Semiconductor Industry in India: आज डिजिटल और एआई की बढ़ती दुनिया के बीच विश्व तेजी के साथ सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की ओर बढ़ रहा है. आने वाले समय में इसकी मांग काफी तेजी के साथ बढ़ने वाली है. सेमीकंडक्टर उद्योग में बात सेमीकंडक्टर चिप की होती है, जिसे एक इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट का ब्रेन यानी दिमाग कहा जाता है. इसके अलावा इसे माइक्रोचिप भी कहा जाता है. दुनिया में सेमीकंडक्टर का मार्केट करीब 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बताया जाता है. आने वाले दिनों में इसमें तेजी के साथ बढ़ोतरी होने वाली है.
सेमीकंडक्टर चिप, जो सिलिकॉन जैसे पदार्थों से बनाई जाती है. इसकी डिमांड कम्प्यूटर से लेकर के स्मार्टफोन तक और स्पेसक्राफ्ट से लेकर ईवी व डिफेंस सिस्टम तक है. जानकार बताते हैं कि आने वाले दिनों में एआई का काफी बोलबाला होने वाला है. यहां खास बात यह है कि एआई में सेमीकंडक्टर चिप की बड़ी मांग होती है. सेमीकंडक्टर चिप को करीब हर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के लिए डिजिटल इस दुनिया के लिए रीढ़ कहा जा सकता है. किसी भी डिवाइस में सेमीकंडक्टर चिप की साइज वैसे तो बहुत छोटी होती है, लेकिन इसके अंदर आप कह सकते हैं कि उस डिवाइस को कंट्रोल और चलाने के लिए काफी अहम चीजें शामिल होती हैं. मतलब कि सेमीकंडक्टर चिप के अंदर स्विच की एक पूरी दुनिया होती है. इसे ट्रांजिस्टर कहा जाता है. ये कंप्यूटर की भाषा 0 से 1 के अनुसार पावर को ऑन या ऑफ करते हैं.
सेमीकंडक्टर चिप की दुनिया में ताइवान का दबदबा है. वहीं, भारत की बात करें तो अपने यहां इसके उद्योग को काफी तेजी के साथ बढ़ाने का काम चल रहा है. बीते साल दिल्ली में सेमिकॉन इंडिया 2025 का आयोजन किया गया था. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि देश में 18 बिलियन डॉलर से 10 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है. उन्होंने तब यह भी कहा था कि वो दिन दूर नहीं जब भारत में बनी सबसे छोटी चिप दुनिया में सबसे बड़ा बदलाव लाएगी. अब आइए जानते हैं कि दुनिया की चिप इंडस्ट्री में ताइवान के अलावा किन-किन देशों की बड़ी भूमिका है. इसके साथ ही जानेंगे कि सेमीकंडक्टर उद्योग का भारत में क्या भविष्य है और इसके लिए सरकार का पूरा रोडमैप क्या है. इसकी शुरुआत ताइवान से ही करते हैं.

सेमीकंडक्टर चिप में ताइवान दुनिया का सुपरपावर
वैसे तो ताइवान का क्षेत्रफल 36 हजार 197 वर्ग किलोमीटर के आसपास है और यहां की जनसंख्या करीब ढाई करोड़ है, लेकिन सेमीकंडक्टर चिप के मामले में यह दुनिया का सुपरपावर है. जी हां, साल 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, सेमीकंडक्टर चिप के उत्पादन के मामले में ताइवान की दुनिया में 65 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी है. विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दुनिया की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में चिप के निर्माण में ताइवान की हिस्सेदारी 68 फीसदी से अधिक पहुंच गई है और आने वाले सालों में इसमें तेजी के साथ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
ताइवान की सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनी ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) का इसमें बहुत ही बड़ा योगदान रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में TSMC का करीब 165 अरब डॉलर का रेवेन्यू हुआ था. यह उस देश की जीडीपी का करीब 20 फीसदी रहा था. बता दें कि इस कंपनी के द्वारा 2nm चिप की बड़ी संख्या में उत्पादन होता है, जो विश्व की सबसे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी मानी जाती है.
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साउथ कोरिया का भी दबदबा
ताइवान के अलावा साउथ कोरिया भी सेमीकंडक्टर चिप के मामले में दुनिया में अपना एक बड़ा खास स्थान रखता है. बता दें कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री और एआई इंडस्ट्री के बढ़ते प्रभाव की वजह से इन दोनों देशों ने हाल ही में भारतीय शेयर बाजार को दुनिया में पीछे छोड़ा था. मार्केट कैप के हिसाब से भारत का शेयर बाजार अभी 7वें स्थान पर है. वहीं, ताइवान पांचवें तो दक्षिण कोरिया छठे स्थान पर पहुंच गया है. साउथ कोरिया में मेमोरी चिप का प्रोडक्शन काफी अधिक मात्रा में होता है. इनका यूज मेमोरी सेव करने में किया जाता है. यहां कोरिया में सैमसंग और SK Hynix मेमोरी चिप मामले में बड़ी भूमिका है. यह देश अब एआई चिप और अगली पीढ़ी के सेमीकंडक्टर पर तेजी के साथ काम कर रहा है.

