US Iran Tension: रविवार को लगातार दूसरे दिन अमेरिका ने ईरान पर हमले रोक दिए और तेहरान ने भी ऐसा ही किया. दोनों देशों के बीच एक अंतरिम युद्धविराम समझौते पर बातचीत फिर से शुरू करने की कोशिशें जारी रहीं, जो हालिया गोलीबारी की घटनाओं के कारण काफी हद तक कमजोर पड़ गया था.
बता दें कि बीते दिनों स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के द्वारा कई मालवाहक जहाजों पर फायरिंग और हमले किए गए. इस दौरान कुछ सैनिकों को चोटें भी आईं. होर्मुज को लेकर ईरान का हमेशा से यह कहना रहा है कि वह उसके कंट्रोल में आता है और वह जैसे चाहेगा वैसे उसका इस्तेमाल करेगा. उसने जहाजों पर हमले को लेकर यह कहा था कि होर्मुज में उसके द्वारा तय रास्ते पर जहाज नहीं चल रहे थे, इसलिए उसने उनपर गोलीबारी की.
वहीं, अमेरिका इसे होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा को खतरा बताते रहा है. उसने ईरान की इस कार्रवाई के खिलाफ लगातार 13वें दिन जवाबी हमला किया था. हालांकि, अब दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ हमले बंद कर दिए हैं.

ईरान के खिलाफ लगातार 13वीं रात हमले पूरे- यूएस
बीते दिनों अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड से ईरान के खिलाफ लगातार 13वें दिन (रात) हमले को पूरा करने की जानकारी दी थी. उसने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर कहा था, ” U.S. सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की फोर्स ने 23 जुलाई को रात 9 बजे (ET) ईरान के खिलाफ लगातार 13वीं रात हमले पूरे किए.” उसने आगे कहा था, ” CENTCOM ने ईरान के मिलिट्री कमांड सेंटर, ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटी, कम्युनिकेशन नेटवर्क, तटीय निगरानी साइट और समुद्री क्षमताओं को निशाना बनाया, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले आम नाविकों और कमर्शियल जहाजों के लिए ईरान से होने वाले खतरे को और कम किया जा सके.”
अमेरिकी सेना ने यह जानकारी दी थी कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के हालिया हमलों के बावजूद, यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग आने-जाने के लिए खुला है. U.S. मिलिट्री के सहयोग से कमर्शियल जहाज इस जलडमरूमध्य से बेरोकटोक गुजर रहे हैं. इस समय मध्य पूर्व में 50,000 से ज्यादा U.S. सैनिक तैनात हैं.

पश्चिम एशिया में शांति लौटने की बात
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 13वें दिन हमला करके अब बीते दिनों से अपने अटैक को रोक दिया है. वहीं, अमेरिकी हमले का पलटवार करते हुए ईरान ने खाड़ी देशों जैसे- बहरीन, सऊदी अरब, कुवैत, जार्डन, कतर पर हमले किए थे. इन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं, जहां ईरान ने हमला किया. अब दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ हमले को रोक दिया है. इसके साथ ही एक बार फिर से पश्चिम एशिया में शांति लौटने की बात कही जा रही है. होर्मुज में बिना किसी रोकटोक के जहाजों के आवागमन की बात कही जा रही है.
जानकारी के अनुसार, अब ईरान और अमेरिकी इस युद्ध और संघर्ष को छोड़कर शांति की बात करने के उत्सुक दिख रहे हैं. दोनों ही देश उस अंतरिम युद्धविराम समझौते पर एक बार फिर से बात करने के लिए तैयार हैं और आगे इसको लेकर कुछ अच्छी खबर की उम्मीद की जा रही है.
एक अमेरिकी न्यूज चैनल से बात करते हुए संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप “बातचीत को कुछ समय के लिए जगह दे रहे हैं.” वाल्ट्ज ने कहा, “वह इसे थोड़ी गुंजाइश दे रहे हैं,” और आगे कहा, “पिछले कुछ हफ्तों में, और विशेष रूप से पिछले कुछ दिनों में, ओमान और ईरान दोनों के साथ-साथ हमारे कई अन्य वार्ताकार वरिष्ठ स्तर से लेकर तकनीकी स्तर तक हर स्तर पर शामिल रहे हैं.”
आइए अब जानते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष व हमले को लेकर क्या कुछ बातचीत चल रही है, क्या अब पश्चिम एशिया में पूर्ण शांति बहाल होने वाली है, होर्मुज के हालात अभी कैसे हैं. शुरुआत हम ईरान और अमेरिका के बीच फिर से बातचीत की उम्मीदों से भारतीय शेयर बाजार, रुपये और कच्चे तेल की गिरी कीमतों से करेंगे.
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शेयर बाजार, रुपया और कच्चे तेल का हाल
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बाद, सोमवार को शुरुआती कारोबार में मार्केट बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में रिकवरी देखी गई. शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 566 अंक बढ़कर 76,608.66 पर पहुंच गया. वहीं, 50 शेयरों वाला NSE निफ्टी 153.60 अंक चढ़कर 23,923.30 पर पहुंच गया.
आज सोमवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया 96.18 पर खुला, लेकिन डॉलर के मुकाबले 96.28 पर कारोबार करते हुए कुछ गिरावट दर्ज की, जो अपने पिछले बंद स्तर से 28 पैसे की बढ़त दर्शाता है. जानकार और विदेशी मुद्रा व्यापारियों के अनुसार, अमेरिकी मुद्रा सूचकांक भी उच्च स्तर से नीचे आ गया, जबकि घरेलू शेयरों में मजबूत खरीदारी का रुझान देखा गया, जिससे स्थानीय मुद्रा को और अधिक समर्थन मिला.
इस बीच, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 4.17 प्रतिशत गिरकर 92.74 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. मतलब कि कच्चा तेल 92.74 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है.

