UP News : यूपी में 2027 की चुनावी काउंटडाउन शुरू हो चुका है. एक तरफ समाजवादी पार्टी रथ यात्रा पर सवार होकर चुनाव में जाने वाली है. वहीं, दूसरी तरफ बीजेपी ने मिशन 2027 का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है. मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ चुनावी चक्रव्यूह रचने पर लंबी बैठक की. केंद्रीय गृह मंत्री आने वाले दिनों में अवध से चुनावी बिगुल फूकेंगे. लेकिन बीजेपी के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं. इस बार राम मंदिर चढ़ावे में कथित चोरी का विवाद और 2024 लोकसभा चुनाव के झटके को ध्यान में रखते हुए कदम आगे बढ़ा रही है. इसी बीच शाह की रणनीति साफ है कि सीट भी बचानी है और हारी हुई सीटें भी वापस भी लानी हैं.
यूपी की 403 सीटों पर 2027 का रण
2022 में बीजेपी ने 376 सीटों पर चुनाव लड़कर 255 सीटें जीती थीं यानी 121 सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था. साथ ही बीजेपी गठबंधन ने कुल 273 सीटें जीती थीं. अब इन्हीं हारी हुई सीटों का जीत-हार के अंतर का हिसाब निकाला जा रहा है. 2022 में 49 सीटों पर जीत-हार का अंतर 5 हजार वोट से कम था. इनमें बीजेपी के 18 उम्मीदवार ऐसी सीटों पर हारे थे यानी पार्टी मान रही है कि कुछ सीटों पर हार और जीत के बीच का अंतर संगठन, बूथ और उम्मीदवार के प्रदर्शन से बदला जा सकता है. बीजेपी जीत को लेकर आश्वस्त है.
विभिन्न कैटेगरी में बांटी पूरी रणनीति
- वह सीटें जहां बीजेपी पिछले तीन चुनाव से जीत रही है.
- जहां पार्टी कम अंतर से जीती.
- जहां पार्टी दो बार से लगातार कम अंतर से हार रही है.
- ये वो सीटें हैं जो एसपी-कांग्रेस के परंपरागत गढ़ है.
हर सीट के लिए अलग रणनीति, अलग संगठग और अलग चुनावी चेहरा. बीजेपी के मिशन में खास फोकस उन 61 सीटों पर भी है जहां पार्टी पिछले तीन विधानसभा चुनावों (2012, 2017 और 2022) में एक बार भी जीत दर्ज नहीं कर सकी. यहां बूथ फीडबैक, जातीय समीकरण, लाभार्थी संपर्क और संभावित उम्मीदवारों का सर्वे, सब कुछ नए सिरे से होगा. अमित शाह पिछले दो चुनाव में उत्तरप्रदेश जीत के चाणक्य रहे हैं इससे बीजेपी नेताओं को तीसरी जीत की भी पूरी उम्मीद है.
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नेताओं का कंगाला जाएगा चुनावी रिकॉर्ड
टिकट को लेकर भी बीजेपी में बड़ा मंथन शुरू हो गया है. सूत्रों के मुताबिक, तीन या उससे ज्यादा चुनाव लड़ चुके नेताओं का पूरा चुनावी रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है. पिछली बार कितने वोट से हारे, जीत-हार का अंतर कितना था, अपने बूथ पर प्रदर्शन कैसा रहा, संगठन में पकड़ कितनी है यानी अब सिर्फ ‘पुराना चेहरा’ होना टिकट की गारंटी नहीं. टिकट पर कैंची चल सकती है! बीजेपी के सामने एक और चुनौती अयोध्या का राम मंदिर चढ़ावा विवाद और कथित चोरी के मामले में जांच है.
कांग्रेस ने भी शुरू की चुनावी तैयारी
गिरफ्तारियां और ट्रस्ट में बड़े संगठनात्मक बदलाव हुए हैं. ट्रस्ट ने CEO पद बनाने और शीर्ष स्तर पर बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है. राम मंदिर बीजेपी की सबसे बड़ी वैचारिक पहचान का केंद्र रहा है. इसलिए चढ़ावे का विवाद 2027 से पहले पार्टी के लिए भावनात्मक और राजनीतिक. दोनों स्तर पर चुनौती बन गया है. उधर अखिलेश यादव भी पीछे नहीं हैं. एसपी चीफ जल्द रथ यात्रा के जरिए जनता के बीच उतरने की तैयारी में हैं यानी एक तरफ अमित शाह सीटवार रिपोर्ट और टिकट का जीत वाला फॉर्मूला तो दूसरी तरफ अखिलेश रथ यात्रा और PDA के साथ सीधा जनसंपर्क है. समाजवादी पार्टी चढ़ावा चोरी को भी योगी सरकार पर कलंक की तरह प्रचारित कर थोपने के मूड में है. वहीं, कांग्रेस ने भी क्षेत्र में अपनी तैयारी तेज कर दी है.
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