा है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर के नौ देशों के पास कुल मिलाकर लगभग 12,187 परमाणु हथियार हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध और साथ ही इजराइल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध और परमाणु तबाही की कगार पर ला खड़ा कर दिया है. SIPRI के आंकड़ों के अनुसार, अकेले रूस और अमेरिका के पास दुनिया के कुल परमाणु हथियारों का लगभग 86 से 90 प्रतिशत हिस्सा है.

परमाणु शक्तियां और उनके हथियारों की संख्या

  • रूस के पास 5,420 परमाणु हथियार हैं. यह दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु हथियार वाला देश है. इसके सैकड़ों हथियार ‘हाई अलर्ट’ पर हैं.
  • अमेरिका के पास 5,042 परमाणु हथियार हैं. तकनीकी रूप से यह दुनिया की सबसे एडवांस्ड परमाणु शक्ति है. इसके हथियार कई यूरोपीय देशों में भी तैनात हैं.
  • चीन के पास 620 परमाणु हथियार हैं. वह तेजी से अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार कर रहा है और नई मिसाइल साइलो (missile silos) बना रहा है.
  • फ्रांस के पास 370 परमाणु हथियार हैं. वह यूरोपीय संघ में एकमात्र स्वतंत्र परमाणु शक्ति है, और उसकी परमाणु रणनीति मुख्य रूप से पनडुब्बी आधारित प्रणालियों पर निर्भर करती है.
  • ब्रिटेन के पास 225 परमाणु हथियार हैं. वह NATO का सदस्य है और उसका परमाणु जखीरा अमेरिकी प्रणालियों के साथ एकीकृत है.
  • भारत के पास 190 परमाणु हथियार हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसने अपने हथियारों के जखीरे में थोड़ी बढ़ोतरी की है. भारत ‘पहले इस्तेमाल न करने’ (नो फर्स्ट यूज़) की नीति का पालन करता है.
  • पाकिस्तान के पास 170 परमाणु हथियार हैं. उसका पूरा परमाणु कार्यक्रम भारत पर केंद्रित है और वह अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है.
  • इजराइल के पास 90 परमाणु हथियार हैं. हालांकि इजराइल ने कभी भी आधिकारिक तौर पर परमाणु हथियार होने की बात स्वीकार नहीं की है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इनके होने की पुष्टि करते हैं.
  • उत्तर कोरिया के पास 60 परमाणु हथियार हैं. उसका परमाणु कार्यक्रम बहुत आक्रामक और गुप्त है और वह लगातार इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBMs) का परीक्षण करता रहता है.

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सुरक्षा या खतरा? परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की सच्चाई

परमाणु हथियार रखने वाले देश लगातार यह दावा करते हैं कि ये हथियार ‘डिटरेंट’ (रोकथाम करने वाले साधन) के तौर पर काम करते हैं यानी इनका मकसद युद्ध करना नहीं, बल्कि दुश्मन को हमला करने से रोकना है. हालांकि, मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में इनका इस्तेमाल दो तरह से किया जा रहा है.

  • आत्मरक्षा और बड़े युद्धों को रोकनाः परमाणु हथियार आपसी विनाश की निश्चितता के सिद्धांत पर काम करते हैं. इसका मतलब है कि अगर परमाणु हथियारों से लैस दो देश आपस में युद्ध करते हैं, तो दोनों पूरी तरह से नष्ट हो जाएंगे. इसी डर ने शीतयुद्ध के दौरान अमेरिका और सोवियत संघ के बीच सीधे युद्ध को रोका था.
  • छोटे और कमजोर देशों को डराना-धमकानाः यह आज के समय की एक कठोर सच्चाई है. परमाणु शक्ति संपन्न देश अक्सर परमाणु हथियार न रखने वाले देशों पर दबाव डालने या उन्हें डराने-धमकाने के लिए इन हथियारों का इस्तेमाल करते हैं.

रूस: यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस ने NATO देशों को बार-बार चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने इस लड़ाई में सीधे दखल दिया, तो वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है. चूंकि यूक्रेन के पास परमाणु हथियार नहीं है, उसने 1994 के बुडापेस्ट मेमोरेंडम के तहत उन्हें सौंप दिया था, इसलिए वह सीधे तौर पर इस खतरे के साये में जी रहा है.

