Gymkhana Club: लुटियंस दिल्ली को दिल्ली का दिल कहा जाता है. यह राजधानी का बहुत ही खास और हाई-सिक्योरिटी वाला एडमिनिस्ट्रेटिव एरिया है, जहां भारत की सरकार और पावर का मेन सेंटर है और यहीं है दिल्ली के सबसे अमीर वर्ग की अय्याशी का अड्डा- जिमखाना क्लब. इस समय जिमखाना क्लब सुर्खियों में है. दरअसल, केंद्र सरकार ने जिमखाना क्लब को खाली करने का नोटिस दिया है, जिसे लेकर विवाद चल रहा है. क्लब के मेंबर्स और कर्मचारी इसका विरोध कर रहे हैं.
जिमखाना क्लब कोई आम क्लब नहीं, बल्कि देश के रसूखदार लोगों- बड़े सरकारी अधिकारियों, कारोबारियों और नेताओं की पसंदीदा जगह रहा है. यहां जाना आम आदमी के लिए मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है. यह क्लब दिल्ली में सबसे महंगी जमीन पर 27.3 एकड़ की जमीन पर बना है. यह अपने सदस्यों को शानदार सुविधाएं देता है. वहीं, क्लब का किराया और सुविधाएं जानकर आप चौंक जाएंगे. केंद्र सरकार का नोटिस मिलने के बाद यह विवाद सिर्फ एक क्लब तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सरकारी संपत्तियों के इस्तेमाल, पारदर्शिता और VIP कल्चर के बने रहने को लेकर कई गहरे सवाल खड़े करता है. चलिए जानते हैं कि यह क्लब कैसा है, इसकी खासियत, इतिहास और पूरा विवाद क्या है.
क्या है दिल्ली जिमखाना क्लब
113 साल पुराना दिल्ली जिमखाना क्लब भारत के सबसे पुराने आलीशान प्राइवेट स्पोर्ट्स क्लबों में से एक है, जहां भारत के सबसे शक्तिशाली, अमीर और वीआईपी लोग आते हैं, जिनमें आईएएस, आईपीएस, जज, बड़े नेता शामिल हैं. इसी कारण इसे “ऐश-ओ-आराम करने वालों का स्वर्ग” कहते हैं, तो कुछ इसे ब्रिटिश राज से मिली VIP संस्कृति की एक पुरानी निशानी मानते हैं. यह लुटियंस दिल्ली में 27.3 एकड़ की जमीन पर फैला हुआ है. कानूनी रूप से, इसका मालिकाना हक भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) के जरिए भारत के राष्ट्रपति के पास है. क्लब में रेगुलर 650 स्टाफ मेंबर काम करते हैं, जिनमें शेफ, वेटर, कोच, माली और एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ शामिल हैं.

यहां विश्व स्तर की खेल सुविधाएं हैं, जिनमें 26 ग्रास टेनिस कोर्ट, स्क्वैश कोर्ट, बैडमिंटन कोर्ट और एक समृद्ध लाइब्रेरी शामिल है. यहां एक ऐतिहासिक आउटडोर स्विमिंग पूल और एक इनडोर ऑल वेदर पूल है. इसके अलावा यहां फिटनेस के लिए हेल्थ क्लब और योगा सेंटर्स भी हैं. क्लब में एक ऐतिहासिक लाइब्रेरी है. ताश खेलने के लिए स्पेशल रूम बनाए गए हैं. मेंबर्स के मनोरंजन के लिए
लाइव म्यूजिक, थिएटर नाटक, तंबोला और स्पेशल पार्टी का इंतजाम किया जाता है. यहां लगभग हर तरह का खाना और शराब मिलती है.
विवाद
फिलहाल विवाद जिमखाना क्लब को खाली करने को लेकर चल रहा है. केंद्र सरकार ने जिमखाना की परपेचुअल लीज को रद्द कर दिया है और इसे 5 जून तक पूरा परिसर खाली करने का अल्टीमेटम दिया है. सरकार का कहना है कि यह प्रधानमंत्री आवास और सैन्य प्रतिष्ठानों के बेहद नजदीक है और हाई-सिक्योरिटी जोन में आता है. सरकार इसे खाली कराकर प्रॉपर्टी को अपने नियंत्रण में लेना चाहती है और इसे डिफेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के तौर इस्तेमाल करना चाहती है. इसके अलावा दूसरा बड़ा कारण है वित्तीय चूक. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, नियमों और बदले हुए रेट के उल्लंघन की वजह से क्लब पर सरकार का ₹47.58 करोड़ का ग्राउंड रेंट बकाया है. L&DO ने पिछले नौ महीनों में क्लब को तीन सख्त लीगल नोटिस जारी किए हैं, इसके बाद भी क्लब ने पेमेंट नहीं की. इसके साथ ही, क्लब पर लग्जरी टैक्स चोरी के गंभीर आरोप भी हैं.
सरकार का तर्क है कि अरबों रुपये की इस सार्वजनिक जमीन का इस्तेमाल कुछ रसूखदार और अमीर लोग (एलीट क्लास) अपने मनोरंजन, संडे ब्रंच और टेनिस जैसी प्राइवेट एक्टिविटीज के लिए कर रहे हैं, जबकि इस पर पूरे देश का हक होना चाहिए. इसके लिए, ओरिजिनल लीज डीड (1928) के “पब्लिक पर्पस” क्लॉज का इस्तेमाल किया गया है, जिसके तहत सरकार देश की जरूरत पड़ने पर अपनी जमीन वापस ले सकती है.