चीन, जापान और अमेरिका का भी बोलबाला
दुनिया में सेमीकंडक्टर चीप के मामले में ताइनाव और दक्षिण कोरिया के अलावा और भी कई देश हैं, जिनका अच्छा प्रोडक्शन है. इनमें चीन, जापान और अमेरिका के नाम शामिल हैं. चीन की बात करें तो सेमीकंडक्टर चीप मामले में यहां की कई कंपनियों की बड़ी भूमिका रही है. इनमें यांगतेज मेमोरी, एएमआईसी और हआवेई हाईसिलिकॉन कंपनियां शामिल हैं. चीन में सेमीकंडक्टर चीप का उत्पादन तो होता ही है, इसके साथ ही यहां दुनिया में सबसे अधिक सेमीकंडक्टर चीप का इस्तेमाल भी होता है. इलेक्ट्रिक सामानों को बनाने में चीन दुनिया का सबसे बड़ा हब माना जाता है. इस वजह से भी यहां पर सेमीकंडक्टर चीप का अधिक मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है.
जापान की बात करें तो यहां की तोक्यो इलेक्ट्रॉन, कैनन, निकॉन, तोशिबा और स्क्रीन जैसी कंपनियां सेमीकंडक्टर चीप बनाने का काम करती हैं. इसके अलावा जापान चिप बनाने वाले सामानों का एक बड़ा उत्पादक भी है. बात अब अमेरिका की करें तो यह सेमीकंडक्टर चीप व डिजाइन के मामले में खास है. यूएस की कंपनियां जैसे इंटेल, Micron और Global Foundries जैसी कंपनियों की बड़ी भूमिका है. हालांकि, यह देश सेमीकंडक्टर चीप उत्पादन के लिए ताइवान पर काफी निर्भर दिखता है.
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दुनिया और भारत में चिप की कितनी खपत?
दुनिया में सेमीकंडक्टर चीप की मांग दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है और इसमें भारत की भी खास भूमिका है. एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में दुनिया में सेमीकंडक्टर का बाजार करीब 627 अरब डॉलर का था. यह 2025 में बढ़कर करीब 697 अरब डॉलर का हो गया. रिसर्च और अनुमानों के मुताबिक, साल 2030 तक दुनिया में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री करीब 1 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी. इसमें सबसे अधिक भूमिका एआई में सेमीकंडक्टर चीप के इस्तेमाल की भी मानी जा रही है.
अब बात भारत की करें तो वित्त वर्ष 2024-25 में यहां सेमीकंडक्टर चीप का मार्केट करीब 50 अरब डॉलर का रहा है. वहीं, साल 2026 में इसके 80 अरब डॉलर का होने का अनुमान है, जो 2030 तक बढ़कर 100 अरब डॉलर से काफी अधिक हो सकता है. यहां बता दें कि भारत अपनी जरूरत की सेमीकंडक्टर चीप को ताइवान के अलावा दक्षिण कोरिया, चीन और वियतनाम से भी मंगाता है.

