UAE: दुबई की चमचमाती बुर्ज खलीफा और अबू धाबी के आलीशान तटों वाला संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अपनी आधुनिक वास्तुकला और सुरक्षा के लिए दुनिया का बेहद खूबसूरत पर्यटन स्थल माना जाता है. हालांकि, फरवरी 2026 में भड़के अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के कारण इसकी खूबसूरती और पर्यटन पर गंभीर ग्रहण लगा है. ईरान द्वारा दागी गईं मिसाइलों और ड्रोनों के मलबे दुबई के ‘बुर्ज अल अरब’ जैसी आलीशान इमारतों पर गिरने से हड़कंप मच गया. युद्ध के चलते खाड़ी क्षेत्र का हवाई क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जिससे संयुक्त अरब अमीरात आने वाले पर्यटकों की संख्या में 30% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है. होटलों की बुकिंग रद्द हो रही हैं और अमेरिकी उड़ानों में व्यवधान आने से UAE की चमक और आर्थिक रफ़्तार सुस्त पड़ गई है.
आर्थिक स्थिरता पर संकट
मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय व्यापार के ‘स्वर्ग’ कहे जाने वाले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा पर बड़ा संकट मंडरा रहा है. अमेरिका और इज़राइल के करीबी सहयोगी यूएई को हालिया संघर्ष के दौरान ईरान समर्थित गुटों से भारी मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है. होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के कड़े नियंत्रण और इन हमलों के कारण संयुक्त अरब अमीरात का कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का निर्यात आधा रह गया है.

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पर्यटन को लगा झटका
व्यापार के साथ-साथ देश के प्रमुख राजस्व स्रोत पर्यटन और वैश्विक सम्मेलनों को भी गंभीर झटका लगा है. ईरान से फारस की खाड़ी के ठीक पार स्थित इस देश ने बाहरी तौर पर खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की है, लेकिन पर्दे के पीछे बड़े रणनीतिक बदलाव किए जा रहे हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी निर्भरता खत्म करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात ने एक नई तेल पाइपलाइन बिछाने की घोषणा की है. इसके अतिरिक्त दीर्घकालिक ऊर्जा उत्पादन को स्वतंत्र रूप से बढ़ाने के लिए उसने खुद को ओपेक (OPEC) तेल कार्टेल से भी अलग कर लिया है.
परमाणु संयंत्र पर हमला
हालांकि क्षेत्र में फिलहाल एक अस्थिर युद्धविराम लागू है, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात पर मंडराता खतरा टला नहीं है. 17 मई को देश के महत्वपूर्ण ‘बराक परमाणु ऊर्जा संयंत्र’ पर हुआ ड्रोन हमला इस बात का गवाह है कि शांत दिखने वाले इस व्यापारिक केंद्र के सुरक्षा मॉडल की परीक्षा अभी खत्म नहीं हुई है. बराक परमाणु संयंत्र पर हमले के बाद अमीरात ने भी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बराक परमाणु संयंत्र पर हुए हालिया हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है. इस हमले से हालांकि कोई रेडियोलॉजिकल रिसाव नहीं हुआ. सुदूर पश्चिमी रेगिस्तान में स्थित यह संयंत्र सुचारु रूप से काम कर रहा है, लेकिन इसने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है.
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युद्ध लंबा खिंचने पर UAE की छवि को नुकसान
संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमीरात किसी भी परिस्थिति में अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा बर्दाश्त नहीं करेगा. उसके पास किसी भी शत्रुता का जवाब देने के लिए पूर्ण राजनयिक और सैन्य अधिकार सुरक्षित है. UAE अधिकारियों ने सीधे तौर पर ईरान पर समुद्री डकैती और आतंकवाद के आरोप लगाए हैं. आर्थिक मोर्चे पर भारी नकदी अधिशेष होने के कारण यूएई में अब तक बड़ी संख्या में नौकरियों का नुकसान या विदेशी व्यापार का पलायन नहीं हुआ है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह गतिरोध जितना लंबा खिंचेगा, वैश्विक व्यापार और निवेश को आकर्षित करने वाली यूएई की सुरक्षित छवि को उतना ही अधिक नुकसान पहुंचेगा. सात शासकों वाले इस संघ में अंतिम निर्णय लेने की शक्ति अबू धाबी के शासक शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और उनके परिवार के पास केंद्रित है. विश्लेषकों के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात ( UAE) के शासक शेख मोहम्मद बिन जायद परिवार के नेतृत्व में देश ने पिछले कुछ दशकों में बेहद आक्रामक विदेश नीति अपनाई है.
प्रमुख रणनीतिक कदम
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ यमन के युद्ध में सीधे प्रवेश किया. वर्ष 2013 में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सिसी को सत्ता में लाने में UAE ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. UAE पर सूडान और लीबिया के गृह युद्धों में विभिन्न गुटों को गुप्त रूप से हथियार भेजने के भी आरोप लगे हैं, हालांकि UAE सरकार ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया
शासक का कड़ा रुख
आमतौर पर सार्वजनिक रूप से बहुत कम बोलने वाले शेख मोहम्मद ने मार्च में ईरानी हमलों में घायल हुए लोगों से मुलाकात के दौरान युद्ध पर अपनी एकमात्र टिप्पणी की थी. उन्होंने विरोधियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि UAE आकर्षक, सुंदर और एक वैश्विक मॉडल है.UAE की चमड़ी मोटी और मांस कड़वा है, हम कोई आसान शिकार नहीं हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस पूरे संघर्ष में देश को दर्द भी झेलना पड़ा है.