ईरान और अमेरिका ने रोके हमले
न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को लगातार दूसरे दिन अमेरिका ने ईरान पर हमले रोक दिए और तेहरान ने भी ऐसा ही किया. दोनों देशों को एक अस्थायी युद्धविराम समझौते पर बातचीत के लिए वापस लाने की कोशिशें जारी हैं, जो हालिया गोलीबारी की घटनाओं के कारण काफी हद तक कमजोर हो गया था.
यह साफ नहीं है कि अमेरिका ने हमले क्यों रोके हैं, जबकि इससे पहले लगभग दो हफ्तों तक तनाव बढ़ा हुआ था और अमेरिका ने ईरान के तटीय इलाकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया था. यह तनाव तब शुरू हुआ था जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों पर गोलीबारी की थी. पेंटागन ने रविवार को सवालों का कोई जवाब नहीं दिया.
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप “बातचीत के लिए कुछ गुंजाइश दे रहे हैं. वह इसे थोड़ा समय दे रहे हैं.” उन्होंने कहा, “ओमान और ईरान, साथ ही हमारे कई अन्य वार्ताकार, पिछले कुछ हफ्तों और खासकर पिछले कुछ दिनों में हर स्तर पर – सबसे वरिष्ठ स्तर से लेकर तकनीकी स्तर तक – बातचीत में शामिल रहे हैं.”
वाल्ट्ज ने इस बात को खारिज कर दिया कि ईरान के हमलों से बचाव के लिए जरूरी इंटरसेप्टर का अमेरिकी भंडार खत्म हो रहा है, लेकिन विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि अमेरिका और ईरान कब तक हमले जारी रख सकते हैं.
ईरान की सेना के प्रवक्ता ने रविवार को ईरान के सरकारी टीवी को बताया कि चूंकि अमेरिका ने पिछले दो रातों से हमले रोक दिए हैं, इसलिए ईरान ने भी ऐसा ही किया है. हाल के दिनों में तेहरान ने उन देशों में जवाबी हमले किए हैं जहां अमेरिकी सैन्य बल मौजूद हैं; इन हमलों में जॉर्डन के एक बेस पर कम से कम तीन और इराक में एक सैनिक की मौत हुई है. क्षेत्र के एक अधिकारी ने इस ठहराव को ‘सकारात्मक संकेत’ बताया है.

