Home Top News वैट कटौती से तेल की बढ़ती कीमतों से मिल सकेगी राहत, किस राज्य में पेट्रोल-डीजल पर कितना टैक्स?

वैट कटौती से तेल की बढ़ती कीमतों से मिल सकेगी राहत, किस राज्य में पेट्रोल-डीजल पर कितना टैक्स?

by Amit Dubey 26 May 2026, 8:28 PM IST (Updated 26 May 2026, 8:29 PM IST)
26 May 2026, 8:28 PM IST (Updated 26 May 2026, 8:29 PM IST)
Petrol Diesel Price

Petrol Diesel Price: पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए ईरान और अमेरिका के बीच शांति प्रस्तावों पर दोनों ओर से चर्चा और समीक्षा हो रही है. हालांकि, जानकार बता रहे हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी इस तनातनी को खत्म करने और डील को पूरी होने में अभी और कुछ समय लग सकता है. इसकी वजह ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को एक खुफिया/अज्ञात स्थान से काम करने की बात बताई जा रही है.

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता जहां से काम कर रहे हैं वहां सूचनाओं के आदान-प्रदान करने में कुछ वक्त लग जा रहा है क्योंकि उनके पास सभी नहीं जा सकते हैं और कुछ चुनिंदा लोगों के जरिए ही उनकी सहमति और बातों को बाहर तक लाया जा रहा है. हालांकि, अधिकारियों ने यह भी बताया कि ईरान के सर्वोच्च नेता मौजूदा मसौदा समझौते की रूपरेखा पर सहमत हो गए हैं और अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट किया कि उन्हें अगले कुछ दिनों में अंतिम निर्णय मिलने की उम्मीद है.

इस बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की स्थिति जारी है. आज मंगलवार को ग्लोबल तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 1.84 प्रतिशत बढ़कर 97.91 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करते हुए दिखा. ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष ने दुनिया के करीब 20 फीसदी एनर्जी सप्लाई के लिए अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बीते 28 फरवरी से ही बाधित कर रखा है. इस समुद्री मार्ग को ईरान के द्वारा बाधित कर देने से कच्चे तेल की कीमतों में 110 डॉलर प्रति बैरल तक के उछाल दिखे हैं. हालांकि, अभी इसकी कीमत 100 डॉलर के नीचे आ गई है, लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम केवल 10 दिनों में चार बार बढ़ा दिए गए हैं.

देश में करीब चार साल बाद बीते 15 मई को पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए थे, लेकिन उसके बाद इसमें तीन बार और बढ़ोतरी की गई. जानकार बताते हैं कि आने वाले दिनों में इनकी कीमतों में और भी बढ़त की जा सकती है क्योंकि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय करेंसी में गिरावट देखी जा रही है. वहीं, कच्चे तेल के दाम काफी ऊपर-नीचे हो रहे हैं. इस वजह से भारतीय तेल कंपनियों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. बताया जा रहा है कि घरेलू तेल मार्केटिंग कंपनियों पर रुपये की कमजोरी की वजह से तेल खरीदारी में प्रेशर बढ़ रहा है, इसलिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं.

हालांकि, बीते दिनों से केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को कम कर करीब एक लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठा रही है, लेकिन जानकार बता रहे हैं कि अगर केंद्र के साथ देश की राज्य सरकारें भी अपने वैट टैक्स में कुछ कमी या कटौती कर दें तो आम लोगों को पेट्रोल-डीजल को खरीदने में पहले से थोड़ी राहत जरूर मिल सकती है. राज्य सरकारों के द्वारा पेट्रोल-डीजल पर काफी टैक्स लगाया जाता है. ये एक फीसदी से लेकर 35 फीसदी तक है. आइए जानते हैं कि तेल के बढ़ते दाम के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की भूमिका कितनी अहम है और इसके साथ ही जानेंगे कि केंद्र सरकार के अलावा देश के किस राज्य में पेट्रोल-डीजल पर कितना वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) लगता है. इसकी शुरुआत 15 मई से करीब चार बार बढ़े पेट्रोल-डीजल की कीमतों के साथ करेंगे.

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15 मई से चार बार बढ़े हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और देश में तेल की बढ़ती मांग की वजह से घरेलू तेल मार्केटिंग कंपनियों पर फाइनेंशियल दबाव बढ़ते जा रहा है. बीते दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट केवल एक भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं है बल्कि इससे आम जनता के लिए ईंधन यानी कि तेल के दाम महंगे होंगे. उन्होंने लोगों से कम से कम पेट्रोल-डीजल के इस्तेमाल करने पर जोर दिया और प्रधानमंत्री मोदी की उस अपील का भी जिक्र किया, जिसमें पीएम ने देश के नागरिकों से पेट्रोल-डीजल का कम से कम इस्तेमाल करने की बात कही थी.