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युद्ध से घटी गैस बेचने की क्षमता
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से संयुक्त अरब अमीरात की कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस बेचने की क्षमता बाधित हो गई है. यह जलडमरूमध्य के बाहर ओमान की खाड़ी पर एक तेल टर्मिनल वाले शहर फुजैराह में पाइपलाइन के माध्यम से एक दिन में लगभग 1.8 मिलियन बैरल कच्चे तेल का निर्यात कर सकता है. अमीरात उस क्षमता को दोगुना करने के लिए दूसरी पाइपलाइन के निर्माण में तेजी लाने की कोशिश कर रहा है. संयुक्त अरब अमीरात का पर्यटन और सम्मेलन बाजार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है. 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से कतर स्थित एक संचार फर्म नॉर्थबोर्न एडवाइजरी, जो युद्ध के प्रभावों पर नज़र रख रही है, के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात में 70 से अधिक निर्धारित कार्यक्रमों को स्थगित, रद्द या प्रभावित किया गया है.
प्रतिष्ठित बुर्ज अल अरब सहित कई होटल बंद
फर्म ने कहा कि अमीराती सरकार ने आयोजनों के लिए पूर्ण प्रतिबंध जारी नहीं किया है, लेकिन आयोजकों ने बीमा निकासी और देयता जोखिम पर अपनी योजनाओं को बदल दिया है. 4 मई को देश की एयरलाइन, एमिरेट्स ने घोषणा की कि उसने दुबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से अपनी उड़ानों की लगभग पूरी अनुसूची फिर से शुरू कर दी है, जो अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए वर्षों से दुनिया भर में सबसे व्यस्त है. लेकिन उसी दिन, ईरान ने कई ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिससे मोबाइल फोन पर अलर्ट जारी हो गया और अमीरात के व्यापारिक समुदाय में खलबली मच गई. दुबई के प्रतिष्ठित पाल के आकार के बुर्ज अल अरब सहित होटल नवीकरण के लिए बंद कर दिए गए हैं क्योंकि अधिभोग दर लगभग 20% तक गिर गई है.

अबू धाबी संकट झेलने में सक्षम
मध्य पूर्व में जारी युद्ध और ईरान द्वारा फुजैरा के पास जहाज जब्त किए जाने से उपजे भू-राजनीतिक तनाव के बीच दुबई अपनी अर्थव्यवस्था को खुला रखने की कोशिश कर रहा है. हाल ही में यहां ‘आर्ट दुबई शो’ का आयोजन किया गया, लेकिन युद्ध की आहट साफ महसूस की गई. मूडीज एनालिटिक्स के अनुसार, जून तिमाही में होटल अधिभोग (occupancy) दर गिरकर महज 10% होने का अनुमान है, जो युद्ध से पहले 80% थी. मूडीज ने चेतावनी दी है कि साल 2026 के शेष महीनों में भी यात्रियों की झिझक के कारण इस दर में कमी बनी रहेगी. इस बीच, इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल फाइनेंस (IIF) ने अपने विश्लेषण में कहा है कि दुबई अपनी खुली नीतियों के कारण यात्रा, लॉजिस्टिक्स और आत्मविश्वास में लगने वाले झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील है. इसके विपरीत, अबू धाबी अपनी मजबूत बैलेंस शीट और विशाल ऊर्जा संपत्तियों के दम पर इस संकट को झेलने में सक्षम है.
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युद्ध के साए में कलाकारों ने पेश की अनूठी कृतियां
मध्य पूर्व में जारी अमेरिका-ईरान युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के बीच दुबई में आयोजित कला प्रदर्शनी में कलाकारों ने अपनी कला के जरिए युद्ध, नव-उपनिवेशवाद और मानवीय जिजीविषा को बयां किया है. इस प्रदर्शनी में युद्ध के तनाव को दर्शाती एक अनूठी कलाकृति पेश की गई, जिसमें सिक्के से चलने वाले एक काले फाइटर जेट को काले नाइके टेनिस जूतों के जोड़े से ढका गया था. वहीं, स्पेन के प्रसिद्ध कलाकार सोलिमन लोपेज़ ने एक बेहद विचारोत्तेजक कृति प्रदर्शित की. उनकी यह कलाकृति नासा (NASA) मिशन के लक्ष्य वाले एक धातु-समृद्ध क्षुद्रग्रह (Asteroid) पर मालिकाना हक के दावे पर केंद्रित थी. इसके माध्यम से लोपेज़ ने यह दर्शाया है कि कैसे शक्तिशाली देश और बहुराष्ट्रीय कंपनियां तेल तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन करती हैं.

संस्कृति और कला से ही हिंसा का मुकाबला
लोपेज़ ने माना कि मौजूदा संघर्ष के कारण इस आयोजन में हिस्सा लेना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इस क्षेत्र के हालातों पर बात करने के लिए यह बिल्कुल सही मंच था. दूसरी ओर, बेरूत के कलाकार अल्फ्रेड तराज़ी ने अपने दादा-दादी के दो विश्व युद्धों के अनुभवों को याद करते हुए कहा कि विश्व युद्ध जैसी विभीषिका में भी जीवन नहीं रुकता. उन्होंने दृढ़ता से कहा कि हम केवल संस्कृति और कला के माध्यम से ही हिंसा का मुकाबला कर सकते हैं.
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दुबई की चमचमाती बुर्ज खलीफा और अबू धाबी के आलीशान तटों वाला संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अपनी आधुनिक वास्तुकला और सुरक्षा के लिए दुनिया का बेहद खूबसूरत पर्यटन स्थल माना जाता है. हालांकि, फरवरी 2026 में भड़के अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के कारण इसकी खूबसूरती और पर्यटन पर गंभीर ग्रहण लगा है.
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