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दोनों देश समझौते पर लौटना चाहते हैं वापस
बता दें कि जून के बीच में दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद से 60 दिन की अवधि शुरू हुई थी, जो अब अपने दूसरे चरण में है. तनाव की मुख्य वजह ईरान का परमाणु कार्यक्रम है, जिस पर बातचीत होनी थी, लेकिन मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए इन अहम मुद्दों को अभी किनारे रखा गया है. ध्यस्थता की कोशिशों में शामिल एक क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि कूटनीतिक बातचीत चल रही है और अमेरिका तथा ईरान के हमलों में आई कमी एक “सकारात्मक संकेत है, जो तनाव कम करने की उनकी कोशिशों में मदद करता है.”
अधिकारी ने कहा कि दोनों देश अंतरिम युद्धविराम समझौते पर वापस लौटना चाहते हैं और जिस समझौते पर बातचीत हो रही है, उसका मुख्य बिंदु यह है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को कम पाबंदियों के साथ होने दे. अधिकारी को इस मामले पर बात करने की इजाजत नहीं थी, इसलिए उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी. मालूम हो कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पिछले 3 हफ्तों में सबसे निचले स्तर पर है. लेकिन, इस समझौते पर होने वाली बातचीत के बीच होर्मुज से जहाजों का आवागमन बढ़ने की काफी संभावना है.
होर्मुज में क्या है स्थिति?
न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज और अब इलाके के एक और अहम जलमार्ग, यानी लाल सागर की ओर जाने वाले बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बनी हुई है. यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने पिछले हफ्ते वहां सऊदी जहाजों की आवाजाही रोकने की धमकी दी थी. पेट्रोल की कीमतें फिर से बढ़ने के कारण दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है.
अमेरिकी नौसेना की देखरेख में काम करने वाली एक समुद्री संस्था ने रविवार को बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों की आवाजाही पिछले तीन हफ्तों में सबसे निचले स्तर पर थी. संस्था ने यह भी कहा कि पिछले 72 घंटों में किसी नए हमले की पुष्टि नहीं हुई है. उसने बताया कि बाब अल-मंदेब से जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है.
ईरान ने रविवार को कहा कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के प्रबंधन के बारे में ओमान के साथ बातचीत कर रहा है. यह जलडमरूमध्य इन देशों के बीच से गुजरता है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि बातचीत में प्रगति हुई है और यह जारी है.
बघाई ने यह भी कहा कि जलडमरूमध्य की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है. तेहरान का कहना है कि अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते के तहत उसे फिलहाल इस जलमार्ग पर जहाजों की आवाजाही का प्रबंधन करने की अनुमति है. उसने अमेरिका की उस कोशिश पर आपत्ति जताई है जिसके तहत ओमान के करीब से गुजरने वाले रास्ते का समर्थन किया जा रहा है. युद्ध से पहले इस जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता था.
अमेरिकी सेना ने शनिवार को कहा कि ईरान के खिलाफ हाल ही में फिर से लागू की गई नौसैनिक नाकेबंदी जारी है. इसके तहत एक दर्जन कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला गया, दो जहाजों को निष्क्रिय किया गया और दो जहाजों पर कब्जा किया गया. सेना ने कहा कि अमेरिकी बल “पूरी तरह सतर्क, केंद्रित, घातक और तैयार” हैं.

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ट्रंप की कोशिशों का पूरा समर्थन- नेतन्याहू
इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका जाने और मंगलवार को वॉशिंगटन में ट्रंप से मिलने की योजना बना रहे हैं. उनके कार्यालय ने यह जानकारी दी है. वे आखिरी बार फरवरी में वॉशिंगटन में मिले थे, जब ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने में कुछ ही हफ्ते बाकी थे. उस युद्ध में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई बड़े नेता मारे गए थे.
युद्ध शुरू होने के दो दिन बाद ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर हमला किया, और इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में हवाई हमलों और जमीनी सेना के जरिए जवाबी कार्रवाई की. तब से, अमेरिका ने लेबनान और इजरायल के बीच सीधी बातचीत का समर्थन किया है ताकि उस मोर्चे पर तनाव कम किया जा सके और हिज्बुल्लाह को हथियार छोड़ने के लिए मनाने का कोई रास्ता निकाला जा सके.
नेतन्याहू ने रविवार को एक अमेरिकी न्यूज से कहा कि वे ईरान को कमजोर करने और उसे अपना परमाणु कार्यक्रम खत्म करने के लिए मजबूर करने की ट्रंप की कोशिशों का “पूरी तरह” समर्थन करते हैं. उन्होंने आगे कहा, “अगर वे भारी सैन्य संघर्ष में पड़े बिना ऐसा कर सकते हैं, तो यह अच्छी बात है. क्यों नहीं?”
प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि वे “हमारे अच्छे दोस्त” ट्रंप के सामने कोई नई जानकारी पेश नहीं करेंगे, बल्कि यह सुनेंगे कि “उनके मन में क्या है, क्योंकि मुझे लगता है कि कई मायनों में, यह उनका ही फैसला है.” लेकिन नेतन्याहू ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने सीधे या अपने हथियारबंद सहयोगियों के जरिए इजरायल पर दोबारा हमला किया, तो “वह एक बहुत बड़ी गलती करेगा.”
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कितना अहम?
अब आखिरी में बात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की करते हैं. यह दुनिया का बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. यह ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध का केंद्र रहा है. फारस और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग 33 किमी चौड़ा और करीब 167 किमी लंबा है. विश्व की एनर्जी सप्लाई इस रास्ते पर बहुत ही अधिक निर्भर है.
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया का करीब 20 से 25 फीसदी तेल और गैस का व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होता है. यह रास्ता एशियाई बाजारों तक करीब 80 फीसदी से अधिक तेल की सप्लाई का माध्यम है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाधित या बंद होने से भारत समेत दुनिया के कई देश प्रभावित होते हैं.
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