उत्तर कोरिया: उत्तर कोरिया जैसे देश अपनी सत्ता बनाए रखने और अमेरिका तथा दक्षिण कोरिया का मुकाबला करने के लिए लगातार परमाणु हमले की धमकी देते रहते हैं. इससे साफ पता चलता है कि परमाणु हथियार अब केवल बचाव के साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक ब्लैकमेल का ज़रिया बन गए हैं.

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क्या वर्तमान वैश्विक संघर्ष में परमाणु युद्ध संभव है?

ईरान, अमेरिका और इज़राइल के साथ-साथ रूस और यूक्रेन के साथ चल रहे तनाव को देखते हुए परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का जोखिम इतिहास में अपने उच्चतम स्तर पर है.

  • ईरान-अमेरिका-इजराइल मोर्चा: अमेरिका और इज़राइल लगातार ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. अगर ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला होता है और टकराव बेकाबू हो जाता है, तो इज़राइल, जिसके पास पहले से ही परमाणु हथियार है, अपनी सत्ता या अस्तित्व पर खतरा महसूस होने पर गैर पारंपरिक हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है. वहीं, ईरान भी जवाबी कार्रवाई करके मध्य पूर्व में अस्थिरता पैदा कर सकता है.
  • रूस-NATO टकराव: अगर यूक्रेन में चल रही जंग रूस की जमीन तक पहुंचती है या रूस की संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है, तो रूस अपनी रक्षा नीति के तहत ‘टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियारों’ (कम दूरी और कम क्षमता वाले परमाणु हथियार) का इस्तेमाल कर सकता है. ऐसा कदम दुनिया को सीधे परमाणु युद्ध में धकेल देगा. जानकारों का मानना ​​है कि जान बूझकर परमाणु युद्ध शुरू होने की संभावना कम है. हालांकि, मौजूदा तनाव के बीच गलतफहमी, बातचीत की कमी या तकनीकी खराबी के कारण परमाणु मिसाइल लॉन्च होने का खतरा काफी बढ़ गया है.

अगर परमाणु युद्ध होता है, तो पृथ्वी पर क्या असर होगा?

आज के जमाने के किसी एक परमाणु हथियार का इस्तेमाल भी इंसानी इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी होगी. अगर बड़े पैमाने पर परमाणु युद्ध छिड़ता है (जैसे अमेरिका और रूस या भारत और पाकिस्तान के बीच), तो पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा. इसके विनाशकारी असर कुछ इस तरह होंगे.

1. तुरंत तबाही और थर्मल रेडिएशन

धमाके के पहले ही सेकंड में तापमान लाखों डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा, जिससे धमाके की जगह (एपिसेंटर) से कई किलोमीटर के दायरे में मौजूद हर चीज- इमारतें और धातु तुरंत भाप बनकर उड़ जाएगी. इसके बाद निकलने वाली तेज रोशनी लोगों को अंधा कर देगी, जबकि ज़बरदस्त झटके वाली लहरें आसपास के कई किलोमीटर के इलाके में हर चीज़ को मलबे में बदल देंगी.

2. जानलेवा रेडियोएक्टिव फॉलआउट

धमाके के बाद बड़ी मात्रा में रेडियोएक्टिव धूल और कण हवा में फैल जाएंगे. यह ‘फॉलआउट’ हवा के साथ बहकर पूरी दुनिया में फैल जाएगा. जो लोग शुरुआती धमाके में बच जाएंगे, वे कैंसर, ल्यूकेमिया, त्वचा के गलने और जेनेटिक म्यूटेशन जैसी तकलीफ़देह स्थितियों के कारण दर्दनाक मौत का शिकार होंगे. आने वाली कई पीढ़ियां विकलांगता के साथ पैदा होंगी.

3. न्यूक्लियर विंटर

यह परमाणु युद्ध का सबसे विनाशकारी और लंबे समय तक रहने वाला असर है. वैज्ञानिकों के अनुसार, जलते हुए शहरों से निकलने वाला लाखों टन काला धुआं और कालिख पृथ्वी के समताप मंडल (स्ट्रैटोस्फियर) में जमा हो जाएगी. यह कालिख सूरज की किरणों को पूरी तरह से रोक देगी. नतीजतन, पृथ्वी का तापमान अचानक कई डिग्री गिर जाएगा. इस घटना को ‘न्यूक्लियर विंटर’ कहा जाता है. सालों तक सूरज की रोशनी नहीं मिलेगी, जिससे दुनिया भर की खेती-बाड़ी पूरी तरह ठप हो जाएगी.

