Home Latest News & Updates ‘पुलिस की ज्यादतियों को सही नहीं…’, सीजेआई बोले- शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार पूरी तरह से सुनिश्चित

‘पुलिस की ज्यादतियों को सही नहीं…’, सीजेआई बोले- शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार पूरी तरह से सुनिश्चित

by Amit Dubey 27 July 2026, 12:16 PM IST (Updated 27 July 2026, 12:50 PM IST)
27 July 2026, 12:16 PM IST (Updated 27 July 2026, 12:50 PM IST)
NEET Row Protest

NEET Row Protest: नीट पेपर लीक मामले को लेकर बीते 36 दिनों से जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व में जारी विरोध-प्रदर्शन 25 जुलाई को समाप्त हो गया. पेपर लीक मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से तब के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा था. प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से अपना इस्तीफा दे दिया था और उसके बाद सीजेपी ने अपने धरना-प्रदर्शन को खत्म करने का ऐलान किया था.

इस बीच, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार की गारंटी का हवाला देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उन याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है जिनमें देश भर में नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस की ज्यादतियों का आरोप लगाया गया है.

शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार पूरी तरह से सुनिश्चित- सीजेआई

न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने विरोध-प्रदर्शन के दौरान हमले का शिकार हुए पुलिसकर्मियों के कुछ परिवार के सदस्यों की ओर से दायर एक अलग याचिका पर भी सुनवाई करने पर सहमति जताई, साथ ही दूसरी लिस्टेड याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी.

सीजेआई ने कहा, “शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार पूरी तरह से सुनिश्चित है. इससे इनकार नहीं किया जा सकता. सिर्फ इसलिए कि आंदोलन हो रहा है, पुलिस की ज्यादतियों को सही नहीं ठहराया जा सकता.”

हर व्यक्ति की जिंदगी अहम- सुप्रीम कोर्ट

जब एक वकील ने कहा कि पुलिसकर्मियों की भी पिटाई की गई थी, तो बेंच ने जोर देकर कहा, “हर व्यक्ति की जिंदगी अहम है, चाहे वह कोई भी हो.”

बेंच ने कहा, “एक प्रोटोकॉल होना चाहिए. सही जगह होनी चाहिए और कोई रोक-टोक नहीं होनी चाहिए. लेकिन अगर कुछ असामाजिक तत्व वगैरह हैं, तो उनसे निपटा जा सकता है. यह सिर्फ दिल्ली का सवाल नहीं है. प्रोटोकॉल में एकरूपता की जरूरत है.” इसमें आगे कहा गया कि सिर्फ आंदोलन होने का मतलब यह नहीं है कि लाठीचार्ज किया जाए.

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा, “स्वयं विकसित अनुशासन की आवश्यकता है जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए आवश्यक है.” उन्होंने पक्षों से निष्पक्ष तरीके से पीठ की सहायता करने का आग्रह किया. केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह निष्पक्ष रूप से अदालत की सहायता करेंगे.

पेपर लीक के विरोध में कई राज्यों में प्रदर्शन

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी जिनमें नीट परीक्षा के पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस द्वारा की गई ज्यादतियों का आरोप लगाया गया है.

बता दें कि पेपर लीक के विरोध में कई राज्यों में छात्र प्रदर्शन कर रहे थे. कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में 20 जुलाई को दिल्ली में हुए संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें आरोप है कि संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठियों और आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया. प्रदर्शनकारी नीट परीक्षा के पेपर लीक मामले को लेकर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे.

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News Source: PTI

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