Home Latest News & Updates IAS अफसर टालो पोटम जाएंगे जेल, हाईकोर्ट ने रद्द की जमानत, इस हाई प्रोफाइल केस में कोर्ट का सख्त फैसला

IAS अफसर टालो पोटम जाएंगे जेल, हाईकोर्ट ने रद्द की जमानत, इस हाई प्रोफाइल केस में कोर्ट का सख्त फैसला

by Sanjay Kumar Srivastava
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IAS अफसर टालो पोटम जाएंगे जेल, हाईकोर्ट ने रद्द की जमानत, इस हाई प्रोफाइल मामले में कोर्ट का सख्त फैसला

गुवाहाटी उच्च न्यायालय की इटानगर बेंच ने आरोपी IAS अधिकारी टालो पोटम को दी गई जमानत रद्द कर दी. कोर्ट ने उन्हें तत्काल प्रभाव से हिरासत में लेने का निर्देश दिया.

Gauhati High Court: गुवाहाटी उच्च न्यायालय की इटानगर बेंच ने एक हाई प्रोफाइल आत्महत्या मामले में आरोपी IAS अधिकारी टालो पोटम को दी गई जमानत रद्द कर दी. कोर्ट ने उन्हें तत्काल प्रभाव से हिरासत में लेने का निर्देश दिया. शुक्रवार को अपने आदेश में न्यायमूर्ति यारेनजुंगला लोंगकुमार ने कहा कि निचली अदालत ने पिछले साल नवंबर में आरोपी को जमानत देते समय महत्वपूर्ण सबूतों और कानूनी सिद्धांतों की अनदेखी की थी. अदालत ने पूर्व आदेश को ‘विकृत’ बताते हुए कहा कि यह बिना उचित विचार-विमर्श के पारित किया गया था. यह हाई प्रोफाइल मामला अक्टूबर 2025 में लेखी गांव स्थित अपने किराए के आवास में गोमचु येकर की आत्महत्या से संबंधित है.

निचली अदालत ने सात दिन के भीतर दे दी थी जमानत

मृतक के पिता टैगोम येकर ने जमानत रद्द करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने आरोपी IAS अधिकारी टालो पोटम द्वारा मानसिक उत्पीड़न, यौन शोषण और भ्रष्टाचार से संबंधित दबाव का आरोप लगाया था, जिसका उल्लेख मृतक द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट में किया गया था. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि वरिष्ठ IAS अफसर आरोपी को प्रारंभिक चरण की जांच के बावजूद गिरफ्तारी के सात दिनों के भीतर ही जमानत दे दी गई थी. यह भी बताया गया कि डिलीट किए गए व्हाट्सएप चैट और वॉइस मैसेज अभी भी फोरेंसिक जांच के अधीन हैं. विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अदालत को सूचित किया कि फोरेंसिक विश्लेषण से पुष्टि हुई है कि आत्महत्या नोट मृतक की लिखावट में है. विशेष जांच दल ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं के कारण पहले हिरासत में पूछताछ नहीं की जा सकी.

अपराध ने समाज को झकझोराः कोर्ट

निचली अदालत द्वारा जमानत के चरण में ‘मिनी ट्रायल’ किए जाने और बिना सबूत के पीड़ित के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में अटकलें लगाने पर उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसे निष्कर्ष अनुचित और कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण हैं. हाईकोर्ट ने कहा कि इस अपराध ने समाज की सामूहिक चेतना को झकझोर दिया है और इसमें एक प्रभावशाली व्यक्ति शामिल है. जांच के इतने प्रारंभिक चरण में उसे रिहा करने से जांच पटरी से उतर सकती है. पीठ ने नवंबर 2025 के जमानत आदेश को रद्द कर दिया और आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी का निर्देश दिया. हालांकि अदालत ने आरोपी को सलाह दी कि वह निचली अदालत में नई जमानत के लिए आवेदन कर सकता है.

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News Source: Press Trust of India (PTI)

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