Home Top News आतंकवाद की दोहरी मार: भारत के खिलाफ साजिश रचने वाला पाक अब खुद झेल रहा आत्मघाती हमले

आतंकवाद की दोहरी मार: भारत के खिलाफ साजिश रचने वाला पाक अब खुद झेल रहा आत्मघाती हमले

by Sanjay Kumar Srivastava 26 May 2026, 8:43 PM IST (Updated 26 May 2026, 8:44 PM IST)
26 May 2026, 8:43 PM IST (Updated 26 May 2026, 8:44 PM IST)
आतंकवाद की दोहरी मार: भारत के खिलाफ साजिश रचने वाला पाकिस्तान अब खुद झेल रहा आत्मघाती हमले.

Terrorism: भारत को आंतरिक और बाहरी रूप से कमजोर करने के लिए पाकिस्तान दशकों से घाव देने की रणनीति पर काम कर रहा है. सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और वहां सक्रिय आतंकी संगठन सीधे सैन्य युद्ध में हारने के बाद अब आतंकवाद, ड्रग्स और डिजिटल दुष्प्रचार के जरिए भारत को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं.

आतंकवाद और छद्म युद्ध

पाकिस्तान भारतीय सीमा पर लगातार घुसपैठ, संघर्ष विराम का उल्लंघन और हथियारों की तस्करी के जरिए अशांति फैलाता है. हाल के वर्षों में तकनीक का दुरुपयोग बढ़ा है. पंजाब और जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन के माध्यम से आधुनिक हथियार, टिफिन बम और जाली नोट गिराए जा रहे हैं. इसका मुख्य उद्देश्य भारत की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाना और देश के भीतर सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ना है. कश्मीरी घाटी में स्थानीय आतंकियों के खात्मे के बाद अब पाकिस्तान विदेशी भाड़े के आतंकियों को जम्मू क्षेत्र के पीर पंजाल इलाकों में भेजकर नए सिरे से हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहा है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे टेलीग्राम, व्हाट्सएप और एक्स) पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर भारतीय युवाओं को निशाना बनाया जाता है. धार्मिक और संवेदनशील मुद्दों पर भ्रामक वीडियो और झूठी खबरें फैलाकर युवाओं में सरकार और देश के खिलाफ असंतोष भरा जाता है.

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नार्को आतंकवाद

युवाओं को बर्बाद करने का यह सबसे खतरनाक हथियार है. पाकिस्तान से भारी मात्रा में हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स भारत (विशेषकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर) में भेजे जाते हैं. युवाओं को पहले नशे की लत लगाई जाती है और फिर ड्रग्स की सप्लाई के बदले उनसे आतंकियों के लिए जासूसी, हथियारों की डिलीवरी या ओवरग्राउंड वर्कर के रूप में काम लिया जाता है. इस काले धन का उपयोग टेरर फंडिंग में होता है.

खुद के बुने जाल में फंसा पाकिस्तान

पाकिस्तान ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए पाला, जबकि हक्कानी नेटवर्क को अफगानिस्तान में अपने हितों के लिए खाद-पानी दिया. लेकिन आज स्थिति बिल्कुल बदल चुकी है.

  • भस्मासुर बना आतंकवाद: जिन चरमपंथियों को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने पनाह दी, आज वे ही पाकिस्तान की संप्रभुता को चुनौती दे रहे हैं. पाकिस्तान के सुरक्षा बलों (सेना और पुलिस) पर आए दिन आत्मघाती हमले हो रहे हैं.
  • डूरंड रेखा का विवाद: अफगानिस्तान में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद से पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा (डूरंड रेखा) पूरी तरह अशांत हो गई है. पाकिस्तान ने सीमा पर बाड़ लगाने की कोशिश की, जिसे पश्तूनों और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने अपनी जमीन पर कब्जा माना और सेना के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया. 2026 की शुरुआत में ही पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव इस कदर बढ़ा कि दोनों देशों की सेनाओं में सीधा टकराव शुरू हो गया.
  • टार्गेट किलिंग का खौफ: पाकिस्तान के भीतर एक और दिलचस्प और रहस्यमयी घटनाक्रम चल रहा है. पिछले कुछ वर्षों में भारत के कई मोस्ट वांटेड आतंकवादी (जैसे लश्कर के शेख यूसुफ अफरीदी, बिलाल आरिफ सलाफी और शाहिद लतीफ) पाकिस्तान की सड़कों पर अज्ञात हमलावरों द्वारा मारे गए हैं. इसके कारण पाकिस्तान के सुरक्षित ठिकानों में छिपे आतंकियों में भी अपनी ही सरकार और ISI के खिलाफ अविश्वास बढ़ गया है.

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आतंकवाद को बढ़ावा देने की नीति

24 मई 2026 को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा में एक बार फिर आतंकवाद का भीषण तांडव देखने को मिला, जहां सैन्य कर्मियों को ले जा रही एक ट्रेन को निशाना बनाकर किए गए आत्मघाती कार बम विस्फोट में कम से कम 23 लोगों की मौत हो गई और 70 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है.

यह घटना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जो पाकिस्तान दशकों से अपने पड़ोसी देशों (विशेषकर भारत और अफगानिस्तान) में आतंकवाद को बढ़ावा देने और उसे कूटनीतिक औजार के रूप में इस्तेमाल करने की नीति अपनाता रहा है, वह आज खुद उसी भस्मासुर यानी आतंकवाद की आग में पूरी तरह झुलस रहा है. वैश्विक मंच पर जारी आंकड़ों के मुताबिक, ‘ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026’ में पाकिस्तान दुनिया का सबसे अधिक आतंकवाद प्रभावित देश बनकर उभरा है. पाकिस्तान में जारी खूनी खेल, बलूच विद्रोह, चरमराते विकास और वहां सक्रिय आतंकी संगठनों की गतिविधियां वहां की सरकार पर भारी पड़ रही हैं.

