Home Latest News & Updates 10 करोड़ का जुर्माना, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और टास्क फोर्स; पेपर लीक रोकने के लिए यह है मोदी सरकार का मास्टरप्लान

10 करोड़ का जुर्माना, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और टास्क फोर्स; पेपर लीक रोकने के लिए यह है मोदी सरकार का मास्टरप्लान

by Neha Singh 27 July 2026, 4:15 PM IST (Updated 27 July 2026, 4:21 PM IST)
27 July 2026, 4:15 PM IST (Updated 27 July 2026, 4:21 PM IST)
Anti-Paper Leak Bill

Anti-Paper Leak Bill: पिछले एक महीने से पेपर लीक का मुद्दा पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. कॉकरोच जनता पार्टी के लंबे प्रदर्शन, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और छात्रों-पुलिस की झड़प के बाद आखिरकार सरकार ने उनकी सारी मांगें मान ली हैं. 25 जुलाई को सीजेपी की सबसे बड़ी मांग मान ली गई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. इसी के साथ सीजेपी का आंदोलन भी खत्म हो गया. सीजेपी ने इसे अपनी जीत बताया. वहीं, सरकार ने कहा कि कोई भी पद छात्रों से बड़ा नहीं है. इसके अलावा, केंद्र सरकार ने पेपर लीक को रोकने लिए कई बड़े फैसले लिए हैं. सरकार पेपर लीक को रोकने करने के लिए एंटी पेपर लीक बिल लेकर आई है.

एंटी पेपर लीक बिल का आधिकारिक नाम ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (गलत तरीकों से बचाव) संशोधन बिल, 2026’ है. यह बिल मूल कानून ‘पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024’ का संशोधन बिल है. नए बिल में पेपर लीक करने वाले लोगों के लिए पहले से भी ज्यादा सख्त सजा और जल्दी सुनवाई का प्रावधान है. आज यह बिल लोकसभा में पेश किया गया है. इतना ही नहीं, पीएम मोदी ने रविवार को घोषणा की कि एग्जाम सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा. यहां आप आसान भाषा में समझेंगे कि एंटी पेपर लीक बिल के क्या प्रावधान हैं और यह पिछले कानून से कितना अलग है.

एंटी पेपर लीक में क्या बदला गया

सजा और फाइन: बिल में कहा गया है कि एग्जाम में पेपर लीक या गलत तरीकों का इस्तेमाल करने वालों को 5 से 10 साल की जेल होगी और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना होगा. संगठित अपराध के लिए, बिल में कम से कम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.

2024 के कानून में चीटिंग रोकने के लिए कम से कम तीन से पांच साल की जेल और 10 लाख के जुर्माने का प्रोविजन है और चीटिंग के संगठित अपराध में शामिल लोगों को 5 से 10 साल की जेल और 1 करोड़ रुपये का जुर्माना हो सकता है.

जांच एजेंसी: पुराने कानून के तहत, CBI पेपर लीक मामलों की जांच करती थी. अब नए संशोधन बिल के तहत, पेपर लीक मामलों की जांच के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाई जाएगी.

जांच का समय: 2024 एक्ट में पेपर लीक मामलों की जांच पूरी करने की कोई टाइम लिमिट तय नहीं की गई थी. हालांकि, नए संशोधन बिल में 2 महीने के अंदर जांच पूरी करना जरूरी है.

ट्रायल: पुराने कानून के तहत, पेपर लीक मामलों की सुनवाई रेगुलर कोर्ट में होती थी. संशोधन बिल के बाद, पेपर लीक मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगी.

फैसला: 2024 के कानून के मुताबिक, पेपर लीक मामलों में फैसला सुनाने की कोई टाइम लिमिट नहीं थी, लेकिन संशोधन- बिल में पेपर लीक मामलों में 3 महीने के अंदर फैसला सुनाने का प्रावधान है.

हाई कोर्ट में अपील: पुराने कानून के मुताबिक, पेपर लीक मामलों में हाई कोर्ट में अपील करने की भी कोई टाइम लिमिट नहीं थी, जबकि अब 30 दिनों के अंदर हाई कोर्ट में अपील करनी होगी.