सरकार के आदेश के बाद और मेंबर्स की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि इस आदेश से कर्मचारियों पर आर्थिक संकट आ जाएगा. जिमखाना स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन के अनुसार, क्लब के अचानक बंद होने से वहां दशकों से काम कर रहे 650 से ज़्यादा कर्मचारियों की रोजी-रोटी और नौकरियां पूरी तरह खत्म हो जाएंगी और उनके परिवारों के करीब 6,500 सदस्य सीधे सड़कों पर आ जाएंगे. हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के नोटिस पर रोक लगने से इनकार कर दिया है. सरकार ने कोर्ट में आश्वासन दिया है कि 5 जून को क्लब में सीधे ताला नहीं लगाया जाएगा, जिससे कर्मचारियों को थोड़ी राहत मिली है.
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इतिहास
जिमखाना क्लब की स्थापना ब्रिटिश काल में 3 जुलाई, 1913 में हुई थी. उस समय इस क्लब को ब्रिटिश अधिकारियों और उनके परिवारों के मनोरंजन, सामाजिक मेलजोल और खेलकूद के लिए बनाया गया था. ब्रिटिश काल में, क्लब के दरवाजे भारतीयों के लिए पूरी तरह बंद थे. सिर्फ कुछ भारतीय राजकुमारों और महाराजाओं को ही एंट्री मिलती थी और वो भी बहुत कम. यह पूरी तरह से “सिर्फ यूरोपियन लोगों के लिए” था.

पहले इसका नाम ‘इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ था, आजादी के बाद इसके नाम से इंपीरियल हटा दिया गया. जिमखाना क्लब की बिल्डिंग को मशहूर ब्रिटिश आर्किटेक्ट रॉबर्ट टी. रसेल ने डिजाइन किया था, जिन्होंने कॉनॉट प्लेस को भी डिजाइन किया है. 1930 के दशक में वायसराय की पत्नी लेडी विलिंगडन को दिल्ली में स्विमिंग पूल नहीं मिला, इसलिए उन्होंने क्लब में स्विमिंग पूल बनाने के लिए ₹21,000 दान किए.
किराया
इस आलीशान क्लब का किराया जानकर आप हैरान रह जाएंगे. ब्रिटिश सरकार ने 1928 में क्लब को 27.3 एकड़ की जमीन ‘परपेचुअल लीज’ (स्थायी पट्टे) पर दी थी, जिसका सालाना किराया मात्र ₹15 प्रति एकड़ तय था. इस हिसाब से पूरे 27 एकड़ का सालाना सरकारी किराया महज ₹409.50 बनता था, जो दशकों तक ऐसे ही चलता रहा. साल 2023 यानी आजादी के 95 सालों तक क्लब ने सिर्फ ₹409.50 सालाना किराया ही दिया. दिसंबर 2023 में, केंद्र सरकार के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने पहली बार इस पुराने किराए में बदलाव किया. सरकार ने कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल जमीन के रेट के आधार पर क्लब का सालाना किराया ₹409.50 से बढ़ाकर ₹4.10 करोड़ प्रति वर्ष कर दिया, जिसे क्लब ने मनमाना बताया था.