वहीं, करीब चार साल बाद बीते 15 मई को देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़े. 15 मई को पूरे भारत में पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 3.29 रुपये बढ़ गई जबकि डीजल 3.11 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया. उसके बाद 19 मई को एक बार फिर से इनके दाम बढ़े. इस दिन पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 0.96 रुपये और डीजल 0.94 रुपये बढ़ी.

19 मई के बाद 23 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में एक बार फिर से बढ़ोतरी की गई. इस दौरान पेट्रोल 0.94 रुपये और डीजल 0.95 रुपये प्रति लीटर महंगे हो गए. 15 मई से 25 मई यानी मात्र 10 दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार बढ़त की गई. 25 मई को पेट्रोल प्रति लीटर 2.87 रुपये और डीजल 2.80 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया. इन चारों बढ़ोतरी को मिलाकर देखें तो पेट्रोल की कीमत में कुल 8.06 रुपये और डीजल की कीमत में 7.80 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई.

कुछ बड़े शहरों की बात करें तो देश की राजधानी दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये और एक लीटर डीजल की कीमत 95.20 रुपये है. मुंबई में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये और एक लीटर डीजल की कीमत 97.83 रुपये है. चेन्नई में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 107.77 रुपये और एक लीटर डीजल की कीमत 99.55 रुपये है. वहीं, कोलकाता में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 113.51 रुपये और एक लीटर डीजल की कीमत 99.82 रुपये है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की भूमिका

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की बात करें तो यह दुनिया का बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. यह जब से ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव में युद्ध का केंद्र बना है, तब से इसने दुनिया की अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया है. फारस और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग 33 किमी चौड़ा और करीब 167 किमी लंबा है. विश्व की एनर्जी सप्लाई इस रास्ते पर बहुत ही अधिक निर्भर है. रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया का करीब 20 से 25 फीसदी तेल और गैस का व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होता है. यह रास्ता एशियाई बाजारों तक करीब 80 फीसदी से अधिक तेल की सप्लाई का माध्यम है. होर्मुज के बाधित होने से हजारों की संख्या में तेल और गैस लदे जहाज इस समुद्री मार्ग से गुजरने के लिए इंतजार कर रहे हैं.

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भारत के लिए इस रास्ते की भूमिका की बात करें तो यह रास्ता बहुत ही खास है. भारत यहां से करीब 30 से 50 फीसदी तक कच्चे तेल और गैस का आयात करता रहा है. भारत इसी समुद्री मार्ग से ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात समेत अन्य देशों से तेल का आयात करता है. अब यह समुद्री मार्ग प्रभावित हो गया है तो भारत ने अपने खास मित्र रूस से कच्चे तेल की सप्लाई को और अधिक बढ़ा दी है. हालांकि, ईरान एक मित्र राष्ट्र के नाते भारतीय जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जाने देने की बात कहता रहा है.

भारत सरकार का पेट्रोल-डीजल पर टैक्स

राज्यों से पहले हम बात केंद्र सरकार द्वारा लगाए जाने वाले उस टैक्स की करेंगे जो पेट्रोल और डीजल पर लगाया जाता है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाधित होने के बाद देश की जनता के लिए सरकार ने मार्च में राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को घटा दी थी. 27 मार्च को केंद्र की मोदी सरकार ने देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने और लोगों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसके लिए पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये की कटौती की थी. सरकार ने पेट्रोल की एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये कर दिया था, वहीं डीजल पर 10 रुपये को घटाकर शून्य कर दिया था.
बता दें कि केंद्र सरकार के द्वारा एक लीटर पेट्रोल पर 21.90 रुपये की एक्साइज ड्यूटी यानी टैक्स की वसूली होती थी, लेकिन जब इसपर लगने वाली स्पेशल एक्साइज ड्यूटी को 10 रुपये कम कर दिया गया तो यह अब 11.90 रुपये हो गई. ऐसे ही सरकार डीजल पर कुल 17.8 रुपये एक्साइज ड्यूटी लेती थी, लेकिन इसमें भी 10 रुपये घटाकर इसे 7.8 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया.

वैट कटौती से राहत मिलने की उम्मीद

केंद्र सरकार ने हाल ही में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को 10-10 रुपये कम कर दिया था. इससे फायदा यह हुआ कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से दुनिया के अन्य देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाई गईं, लेकिन भारत में कुछ दिनों तक यह स्थिर रहीं. लेकिन जब यह तनाव बढ़ता गया तो केंद्र सरकार के साथ-साथ तेल कंपनियों का भी घाटा सहने का धैर्य कमजोर होता हुआ दिखाई दिया. रिपोर्ट के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कच्चे तेल व गैस लदे जहाजों की आवाजाही बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई. इस बीच डॉलर की मांग बढ़ी और भारतीय करेंसी रुपया कमजोर होते गया.