हाई कोर्ट का फैसला: संशोदन बिल के मुताबिक, ऐसे मामलों में हाई कोर्ट का फैसला 3 महीने के अंदर सुनाया जाएगा. वहीं पहले ऐसा कोई प्रावधान नहीं था.

2024 में आया पुराना एक्ट

2024 का कानून तब लाया गया था जब सरकार पेपर लीक के बढ़ते विवादों का सामना कर रही थी. कुछ कैंडिडेट्स को असंभव स्कोर मिले और एक ही सेंटर से आठ बच्चे टॉपर बने. इसके बाद देशभर में हंगामा खड़ा हो गया और सरकार को ‘सार्वजनिक परीक्षा बिल’ लाना पड़ा. इस कानून से पहले, केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा पेपर लीक से निपटने के लिए कोई खास कानून नहीं था. इस एक्ट का उद्देश्य यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC), स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC), रेलवे, बैंकिंग रिक्रूटमेंट एग्जाम और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा कराए जाने वाले पब्लिक एग्जाम में गलत तरीकों को रोकना था. हालांकि इसके बाद भी हालात में सुधार नहीं हुआ. साल 2026 में नीट का पेपर लीक हो गया. सीजेपी के प्रदर्शन के बाद सरकार को इस एक्ट में संशोधन करना पड़ा.

बिल का उद्देश्य

लोकसभा में पेश किए गए बिल में कहा गया है कि हाल के सालों में, पब्लिक एग्जामिनेशन अथॉरिटीज द्वारा आयोजित परीक्षाओं में प्रश्न पत्र लीक और गड़बड़ी की कुछ घटनाएं हुई हैं, जिससे सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर असर पड़ा है. संशोधन बिल सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह अधिकार देता है कि वे प्रस्तावित कानून के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए किसी भी सेशन कोर्ट को स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के तौर पर नामित कर सकें. इसमें यह भी प्रोविजन है कि ऐसी कोर्ट में प्रोसिडिंग्स डे-टू-डे बेसिस पर जारी रहेंगी और चार्जशीट फाइल होने की तारीख से तीन महीने के अंदर ट्रायल पूरा हो जाएगा.

यह संशोधन बिल केंद्र सरकार को यह भी अधिकार देता है कि अगर जरूरी हो तो किसी भी अपराध की जांच के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स बना सके. बिल में पब्लिक एग्जामिनेशन अथॉरिटी द्वारा दूसरी सरकारी एजेंसियों की सेवाएं लेने, मानदंड, मानक और दिशानिर्देश तैयार करने और गलत तरीकों या अपराधों की घटनाओं की रिपोर्टिंग जैसे प्नावधान हैं.

परीक्षा से पहले की गतिविधियां जैसे सेंटर्स की तैयारी के लिए प्री-ऑडिट, कैंडिडेट चेक-इन, बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन, सिक्योरिटी और स्क्रीनिंग, सीट अलॉटमेंट, प्रश्न पत्र सेट करना और लोड करना, एग्जाम में इनविजिलेशन, एग्जाम के बाद की एक्टिविटी और स्क्राइब देने के लिए गाइडलाइन भी मानदंड का हिस्सा हैं. बिल में 15 गैर-कानूनी कामों के बारे में बताया गया है, जिनमें प्रश्न पत्र लीक करना, OMR शीट से छेड़छाड़ करना, नकली वेबसाइट बनाना और नकली एडमिट कार्ड जारी करना शामिल है.

हाई-पावर टास्क फोर्स का गठन

प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि की अगुवाई में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाने की भी घोषणा की, जो एग्जाम सिस्टम को लीकप्रूफ बनाने के लिए सुधारों की सिफारिश करेगी. नीलेकणि के अलावा, टास्क फोर्स के अन्य सदस्यों में ISRO के पूर्व चेयरमैन एस सोमनाथ, इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व डायरेक्टर तपन डेका, IIT चेन्नई के डायरेक्टर वी कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट अमृत लाल मीणा शामिल हैं.

NTA द्वारा आयोजित एग्जाम के लिए किए जाने वाले सुधारों पर टास्क फोर्स में एक बहुविषयक समूह शामिल होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार, यह टास्क फोर्स भारत की परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा भरोसेमंद, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने पर फोकस करेगी. इसकी सिफारिशें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को मजबूत करने और तकनीक के ज्यादा इस्तेमाल से प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को बेहतर बनाएंगी. जानें कौन हैं वो 6 दिग्गज जिन्हें परीक्षा सुधार का जिम्मा सौंपा गया है.

