Thane Court: महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक विशेष अदालत ने शादी का झांसा देकर एक नाबालिग लड़की के साथ बार-बार रेप करने के जुर्म में 35 वर्षीय आरोपी को 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रेमल एस. विठलानी ने पेशे से पेंटर आरोपी श्रीनिवास अशोक येलगोंडा को भारतीय दंड संहिता (IPC) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दोषी ठहराया. अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में हिंसा या पूर्व-नियोजित साजिश न होने के बावजूद कानून के तहत न्यूनतम 20 वर्ष की अनिवार्य सजा दी गई है.
शादी के वादे से मुकरा आरोपी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता और आरोपी दोनों दिवा ईस्ट की एक ही हाउसिंग सोसाइटी के निवासी थे. जून 2020 में दोनों की जान-पहचान हुई, जो बाद में प्रेम संबंधों में बदल गई. विशेष लोक अभियोजक रेखा हिवराले ने अदालत को बताया कि आरोपी ने नवंबर 2020 में शादी का झांसा देकर एक पड़ोसी के खाली फ्लैट में नाबालिग का पहली बार यौन शोषण किया. इसके बाद उसने पीड़िता के साथ कई बार इस घिनौने कृत्य को अंजाम दिया. अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को कड़ी सजा सुनाई. यह मामला फरवरी 2022 में तब सामने आया, जब आरोपी ने शादी करने के अपने वादे से इनकार कर दिया, जिसके बाद उनके बीच विवाद हो गया.
अदालत ने नहीं मानी बचाव पक्ष की दलील
आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें पीड़िता, उसकी मां और एक पड़ोसी शामिल थे. बचाव पक्ष ने दलील दी कि 2022 में FIR दर्ज कराने में बिना किसी ठोस कारण के देरी हुई. बार-बार हुए यौन शोषण की सटीक तारीखें भी नहीं बताई गईं. हालांकि, पीड़िता के जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल छोड़ने के प्रमाण पत्र (स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट) के आधार पर अदालत ने पुष्टि की कि जिस दौरान यह सब हुआ, उसके ज्यादातर समय वह 18 साल से कम उम्र की एक बच्ची थी. इसलिए, उसकी कानूनी सहमति का कोई महत्व नहीं रह जाता.
5,000 रुपये का जुर्माना भी ठोका
न्यायाधीश ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से साफ पता चलता है कि पीड़िता को पूरा यकीन था कि आरोपी उससे शादी करेगा. इसी वजह से उसने अपने माता-पिता से अपने रिश्ते और बार-बार बने शारीरिक संबंधों को छिपाकर रखा. अदालत ने यह भी गौर किया कि इसमें किसी तरह की जबरदस्ती, शारीरिक चोट या पहले से सोची-समझी यौन हिंसा का कोई सबूत नहीं मिला है. अदालत ने कहा कि हालांकि पीड़िता के 18 साल से कम उम्र (नाबालिग) होने की वजह से उसकी सहमति कानूनी रूप से मान्य नहीं है और आरोपी को दोषी ठहराना अनिवार्य है, लेकिन उनके बीच का प्रेम संबंध सजा तय करते समय एक महत्वपूर्ण और ठोस आधार है, जिस पर विचार किया जाना चाहिए. अदालत ने दोषी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया.
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