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बंगाल चुनाव में डिजिटल लड़ाई शुरू! BJP ने दी राष्ट्रीय मुद्दों को हवा; तो TMC ने ऐसे संभाला मोर्चा

by KamleshKumar Singh
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Bengal Election BJP vs TMC

Bengal Election : बंगाल चुनाव की तारीखों का एलान होने के साथ ही राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. इसी बीच बीजेपी जहां एक तरफ राष्ट्रीय मुद्दों पर घेरना शुरू कर दिया है तो, वहीं TMC स्थानीय मुद्दों को खींच लाई है.

Bengal Election : पश्चिम बंगाल के चुनाव में इस बार एक तरफ रैलियों और सभाओं के जरिए चुनाव लड़ी जा रहीं हैं. तो वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जबरदस्त लडाई देखी जा रही है. BJP की डिजिटली तैयारी के सामने अब TMC ने भी मोर्चा संभाल लिया है. BJP की केंद्रीय टीम इस मोर्चे पर खुलकर लड़ रही है और दूसरी तरफ TMC ने स्थानीय स्तर पर इस लड़ाई को ले जाने कोशिश में है. TMC ने वाट्सऐप ग्रुप के साथ रील्स, सोशल मीडिया पोस्ट और इंफ्लूएंसर हर मोर्चे पर जबरदस्त तैयारी के साथ मुकाबला करने में जुटी है.

स्थानीय स्तर पर लड़ रही है TMC

TMC ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर BJP से मुकाबला करने के लिए खास तैयारी की है। एक तरफ़ बीजेपी की केंद्रीय टीम डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कैंपेन में जुटी है. टीएमसी ने इसे स्थानीय स्तर पर हैंडल करने की प्लानिंग पर काम कर रही है. टीएमसी ने ज़मीन पर और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर अपनी कल्याणकारी योजनाओं के बारे में लोगों तक अपनी पहुंच भी बढ़ा रही है। टीएमसी अपने कैंपेन में अपना बंगाल बनाम बांग्ला पर कब्जा को आधार बना रहे हैं। टीएमसी अपने डिजिटल कैंपेन में बांग्ला अस्मिता को हवा दे रही है। टीएमसी सोशल मीडिया के जरिये यह मैसेज दे रही है कि अगर बीजेपी सत्ता में आई तो बांग्ला विरोधी एजेंडा चलाएंगे. इस अभियान को अंजाम तक पहुंचाने के लिए टीएमसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वाट्सऐप ग्रुप का सहारा ले रही है. इस नेटवर्क में पूरे पश्चिम बंगाल में 1.5 लाख से ज़्यादा ग्रुप और 1 करोड़ से ज़्यादा लोग जोड़े गए हैं।

TMC का ‘दीदिर दूत’ ऐप

अक्टूबर 2020 में लॉन्च किए गए ‘दीदिर दूत (दीदी के दूत)’ मोबाइल ऐप के जरिए TMC अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के जुड़ी हुई हैं. ऐप को 18 लाख से ज़्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है. इसके लगभग 1.3 लाख रोज़ाना एक्टिव यूज़र्स और लगभग 7.3 लाख हर महीने एक्टिव यूज़र्स हैं. इसके जरिए लोगों को जोड़ने का काम बखुबी हो रहा है. सोशल मिडीया के जरिए ममता बनर्जी के चुनावी गीत ‘खेला होबे’ को भुनाया जा रहा है.

पार्टी के सोशल मीडिया इकोसिस्टम पर धड़ाधड़ रिल्स अपलोड़ किये जा रहे हैं. इस रिल्स में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के भाषण, राज्य की कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के अनुभव और विपक्ष के नैरेटिव का जवाब देने के लिए तैयार किया गया कंटेंट शामिल किये जा रहे हैं.

भावनात्मक मुद्दों को हवा दे रही ममता

सोशल मीडिया के जरिए और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए ममता बनर्जी लगातार भावनात्मक मुद्दों को हवा दे रही है. कोशिश की जा रही है कि भाजपा को बाहरी पार्टी बताकर जनता के बीच अलोकप्रिय करार दी जाए जबकि बांग्ला भाषा में प्रसारित किये जा रहे इन सूचनाओं के आधार पर जनता में बांग्ला अस्मिता जागने की भरपूर कोशिश की जा रही है. इस माध्यम से ममता के राजनीतिक भाषणों में ‘घुसपैठिया’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है. TMC अब गरिमा, पहचान और बंगाली अस्मिता से जुड़े अभियान चला रही है. साथ ही BJP इस अभियान की पोल खोलने में लगी है.

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