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सेमीकंडक्टर उद्योग का भारत में क्या भविष्य?
अब सेमीकंडक्टर उद्योग में भारत के भविष्य की बात करते हैं. नीति आयोग के अनुसार, सेमीकंडक्टर केवल औद्योगिक युक्तिकरण नहीं बल्कि अब यह देश की सुरक्षा, डिजिटल मजबूती, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेकर हेल्थ, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई मैन्युफैक्चरिंग समेत अन्य क्षेत्रों में काफी अहम हो गया है. आयोग की एक प्रेस रिलीज के अनुसार, भू-राजनीति, टेक्नोलॉजी में बदलाव और विश्वसनीय क्षमता प्रतिस्पर्धा से ग्लोबल सेमीकंडक्टर सप्लाई चैन के व्यापक होते स्वरूप के बीच भारत के लिए बड़े सेमीकंडक्टर बाजार से बदलकर वैश्विक मूल्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण केंद्र बनने का यह ऐतिहासिक अवसर है.
केंद्र सरकार के अलावा इस क्षेत्र के जानकार भी बताते हैं कि भारत में सेमीकंडक्टर को लेकर देश के भविष्य की बात करें तो यह बहुत ही उज्जवल और तेजी से विकसित होता दिख रहा है. भारत ने इसके लिए टारगेट भी सेट कर लिया है और आने वाले कुछ वर्षों में यह दुनिया में खुद को ग्लोबल सेमीकंडक्टर महाशक्ति बनने की ओर तेजी के साथ आगे बढ़ाता हुआ दिखेगा.

सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए भारत सरकार का रोडमैप
मई 2026 में सेमीकंडक्टर उद्योग को लेकर नीति आयोग ने भारत और सरकार के रोडमैप को जारी किया था. आयोग की एक प्रेस रिलीज के अनुसार, नीति आयोग ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत का पहला व्यापक 10 वर्षीय रोडमैप भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग का भविष्य जारी किया. इसके अनुसार, विकसित सेमीकंडक्टर क्षेत्र की इस भविष्य योजना में भारत के लिए वर्ष 2035 तक 120 से 150 अरब डॉलर की सेमीकंडक्टर मूल्य सीरीज के मैन्यूफैक्चरिंग के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक नजरिया प्रस्तुत किया गया.
इस मौके पर देश के आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था- सेमीकंडक्टर आर्थिक और तकनीकी नेतृत्व के आगामी युग को परिभाषित करेंगे. भारत इस यात्रा में भरोसेमंद भागीदार के तौर पर अपनी स्थिति सुदृढ बना रहा है. इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन द्वितीय चरण में डिजाइन हमारी सर्वोपरि प्राथमिकता है. हम भारतीय डिजाइन कंपनियों को पूर्ण समर्थन दे रहे हैं जिससे उनके इनोवेशन भारत में ही निर्मित और विस्तारित हो सकें.

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भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग पर पीएम मोदी की बड़ी बातें
मार्च 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के साणंद में Kaynes Semicon के प्लांट का शुभारंभ किया था. यह एक सेमीकंडक्टर प्लांट है. इसके उद्घाटन के साथ ही यहां मैन्यूफैक्चरिंग का काम शुरू हो गया. इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बड़ी बाते कही थी. प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, पीएम मोदी ने कहा – आज की यह उपलब्धि वास्तव में ‘Make in India, Make for the World’ (भारत में बनाओ, दुनिया के लिए बनाओ) के मंत्र को साकार करती है. यह प्लांट कैलिफोर्निया स्थित एक कंपनी को ‘इंटेलिजेंट पावर मॉड्यूल्स‘ की आपूर्ति कर रहा है और इसके उत्पादन का बड़ा हिस्सा पहले ही निर्यात के लिए बुक हो चुका है.
उन्होंने कहा कि साणंद और सिलिकॉन वैली के बीच असल में एक नया पुल बन गया है. पीएम मोदी ने जोर देकर कहा, “साणंद में बने ये मॉड्यूल्स अमरीकी कंपनियों तक पहुंचेंगे और वहां से पूरी दुनिया को ऊर्जा प्रदान करेंगे.” पीएम मोदी ने बताया कि भारत में सेमीकंडक्टर का मार्केट अभी करीब 50 बिलियन डॉलर का है और इस दशक के अंत तक इसे 100 बिलियन डॉलर से अधिक करने का अनुमान है.
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ग्लोबल मार्केट में एक भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लायर के रूप में अपना रोल और सशक्त कर रहा है. उन्होंने कहा कि 2021 में भारत ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन शुरू किया. यह मिशन सिर्फ एक इंडस्ट्रियल पॉलिसी नहीं है बल्कि यह भारत के आत्मविश्वास का ऐलान है. इस दशक में टेक्नोलॉजी से जुड़े जो पहल किए जा रहे हैं वो आने वाले दशकों में भारत की लीडरशिप को सशक्त करेंगे.
