PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षाकर्मियों के साथ दिवाली मनाई. कभी नक्सलियों का गढ़ रहे इस क्षेत्र में बदलाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दशकों पुरानी लड़ाई के बाद आज यह इलाका आज़ादी से जश्न मना रहा है और हर जिला नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है. नक्सल-विरोधी अभियानों के मुख्य प्रशिक्षण केंद्र और लॉन्च पैड, करनपुर स्थित कोबरा ऑपरेशंस बेस का दौरा करते हुए प्रधानमंत्री ने आंतरिक सुरक्षा के महत्व पर विशेष ज़ोर दिया.
सुरक्षाकर्मियों के समर्पण को किया सलाम
उन्होंने राष्ट्र रक्षा की तुलना करते हुए स्पष्ट किया कि जब देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है, तो बाहरी दुश्मन भी सफल नहीं हो पाते. उन्होंने देश के भीतर शांति बनाए रखने वाले सुरक्षाकर्मियों के सर्वोच्च बलिदान और समर्पण को सलाम करते हुए उन्हें सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों के समान ही महत्वपूर्ण बताया. वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बस्तर एक ऐसा इलाका है जहां कभी नक्सलियों का दबदबा हुआ करता था, लेकिन अब यहां विकास तेज़ी से हो रहा है.
देशवासियों की ओर से जताया आभार
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं यहां 140 करोड़ देशवासियों की ओर से आपके बलिदान, समर्पण और सेवा भाव के लिए आभार व्यक्त करने आया हूं. जब किसी देश की आंतरिक सुरक्षा मज़बूत होती है, तो बाहरी दुश्मन सफल नहीं हो सकते. लेकिन, जब आंतरिक सुरक्षा कमज़ोर पड़ जाती है, तो बाहरी दुश्मन भी सिर उठाने लगते हैं. इसलिए, सीमाओं पर हमारे सशस्त्र बल जो भूमिका निभाते हैं, वही भूमिका आप सभी सुरक्षाकर्मी देश के भीतर निभाते हैं. आपने देश की एकता और अखंडता के लिए अनगिनत बलिदान दिए हैं. आपने बहुत बड़े व्यक्तिगत त्याग किए हैं. इस क्षेत्र में हुई हिंसा को याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नक्सलियों ने लोगों से वोट देने का अधिकार तक छीन लिया था, और एक ही साल में यहां 2,000 से ज़्यादा हमले हुए थे.
नक्सलवाद से निपटने में पिछली सरकारें नाकाम
उन्होंने कहा कि 2010 में, पास के दंतेवाड़ा में नक्सलियों के साथ हुई एक मुठभेड़ में हमारे CRPF के 76 जवान शहीद हो गए थे. उसी साल दंतेवाड़ा की एक और घटना में 44 निर्दोष नागरिक मारे गए थे. यह ज़मीन हमारे बहादुर सैनिकों के ख़ून से सनी हुई थी. प्रधानमंत्री मोदी ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए इस क्षेत्र में नक्सलवाद से निपटने के उनके तरीकों की आलोचना की. उन्होंने कहा कि महलों में रहने वाले उन प्रभावशाली नेताओं की ओर से पीड़ा की एक भी आवाज़ सुनाई नहीं दी. उन्होंने कहा कि अगर आप 2004 से 2013 के आंकड़े देखें, तो पाएंगे कि हर साल मारे गए हमारे बहादुर सैनिकों की संख्या, मारे गए नक्सलियों की संख्या से कहीं अधिक थी. दुर्भाग्य से, उस समय की सरकारों ने नक्सलवाद को एक लाइलाज बीमारी मान लिया और इसे ऐसे ही छोड़ दिया.
अब बस्तर में तेजी से हो रहा विकास
कोई भी देश इस सोच के साथ नहीं चल सकता कि दुश्मनों के सामने हालात ऐसे ही बने रहेंगे. बस्तर क्षेत्र से नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने में CRPF सबसे आगे रही है. नक्सलवाद लंबे समय से विकास के रास्ते में एक बड़ी बाधा रहा है, खासकर बस्तर में. अब जब शांति और सुरक्षा मजबूत हो रही है, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, संचार, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में सबसे आगे रहे हैं. शाह के अनुसार, सरकार की नीति स्पष्ट है कि जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करते हैं, उन्हें मुख्यधारा के समाज में वापस आने का मौका दिया जाता है. वहीं, जो लोग कानून तोड़ते हैं और निर्दोष नागरिकों की जान खतरे में डालते हैं, उनके खिलाफ सुरक्षा बल सख्त कार्रवाई करते हैं. इस अभियान के दौरान कई लोगों ने आत्मसमर्पण किया है और मुख्यधारा में लौटने का विकल्प चुना है.
खत्म हुआ वर्षों का इंतजार : नक्सलियों का गढ़ रहा बस्तर अब रेल नेटवर्क से जुड़ा, दौड़ेंगी ट्रेनें
News Source: ANI