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4. भयानक अकाल और दुनिया भर में भुखमरी

फसलें न उग पाने के कारण दुनिया भर में अनाज का भंडार खत्म हो जाएगा. इंटरनेशनल स्टडीज़ के अनुसार, एक बड़े न्यूक्लियर युद्ध के कारण पड़ने वाले अकाल से भुखमरी से 5 अरब से ज़्यादा लोगों की मौत हो जाएगी,जो दुनिया की आबादी का 60% से ज़्यादा है. बचे हुए लोग खाने और साफ़ पानी की हर बूंद के लिए एक-दूसरे से लड़ेंगे, जिससे इंसानी सभ्यता असल में वापस पाषाण युग में चली जाएगी.

5. ओजोन परत का नष्ट होना

परमाणु विस्फोटों से निकलने वाली नाइट्रोजन ऑक्साइड गैसें पृथ्वी की सुरक्षा कवच ओज़ोन परत के 60 से 70% हिस्से को नष्ट कर देंगी. नतीजतन, सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें सीधे पृथ्वी तक पहुंचेंगी, जिससे बचे हुए इंसानों और अन्य जीवों की त्वचा जल जाएगी और पौधों का DNA नष्ट हो जाएगा.

परमाणु अप्रसार संधि (NPT) क्या है?

NPT एक अहम अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसका मकसद परमाणु हथियारों और तकनीक के प्रसार को रोकना, परमाणु निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देना और शांतिपूर्ण कामों के लिए परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल में सहयोग को बढ़ाना है. इस संधि पर 1968 में हस्ताक्षर किए गए थे और यह 1970 में लागू हुई थी. अभी भारत, पाकिस्तान, इज़राइल, उत्तर कोरिया और दक्षिण सूडान को छोड़कर दुनिया के लगभग सभी देश इस संधि के सदस्य हैं.

इस संधि के विफल होने के मुख्य कारण दोहरे मापदंड और भेदभाव है. यह दुनिया को दो श्रेणियों में बांटती है-परमाणु हथियार वाले देश (USA, रूस, चीन, UK और फ्रांस) और परमाणु हथियार न रखने वाले देश. P5 देशों पर अपने हथियारों के जखीरे को खत्म करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है, जिससे दूसरे देशों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है.

प्रमुख देशों का शामिल न होना

भारत और पाकिस्तान जैसे परमाणु हथियार वाले देशों ने इस संधि पर कभी हस्ताक्षर नहीं किए, क्योंकि वे इसे भेदभावपूर्ण मानते हैं. इज़राइल भी इसके दायरे से बाहर है. इन देशों के शामिल न होने से संधि की वैश्विक अहमियत कम हो जाती है. उत्तर कोरिया 2003 में इस संधि से हट गया था और उसने कई बार परमाणु परीक्षण किए हैं. इससे पता चलता है कि यह संधि देशों को परमाणु महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने से रोकने में नाकाम रही है.

  • सजा देने की असरदार व्यवस्था का अभाव: अंतरराष्ट्रीय समुदाय (खासकर UN सुरक्षा परिषद) के पास उन देशों के खिलाफ़ सख़्त और तुरंत कार्रवाई करने के लिए कोई मज़बूत तंत्र नहीं है जो संधि का उल्लंघन करते हैं या उससे हट जाते हैं.
  • आधुनिक भू-राजनीतिक तनाव: हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के संकट ने परमाणु हथियारों की होड़ को फिर से हवा दी है. P5 देश खुद परमाणु हथियारों को आधुनिक बनाने में लगे हुए हैं, जिससे परमाणु निरस्त्रीकरण का मूल उद्देश्य कमज़ोर हो रहा है.

आज की दुनिया में, परमाणु हथियार किसी देश की सुरक्षा की गारंटी नहीं देते, बल्कि वे पूरी मानवता के सामूहिक विनाश का साधन हैं. परमाणु हथियारों की होड़ में छोटे देशों की भागीदारी और महाशक्तियों द्वारा उन पर डाला जाने वाला दबाव इस खतरे को और बढ़ा रहा है. दुनिया के नेताओं को यह समझना चाहिए कि परमाणु युद्ध कभी जीता नहीं जा सकता और इसे कभी लड़ा भी नहीं जाना चाहिए.

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