Mizoram News: मिजोरम की लुंगलेई जिला जेल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. पुलिस ने शनिवार को इस बड़े जालसाजी रैकेट का भंडाफोड़ किया.
Mizoram News: मिजोरम की लुंगलेई जिला जेल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां जाली अदालती दस्तावेजों और फर्जी रिहाई आदेशों के जरिए POCSO, NDPS और चोरी के मामलों में दोषी 17 कैदियों को धोखाधड़ी से रिहा कर दिया गया. पुलिस ने शनिवार को इस बड़े जालसाजी रैकेट का भंडाफोड़ किया. इस मामले में पुलिस ने एक कैदी और एक अंशकालिक जेल एम्बुलेंस चालक सहित दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
आदेश देख जज को हुआ संदेह
यह पूरा मामला 24 अप्रैल को तब प्रकाश में आया जब जिला और सत्र न्यायाधीश आर लालदुहावमी की अदालत में दो विचाराधीन कैदी मालसावमट्लुआंगा और डोकापथंगा पेश हुए. दोनों ने लुंगलेई जिला अदालत और गौहाटी उच्च न्यायालय के फर्जी आदेश दिखाते हुए दावा किया कि उन्हें 50,000 रुपये के मुचलके पर रिहा किया जाए. न्यायाधीश को तुरंत संदेह हुआ क्योंकि उन्होंने ठीक एक दिन पहले (23 अप्रैल) ही उनकी सुनवाई की थी और अगली तारीख 8 मई तय की थी. गड़बड़ी की आशंका होने पर न्यायाधीश लालदुहावमी ने तुरंत जिला जेल का औचक निरीक्षण किया. जांच में खुलासा हुआ कि कई खतरनाक कैदी पहले ही ऐसे ही फर्जी आदेशों पर रिहा हो चुके हैं. इसके बाद 27 अप्रैल को लुंगलेई पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई.
दो आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने तत्काल विशेष अभियान चलाकर मामले की जांच शुरू की और शिकायत में नामजद अन्य 15 फरार लोगों की तलाश तेज कर दी है. उनमें से 11 को लुंगलेई पुलिस ने दोबारा गिरफ्तार कर लिया और वापस जेल भेज दिया, जबकि एक को ख्वाज़ावल पुलिस ने गिरफ्तार किया. जांच में पाया गया कि जिला जेल से रिहा होने के बाद एक की मृत्यु हो गई. आगे की जांच से पता चला कि POCSO उल्लंघन, मादक पदार्थों की तस्करी (ND&PS) और चोरी के लिए सजा काट रहे लोगों से लेकर कुल 17 दोषी 30 जनवरी से 18 मार्च के बीच जाली कागजात का उपयोग करके जेल से बाहर आ गए थे. पुलिस ने मामले में दो मुख्य आरोपियों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया. दोनों आरोपी आइजोल के ज़ेमाबॉक इलाके का निवासी जेरेमिया लालथंगतुरा (25) और रिपब्लिक वेंगथलांग का सी लालटलानह्लुआ (31) हैं. दोनों को 1 मई को गिरफ्तार किया गया और 7 मई को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
हर कैदी से करीब 50,000 रुपये की वसूली
दोनों आरोपियों ने नकदी के बदले अपने परिचित वकील के माध्यम से उनकी रिहाई सुनिश्चित करने या अपील दायर करने का वादा करके कैदियों को धोखा दिया. संदिग्धों ने प्रति कैदी से 4,000 रुपये से 50,000 रुपये के बीच वसूली की. पुलिस ने कहा कि पैसा दोनों आरोपियों के बीच साझा किया गया था. जांच में आगे पता चला कि जेर्मिया द्वारा लुंगलेई के रहसी वेंग इलाके में एक ज़ेरॉक्स और प्रिंटिंग की दुकान के कंप्यूटर के साथ-साथ जिला जेल के अंदर एक कार्यालय कंप्यूटर का उपयोग करके जाली दस्तावेज़ तैयार किए गए थे. इन दस्तावेजों को फिर लालटलानह्लुआ ने जेल अधिकारियों को सौंप दिया था. पुलिस ने कहा कि जेल अधिकारियों ने रिहा कर दिया.
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News Source: PTI