Exam Reforms Task Force
Exam Reforms Task Force

नंदन मोहनराव नीलेकणि

नंदन मोहनराव नीलेकणि भारत के सबसे जाने-माने टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स में से एक हैं. 1981 में उन्होंने एन.आर. नारायण मूर्ति और पांच अन्य साथियों के साथ मिलकर इंफोसिस की शुरुआत की. उन्होंने इंफोसिस में कई अहम पदों पर काम किया और 2002 में कंपनी के CEO बने. 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें कैबिनेट मिनिस्टर के रैंक के साथ UIDAI का चेयरमैन बनाया. उन्होंने आधार को बनाने और लागू करने का काम लीड किया. इसके अलावा, नंदन नीलेकणि ने भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के डेवलपमेंट में भी अहम भूमिका निभाई.

एस. सोमनाथ

एस. सोमनाथ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व चेयरमैन हैं. उनके नेतृत्व में भारत ने चंद्रयान-3 जैसी ऐतिहासिक सफलताएं हासिल कीं. डॉ. एस. सोमनाथ ने 2022 से 2025 तक ISRO के चेयरमैन और डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस के सेक्रेटरी के तौर पर काम किया. लगभग 40 सालों के अनुभव वाले एक जाने-माने स्पेस साइंटिस्ट के तौर पर, वे लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी और स्पेस सिस्टम इंजीनियरिंग में अपने योगदान के लिए जाने जाते हैं. अब वे इस टास्क फोर्स में शामिल होकर पेपर लीक को रोकने के लिए काम करेंगे.

तपन डेका

तपन डेका इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व डायरेक्टर हैं और देश के टॉप सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस एक्सपर्ट्स में से एक हैं. हिमाचल प्रदेश कैडर के 1988 बैच के IPS ऑफिसर तपन कुमार डेका ने जून 2022 से जून 2026 तक इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर के तौर पर काम किया. केंद्र सरकार ने उनका कार्यकाल दो बार बढ़ाया. एक अनुभवी इंटेलिजेंस ऑफिसर के तौर पर, उन्होंने आतंक विरोधी ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई. उनके बड़े ऑपरेशन्स में 26/11 मुंबई हमले, इंडियन मुजाहिदीन के खिलाफ ऑपरेशन और जम्मू-कश्मीर और नॉर्थईस्ट में सिक्योरिटी ऑपरेशन्स शामिल हैं.

वी. कामकोटि

वी. कामकोटि IIT मद्रास के डायरेक्टर हैं. उन्हें कंप्यूटर साइंस और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का एक जाना-माना एक्सपर्ट माना जाता है. उन्होंने माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट और साइबर सिक्योरिटी से जुड़े खास नेशनल प्रोग्राम को लीड किया है. वे नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड के मेंबर हैं और मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा बनाए गए AI टास्क फोर्स के चेयरपर्सन के तौर पर भी काम कर चुके हैं.

अनीता करवाल

गुजरात कैडर की 1988 बैच की IAS ऑफिसर अनीता करवाल को लोक प्रशासन का 36 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उन्होंने स्कूली शिक्षा पर खास ध्यान दिया. उन्होंने CBSE (2017–2021) की चेयरपर्सन और बाद में स्कूल एजुकेशन और लिटरेसी डिपार्टमेंट की सेक्रेटरी के तौर पर काम किया. उन्होंने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क बनाने में अहम भूमिका निभाई.

अमृत लाल मीणा

अमृत लाल मीणा बिहार कैडर के 1989 बैच के IAS ऑफिसर हैं. मीणा के पास 36 साल से ज़्यादा का प्रशासनिक अनुभव है, जिसमें बिहार में 25 साल और भारत सरकार के साथ 11 साल शामिल हैं. उन्होंने बिहार के चीफ सेक्रेटरी (2024–2025) और कोयला मंत्रालय के सेक्रेटरी (2022–2024) के तौर पर काम किया है. उन्हें प्रशासन और रसद में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है.

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