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जजों की नियुक्ति के लिए वैश्विक प्रणालियों का अध्ययन, कार्यपालिका-न्यायपालिका के बीच कोई टकराव नहीं

by Sanjay Kumar Srivastava 31 May 2026, 3:48 PM IST
31 May 2026, 3:48 PM IST
जजों की नियुक्ति के लिए वैश्विक प्रणालियों का अध्ययन, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच कोई टकराव नहीं

Judges Appointment: केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि सरकार न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए विभिन्न देशों में अपनाई जाने वाली प्रणालियों पर विचार कर रही है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच कोई झगड़ा नहीं है और उच्च न्यायपालिका में रिक्तियों को भरने के लिए एक अच्छी परामर्श प्रक्रिया अपनाई जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि अदालतों में बढ़ते लंबित मामलों के बीच सरकार वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र को मजबूत करने के लिए काम कर रही है.

न्यायपालिका पर मंत्री ने रखे विचार

पीटीआई के साथ एक विशेष साक्षात्कार में मेघवाल ने कहा कि सरकार न्यायाधीशों की नियुक्ति में विभिन्न देशों द्वारा अपनाई गई प्रणालियों की जांच कर रही है. हालांकि उनका अध्ययन करने के लिए अभी कोई औपचारिक तंत्र नहीं बनाया गया है. इस सवाल का जवाब देते हुए कि क्या कॉलेजियम प्रणाली का कोई विकल्प हो सकता है, मेघवाल ने कहा कि आइए देखें कि इससे क्या निकलता है. उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति पर कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच मतभेदों पर एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए मेघवाल ने कहा कि कोई झगड़ा नहीं है और अच्छे परामर्श होते हैं.

कॉलेजियम पर कोई मतभेद नहीं

उन्होंने कहा कि ऐसे मौके आते हैं जब कॉलेजियम पर सरकार के मत भिन्न होते हैं. उन्होंने कहा कि इसी तरह सरकार भी नकारात्मक पृष्ठभूमि जांच जैसे कारणों से उनकी सिफारिशों को रोक कर रखती है. लेकिन इस मामले में बिल्कुल भी झगड़ा नहीं है. संसद के दोनों सदनों ने SC और HC न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए एक निकाय की स्थापना करके कॉलेजियम प्रणाली को पलटने के लिए एक विधेयक लगभग सर्वसम्मति से पारित किया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर, 2015 को 99वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के साथ-साथ राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) अधिनियम को असंवैधानिक और शून्य घोषित कर दिया.

सरकार का वैकल्पिक तंत्र पर जोर

मालूम हो कि 4:1 के बहुमत के फैसले में पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने फैसला सुनाया कि एनजेएसी ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत को गंभीर रूप से कमजोर करके भारतीय संविधान की बुनियादी संरचना का उल्लंघन किया है. इस ऐतिहासिक फैसले ने सरकार के प्रस्तावित पैनल को ध्वस्त कर दिया और उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए दशकों पुरानी कॉलेजियम प्रणाली को पुनर्जीवित कर दिया. मेघवाल ने कहा कि उच्चतम न्यायालय, 25 उच्च न्यायालयों और निचली न्यायपालिका में पांच करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं. मोदी सरकार लंबित मामलों को कम करने के लिए मध्यस्थता सहित वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र पर जोर दे रही है.

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News Source: PTI

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