इसके बाद सरकारी फाइनेंशियल ऑडिट, जमीन के कथित गलत इस्तेमाल और पिछले बकाए का पेमेंट न करने पर पेनल्टी की वजह से कुल किराया तेजी से बढ़ा. 16 अप्रैल, 2026 को जारी आखिरी सरकारी नोटिस के मुताबिक, क्लब के ऊपर ₹47.58 करोड़ का कुल बकाया है.
जिमखाना क्लब के मेंबर्स
दिल्ली जिमखाना क्लब में बड़े-बड़े लोग भी सालों तक मेंबरशिप मिलने का इंतजार करते रहते हैं. अगर आप गैर सरकारी कर्मचारी हैं, फिर तो आपके लिए इसका मेंबर बनना बहुत मुश्किल है. फिलहाल क्लब में 14,000 रजिस्टर्ड मेंबर हैं. कुल मेंबरशिप में से सिर्फ 5,600 परमानेंट मेंबर हैं. सिर्फ इन मेंबर को ही क्लब में वोट देने और चुनाव लड़ने का अधिकार होता है. बाकी मेंबर एसोसिएट, आउटस्टेशन या लेगेसी कैटेगरी में आते हैं. इन परमानेंट मेंबर में से लगभग 5,000 देश के टॉप सिविल सर्विस ऑफिसर (IAS, IPS, IFS) और इंडियन आर्म्ड फोर्सेज (आर्मी, नेवी, एयर फोर्स) के सीनियर ऑफिसर हैं. बाकी में बड़े कॉर्पोरेट दिग्गज, जज और पॉलिटिशियन शामिल हैं.
कैसे मिलती है मेंबरशिप
दिल्ली जिमखाना क्लब का मेंबर बनना बहुत ही मुश्किल है, जिसके लिए आपके पास पैसा और पेशेंस दोनों होने चाहिए. मेंबरशिप लेने का प्रोसेस मुख्य रूप से दो कैटेगरी में बंटा हुआ है- सरकारी और गैर-सरकारी.
सरकारी कैटेगरी (80% कोटा): सिर्फ ऑल इंडिया सर्विसेज के टॉप ऑफिसर, जैसे IAS, IPS, IFS, और इंडियन आर्म्ड फोर्सेज के सीनियर ऑफिसर ही अप्लाई कर सकते हैं. उन्हें मेंबरशिप के लिए सबसे ज्यादा प्राथमिकता मिलती है. इनके लिए मेंबरशिप फीस केवल 5 लाख रुपए है.
गैर-सरकारी कैटेगरी (20% कोटा): यह कैटेगरी आम नागरिकों, जाने-माने डॉक्टरों, चार्टर्ड अकाउंटेंट, जाने-माने वकीलों, उद्योगपतियों और टॉप कॉर्पोरेट अधिकारियों (CEO) के लिए खुली है. गैर-सरकारी लोगों को क्लब की मेंबरशिप लेने के लिए 22 से 30 लाख रुपए की फीस देनी पड़ती है और जीएसटी अलग से.
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सालाना और मासिक फीस: मेंबरशिप लेने के बाद सभी मेंबर्स को सालाना फीस भी देनी पड़ती है, जो दिल्ली में रहने वाले लोगों के लिए 18,000 रुपए से लेकर 20,000 रुपए तक होती है. वहीं 80 साल से ज्यादा के मेंबर्स को सिर्फ 7,200 रुपए फीस ही देनी पड़ती है.

मेंबरशिप का प्रोसेस
प्रपोजर: मेंबरशिप फॉर्म पाने के लिए, एप्लिकेंट के पास क्लब के दो मौजूदा परमानेंट मेंबर का लिखा हुआ एंडोर्समेंट होना चाहिए, जो एप्लिकेंट के अच्छे कैरेक्टर और सोशल स्टैंडिंग की पुष्टि करते हों.
स्ट्रिक्ट स्क्रीनिंग और इंटरव्यू: एप्लीकेशन जमा करने के बाद, क्लब की एक स्पेशल स्क्रीनिंग कमिटी एप्लिकेंट के बैकग्राउंड, फाइनेंशियल स्टेटस, सोशल स्टैंडिंग और एजुकेशन को अच्छी तरह से टेस्ट करती है. इस टेस्ट में पास होने के बाद, एप्लिकेंट और उनके पार्टनर को फॉर्मल इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है.
लंबा इंतजार: इंटरव्यू पास करने के बाद, एप्लिकेंट का नाम बहुत लंबी वेटिंग लिस्ट में डाल दिया जाता है. सरकारी अधिकारियों को 3 से 5 साल के अंदर प्रायोरिटी मेंबरशिप मिल जाती है, जबकि गैर-सरकारी मंबर्स को 25 से 35 साल का लंबा इंतजार करना पड़ता है. अगर आप जवानी में इसके लिए अप्लाई करते हैं, तो बुढ़ापे तक आपको मेंबरशिप मिल सकती है.
लेगेसी मेंबरशिप: अगर किसी व्यक्ति के माता-पिता पहले से ही दिल्ली जिमखाना के परमानेंट मेंबर हैं, तो उनके बच्चों को ‘लेगेसी कैटेगरी’ में प्रायोरिटी दी जाती है. उन्हें आम लोगों की तुलना में बहुत जल्दी और कम फीस पर मेंबरशिप मिल जाती है.
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