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इन सभी चुनौतियों के बीच देश में पेट्रोल-डीजल की मांग को पूरा करने के लिए बाहर से तेल का आयात करना भी जरूरी रहा. मालूम हो कि भारत 85 फीसदी से अधिक तेल का आयात करता है. इस दौरान देश की तेल कंपनियों को हर रोज करीब 750 करोड़ रुपये का घाटा होने लगा, जिसमें पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के आयात की लागत शामिल है. इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए भारत में पेट्रोल, डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई. इनसे पहले एलपीजी गैस के भी दाम बढ़ाए गए थे. हालांकि, एक्सपर्ट बताते हैं कि हाल ही में बढ़ाई गई पेट्रोल और डीजल की कीमतों से लोगों को कुछ राहत मिल सकती है. इसके लिए राज्य सरकारों को अपने राज्य में वसूले जाने वाले वैट में कटौती करनी होगी. बता दें कि देश के विभिन्न राज्यों के द्वारा पेट्रोल व डीजल पर वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) की वसूली की जाती है. यह टैक्स एक फीसदी से लेकर 35 फीसदी तक हैं. वैट की बात करें तो यह एक राज्य स्तरीय अप्रत्यक्ष कर है, जिसे राज्य सरकारों के द्वारा पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर वसूला जाता है.

किस राज्य में पेट्रोल-डीजल पर कितना वैट?

हम यहां आपको पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के आंकड़ों के अनुसार यह बता रहे हैं कि देश में किस राज्य में पेट्रोल-डीजल पर कितना वैट लगता है. यहां कुछ राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों के नाम वहां पर पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले वैट के साथ दिखा रहे हैं.

  • अंडमान-निकोबार
    पेट्रोल व डीजल दोनों पर एक प्रतिशत वैट
  • आंध्र प्रदेश
    पेट्रोल पर 31 प्रतिशत, डीजल पर 22.25 प्रतिशत
  • असम
    पेट्रोल पर 24.77 प्रतिशत, डीजल पर 22.19%
  • दिल्ली
    पेट्रोल पर 19.40 प्रतिशत, डीज्बले पर 16.75%
  • हरियाणा
    पेट्रोल पर 18.20 प्रतिशत, डीजल पर 16 प्रतिशत
  • पश्चिम बंगाल
    पेट्रोल पर 25 प्रतिशत, डीजल पर 17 प्रतिशत
  • पुडुचेरी
    पेट्रोल पर 16.98 प्रतिशत, डीजल पर 11.22%
  • झारखंड
    पेट्रोल 22 प्रतिशत, डीजल 22 प्रतिशत
  • बिहार
    पेट्रोल पर 23.58 प्रतिशत, डीजल पर 16.37%
  • छत्तीसगढ़
    पेट्रोल पर 24 प्रतिशत, डीजल पर 23 प्रतिशत
  • गुजरात
    पेट्रोल पर 13.7 प्रतिशत, डीजल पर 14.9 प्रतिशत
  • उत्तर प्रदेश
    पेट्रोल पर 19.36 प्रतिशत, डीजल पर 17.08%
  • तेलंगाना
    पेट्रोल पर 35.20 प्रतिशत, डीजल पर 27 प्रतिशत
  • हिमाचल प्रदेश
    पेट्रोल 17.5 प्रतिशत, डीजल पर 13.90 प्रतिशत
  • राजस्थान
    पेट्रोल 29.04 प्रतिशत, डीजल पर 17.30 प्रतिशत
  • त्रिपुरा
    पेट्रोल 17.50 प्रतिशत, डीजल पर 10 प्रतिशत
  • महाराष्ट्र
    पेट्रोल 25 प्रतिशत, डीजल पर 21 प्रतिशत
  • केरल
    पेट्रोल 30.08 प्रतिशत, डीजल पर 22.76 प्रतिशत
  • उत्तराखंड
    पेट्रोल 16.97 प्रतिशत, डीजल पर 17.15 प्रतिशत

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आप यहां देख सकते हैं कि देश के विभिन्न राज्यों में पेट्रोल और डीजल पर अलग-अलग वैट की दरें लगाई गई हैं. अब पश्चिम एशिया में आए संकट के बीच भारत में भी चुनौती बढ़ गई है. कई जानकारों की मांग है कि राज्य सरकार को भी पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली वैट दर में कटौती कर देनी चाहिए. इससे प्रदेश की जनता को बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतों से थोड़ी राहत मिल सकेगी.

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