Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों पर कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने कहा है कि वह राज्यों को पीड़ितों को भारी मुआवजा देने का आदेश देगा.
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों पर कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने कहा है कि वह राज्यों को पीड़ितों को भारी मुआवजा देने का आदेश देगा. जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने पिछले पांच वर्षों में पशु नियमों को लागू न करने पर चिंता जताई. जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारी की बेंच ने स्पष्ट किया कि केवल राज्य ही नहीं, बल्कि कुत्तों को खिलाने वाले और पालने वाले लोग भी किसी भी हमले के लिए ‘जिम्मेदार और जवाबदेह’ होंगे. जस्टिस नाथ ने टिप्पणी की कि यदि लोग इन जानवरों से प्यार करते हैं, तो उन्हें आवारा छोड़ने के बजाय अपने घर ले जाना चाहिए. कोर्ट ने आवारा कुत्तों के कारण बच्चों और बुजुर्गों की मौत व चोटों पर नाराजगी जाहिर की है. न्यायमूर्ति मेहता ने न्यायमूर्ति नाथ के विचारों से सहमति जताते हुए कहा कि जब कुत्ते 9 साल के बच्चे पर हमला करते हैं तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? आप चाहते हैं कि हम इस समस्या से आंखें मूंद लें.
सड़कों से आवारा पशुओं को हटाने का मामला
सुप्रीम कोर्ट 7 नवंबर, 2025 के अपने उस आदेश में संशोधन की मांग वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें अधिकारियों को आबादी वाले क्षेत्रों और सड़कों से इन आवारा पशुओं को हटाने का निर्देश दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबसे बुरी बात यह है कि गुजरात के एक वकील को एक पार्क में कुत्ते ने काट लिया और जब नगर निगम के अधिकारी उस जानवर को पकड़ने गए तो खुद को कुत्ता प्रेमी बताने वाले वकीलों ने नगर निगम के अधिकारियों पर हमला कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी खेद व्यक्त किया कि वह चार दिनों से इस मुद्दे पर दलीलें सुन रहा है और कार्यकर्ताओं व गैर सरकारी संगठनों द्वारा मामले में आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है. केंद्र और राज्यों के विचार नहीं सुने जा रहे हैं. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी वकीलों से हमारा अनुरोध है कि हमें केंद्र, राज्य अधिकारियों और अन्य निकायों को जवाबदेह ठहराने की अनुमति दें. हमें एक आदेश पारित करने दें.
आवारा कुत्तों को पकड़े गए जगहों पर फिर नहीं छोड़ा जाएगा
कोर्ट ने कहा कि हमें राज्यों और केंद्र के साथ आधा दिन बिताना होगा. यह देखने के लिए कि उनके पास कोई कार्य योजना है या नहीं. समस्या हजार गुना बढ़ गई है. हम केवल वैधानिक प्रावधानों को लागू कराना चाहते हैं. हमें ऐसा करने दें. हमें काम करने दें. शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे क्षेत्रों में कुत्ते के काटने की घटनाओं में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को निर्देश दिया कि आवारा कुत्तों को उचित नसबंदी और टीकाकरण के बाद तुरंत निर्धारित आश्रयों में स्थानांतरित किया जाए. कोर्ट ने यह भी कहा कि पकड़े गए आवारा कुत्तों को उस स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था. कोर्ट ने अधिकारियों को राज्य राजमार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से सभी मवेशियों और अन्य आवारा जानवरों को हटाने का निर्देश दिया. शीर्ष अदालत पिछले साल 28 जुलाई को शुरू किए गए एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही है, जो राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने से, विशेष रूप से बच्चों में, रेबीज फैलने की रिपोर्ट से संबंधित है.
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