US Iran War: ईरान पर हमले के लिए अमेरिका ने 28 फरवरी 2026 को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की शुरुआत की थी. इसके जरिए यूएस ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए, जिसमें मिसाइल निर्माण, परमाणु ठिकाना और कई सैन्य ठिकाने शामिल थे.
US Iran War: पश्चिम एशिया में जारी तनाव अभी खत्म होता नहीं दिख रहा है. बीते 28 फरवरी को अमेरिका के द्वारा ईरान पर जोरदार हमले के बाद यह संघर्ष काफी तेजी के साथ शुरू हुआ था. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली हुसैनी खामनेई की मौत हो गई थी. अपने सुप्रीम लीडर की मौत से बौखलाए ईरान ने इजरायल सहित दुनिया के कई देशों में बनाए गए अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला शुरू कर दिया था. उसने मिसाइल और ड्रोन की मदद से यूएई, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान समेत अन्य देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार हमला किया. इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू हो गया.
अब अमेरिका को इस जंग में बड़े नुकसान की बात सामने आई है, यह खुलासा एक रिपोर्ट में हुआ है. जी हां, अमेरिकी ने ईरान पर हमले के लिए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी चलाया था. इस दौरान उसके करीब 42 एयरक्राफ्ट तबाह हो गए. आइए जानते हैं कि क्या कहती है रिपोर्ट
42 अमेरिकी विमान नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए- रिपोर्ट
न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अमेरिका में एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान को निशाना बनाकर 28 फरवरी को शुरू किए गए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान लड़ाकू विमानों और ड्रोनों सहित कम से कम 42 अमेरिकी विमान नष्ट हो गए या क्षतिग्रस्त हो गए. Congressional Research Service (CRS) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि क्लासिफिकेशन, चल रही युद्ध गतिविधि और आरोपण (attribution) सहित कई वजहों से क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए विमानों की संख्या में संशोधन हो सकता है. मतलब कि इनकी संख्या घट या बढ़ सकती है.
इन एयरक्राफ्टों को हुआ नुकसान
विमानों के नुकसान और क्षति में चार एफ-15ई स्ट्राइक ईगल लड़ाकू जेट, एक एफ-35ए लाइटनिंग II लड़ाकू विमान, एक ए-10 थंडरबोल्ट II ग्राउंड अटैक एयरक्राफ्ट, सात केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर हवाई ईंधन भरने वाले विमान, एक ई-3 सेंट्री एडब्ल्यूएसीएस विमान, दो एमसी-130जे कमांडो II स्पेशल ऑपरेशन एयरक्राफ्ट, एक एचएच-60डब्ल्यू जॉली ग्रीन II हेलीकॉप्टर, 24 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन और एक एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन शामिल हैं.
ईरान में ऑपरेशन की लागत 29 अरब अमेरिकी डॉलर
अमेरिकी कांग्रेस और समितियों को नीति और कानूनी विश्लेषण प्रदान करने वाली सीआरएस ने रक्षा विभाग और अमेरिकी केंद्रीय कमान की न्यूज रिपोर्टों और बयानों का अध्ययन करके नुकसान का संकलन किया. 12 मई को सदन की विनियोग उपसमिति (House Appropriations subcommittee) की सुनवाई के दौरान, पेंटागन (रक्षा विभाग) के कार्यवाहक कंट्रोलर जूल्स डब्ल्यू हर्स्ट III ने गवाही दी कि ईरान में मिलिट्री ऑपरेशन के लिए विभाग का लागत अनुमान बढ़कर 29 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है. उन्होंने कहा, “इस बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा उपकरणों की मरम्मत या प्रतिस्थापन लागत (replacement costs) के सटीक अनुमान से आता है.”
अमेरिका का ऑपरेशन एपिक फ्यूरी
ईरान पर हमले के लिए अमेरिका ने 28 फरवरी 2026 को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की शुरुआत की थी. इसके जरिए यूएस ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए, जिसमें मिसाइल निर्माण, परमाणु ठिकाना और कई सैन्य ठिकाने शामिल थे. इस ऑपरेशन को अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप की देखरेख में शुरू किया गया था. हालांकि, ईरान पर काफी हमलों के बाद इसे 5 मई को खत्म कर देने की घोषणा कर दी गई थी. अमेरिका ने यह कहते हुए ऑपरेशन को बंद करने का फैसला किया था कि उसने अपने सभी टारगेट को प्राप्त कर लिया है.
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News Source: PTI