क्वेटा ट्रेन विस्फोट (24 मई 2026)

बलूच लिबरेशन आर्मी का खूनी वारः रविवार (24 मई) की सुबह क्वेटा रेलवे स्टेशन के पास उस समय चीख-पुकार मच गई जब विस्फोटकों से लदी एक गाड़ी को जाफर एक्सप्रेस ट्रेन के एक डिब्बे से टकरा दिया गया. यह ट्रेन क्वेटा से पेशावर जा रही थी और इसमें बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सेना के जवान सवार थे.

  • नुकसान की भयावहता: इस भीषण धमाके के कारण ट्रेन का इंजन और तीन डिब्बे पटरी से उतर गए, जिनमें से दो डिब्बे पूरी तरह पलट गए. धमाका इतना जबरदस्त था कि पास की आवासीय इमारतों के शीशे टूट गए और मलबे में तब्दील हुई बोगियों से घंटों धुआं निकलता रहा.
  • BLA का हाथ: अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने तुरंत इस हमले की जिम्मेदारी ली. बीएलए का कहना है कि उनका निशाना पाकिस्तानी सेना के जवान थे. इससे पहले मार्च 2025 में भी बीएलए ने इसी जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाईजैक कर लिया था, जिसमें सैन्य ऑपरेशन के बाद 21 बंधकों और 4 सैनिकों की मौत हुई थी.

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बलूचिस्तान की अस्थिरता

बलूचिस्तान क्षेत्रफल के लिहाज से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन यह सबसे कम आबादी वाला और सबसे पिछड़ा इलाका भी है. बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) यहां का एक प्रमुख अलगाववादी सशस्त्र समूह है जो पाकिस्तान से पूरी तरह आजादी की मांग करता है.

बलूच विद्रोह के मुख्य कारण

  • संसाधनों की लूट: बलूचिस्तान प्राकृतिक गैस, कोयला और तांबे जैसे खनिजों से समृद्ध है. बलूच लोगों का आरोप है कि इस्लामाबाद की केंद्र सरकार उनके संसाधनों को लूटकर पंजाब प्रांत के विकास में लगाती है, जबकि बलूच लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं.
  • चीन का दखल: चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) और ग्वादर पोर्ट बलूचिस्तान में ही स्थित है. बलूच नागरिक इसे चीनी उपनिवेशवाद के रूप में देखते हैं. बीएलए ने हाल के वर्षों में चीनी इंजीनियरों और परियोजनाओं को सीधे निशाना बनाया है ताकि चीनी निवेश को वहां से खदेड़ा जा सके.
  • पाकिस्तानी सेना का दमन: पाकिस्तानी सेना पर बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन, युवाओं के जबरन गायब होने और बलूच कार्यकर्ताओं की हत्याओं के गंभीर आरोप हैं. इसी दमन के जवाब में बीएलए ने अपनी ‘मजीद ब्रिगेड’ के तहत आत्मघाती हमलों को तेज कर दिया है.वर्ष 2024 से 2026 के बीच बलूच विद्रोही समूहों (BLA और BLF) के हमलों में 100% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसने पाकिस्तानी सेना की नाक में दम कर रखा है.

आतंकवाद के दलदल में धंसा पाकिस्तान

आतंकवाद ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को पूरी तरह तबाह कर दिया है. आज पाकिस्तान विकास की दौड़ में पूरी दुनिया से पिछड़ चुका है.

आर्थिक दिवालियापन और कर्ज का जाल: पाकिस्तान अपनी जीडीपी का एक बहुत बड़ा हिस्सा सेना और आतंकवाद से लड़ने में खर्च कर देता है. इसके कारण देश शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर निवेश नहीं कर पा रहा है. पाकिस्तान पूरी तरह से आईएमएफ (IMF) और मित्र देशों (चीन, सऊदी अरब) के कर्ज पर निर्भर है.

विदेशी निवेश का खात्मा: कोई भी विदेशी कंपनी ऐसे देश में पैसा नहीं लगाना चाहती जहां रेलवे स्टेशनों पर आत्मघाती हमले होते हों और विदेशी नागरिकों (विशेषकर चीनियों) की सुरक्षा की कोई गारंटी न हो.

मुद्रास्फीति और कंगाली: पाकिस्तान में महंगाई दर आसमान छू रही है. आम जनता के लिए आटा, दाल, बिजली और पेट्रोल खरीदना दूभर हो चुका है. आतंकवाद के कारण आंतरिक विस्थापन बढ़ा है और देश में कानून-व्यवस्था का पूरी तरह जनाजा निकल चुका है.

पाकिस्तान में सक्रिय प्रमुख आतंकवादी संगठन

  • तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP)
  • बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA)
  • लश्कर-ए-तैयबा व जैश-ए-मोहम्मद
  • इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISKP)

24 मई 2026 को क्वेटा में हुआ ट्रेन ब्लास्ट इस बात की चेतावनी है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को राज्य की नीति के रूप में इस्तेमाल करना बंद नहीं करेगा, तब तक वह खुद को इस आग से नहीं बचा पाएगा. दूसरों के घर में आग लगाने की चाहत में आज पाकिस्तान का खुद का घर जल रहा है. बलूच राष्ट्रवाद की चिंगारी और टीटीपी की बंदूकों ने मिलकर पाकिस्तान को एक ऐसे चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां से उसकी आर्थिक और सामाजिक बहाली की राहें पूरी तरह बंद नजर आ रही हैं.

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