US Iran Strike: पश्चिम एशिया में शांति को वापस बहाल करने की कोशिशों के उलट एक-दूसरे पर हमले अधिक देखे जा रहे हैं. ईरान और अमेरिका पिछले लगातार दो दिनों से आपस में एक बार फिर से लड़ते हुए दिख रहे हैं. इनकी इस लड़ाई से दुनिया के कई देशों को परेशानी और चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है. जब तब ईरान और अमेरिका के बीच शांति बहाल नहीं होती तब तक दुनिया की एनर्जी सप्लाई के लिए बहुत ही अहम समुद्री रास्ता होर्मुज का खुलना मुश्किल है.
इस बीच अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर लगातार दूसरे दिन भी हमला कर दिया है. बता दें कि ये हमले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के बाद किए गए हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि रुकी हुई बातचीत के लिए तेहरान को “कीमत चुकानी पड़ेगी”.
ईरान भर में कई जगहों पर हमला
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने गुरुवार तड़के (सुबह) कहा कि उसने ईरान को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमलों का लेटेस्ट दौर “पूरा कर लिया है”. जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी केंद्रीय कमान ने एक बयान जारी कर कहा कि उसकी सेनाओं ने “ईरान भर में ईरानी सैन्य निगरानी क्षमताओं, कम्यूनिकेशन सिस्टम और हवाई रक्षा स्थलों” को निशाना बनाया. हालांकि, उसने हमलों से हुए नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी. अमेरिकी सेना ने कहा कि ये हमले अमेरिकी वायु सेना, मरीन और नौसेना द्वारा किए गए थे. सेंट्रल कमांड ने कहा, “ये हमले ईरान की अनुचित और लगातार आक्रामकता के जवाब में किए गए हैं. अमेरिकी सेना सतर्क, घातक और तैयार है.”
ईरान की जवाबी कार्रवाई की धमकी
बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते हमलों से युद्ध समाप्त करने के प्रयासों के पटरी से उतरने का खतरा पैदा हो गया है. वहीं, ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है. इस बीच देखा गया कि गुरुवार तड़के बहरीन में मिसाइल सायरन बजने लगे, जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. वहीं, ईरानी मीडिया ने बताया कि दक्षिणी ईरान में बंदर अब्बास, सिरिक और मीनाब में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं हैं. इस सप्ताह यह तीसरी बार था जब दोनों तरफ से हुए हमलों ने दो महीने के युद्धविराम की परीक्षा ली.
धमकियों और दबाव के तहत बातचीत नहीं- ईरान
मालूम हो कि अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप ने ईरान से युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किया है. उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में संकेत दिया था कि कुछ ही दिनों में एक समझौता हो सकता है. ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत ने कहा कि अगर अमेरिका समझौता चाहता है तो उसे बल प्रयोग की धमकियों से बचना चाहिए.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बुधवार को राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा, “ईरान ने कभी भी धमकियों और दबाव के तहत बातचीत नहीं की है और न ही वह कभी दबाव या पूछताछ के आगे झुकेगा.”
ईरान-अमेरिका तनाव से दुनिया में बढ़ी महंगाई
जब से अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले के साथ युद्ध शुरू किया है, तब से इस संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है. दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतों को बढ़ा दिया है और भोजन और अन्य बुनियादी वस्तुओं को अधिक महंगा बना दिया है. बुधवार को कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क 93 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था, जो युद्ध की शुरुआत के बाद से 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है.
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News Source: PTI
