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आत्मनिर्भर भारत की नई उड़ान: जानिए क्या है भारत का पहला 5th जनरेशन लड़ाकू विमान AMCA

by Sanjay Kumar Srivastava 28 May 2026, 8:44 PM IST
28 May 2026, 8:44 PM IST
आत्मनिर्भर भारत की नई उड़ान: जानिए क्या है भारत का पहला 5th जनरेशन लड़ाकू विमान AMCA

Indian Air Force: वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, यूक्रेन-रूस युद्ध और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों के बीच रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता किसी भी देश की संप्रभुता की सबसे बड़ी गारंटी बन गई है. इस बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत अपनी हवाई सीमाओं को अभेद्य बनाने के लिए अभूतपूर्व सैन्य परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है. रक्षा मंत्रालय की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना एडवांस्ड मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) इस रणनीतिक बदलाव के केंद्र में है. लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस की सफलता के बाद भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल होने की तैयारी कर रहा है, जिनके पास अपना स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है. ऑपरेशन सिन्दूर ने हाल ही में स्वदेशी तकनीक की ताकत को साबित किया है.

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क्या है AMCA?

एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA ) भारत का पहला स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है. यह 25 टन वर्ग का एक जुड़वां इंजन वाला मल्टीरोल लड़ाकू विमान है, जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के तहत एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा डिजाइन किया जा रहा है.

AMCA की मुख्य तकनीकी विशेषताएं

  • स्टील्थ टेक्नोलॉजी (रडार से छिपने की क्षमता): उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) की सबसे बड़ी खासियत इसका लो रडार क्रॉस-सेक्शन (आरसीएस) है. अपने खास डिजाइन और ‘इंटरनल वेपन बे’ (विमान के अंदर हथियार रखने की जगह) के कारण यह दुश्मन के एयर डिफेंस रडार को पूरी तरह से चकमा दे सकता है.
  • सुपरक्रूज क्षमता: यह विमान आफ्टरबर्नर चालू किए बिना भी ध्वनि की गति से भी तेज उड़ान भर सकता है, जिससे भारी ईंधन की बचत होती है और इसकी मारक क्षमता बढ़ जाती है.
  • उन्नत एवियोनिक्स और एईएसए रडार: यह स्वदेशी ‘एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे’ (AESA) रडार और डेटा फ्यूजन सिस्टम से लैस होगा, जो बहुत दूर से दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को ट्रैक करेगा.
  • मारक क्षमता: यह विमान ‘एस्ट्रा’ जैसी आधुनिक हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और सटीक दूरी तक मार करने वाले स्मार्ट बमों से लैस होगा.

देश की सुरक्षा में योगदान

वर्तमान में केवल अमेरिका (F-22, F-35), रूस (Su-57) और चीन (J-20) के पास ही 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं. चीन ने अपनी सीमाओं पर J-20 विमानों की तैनाती बढ़ा दी है और पाकिस्तान भी चीन से जेट खरीदने पर विचार कर रहा है. ऐसे दो मोर्चों के युद्ध से निपटने के लिए भारतीय वायुसेना को बड़ी संख्या में स्टील्थ लड़ाकू विमानों की जरूरत है. AMCA वायु सेना को ‘गहरी पैठ’ क्षमता प्रदान करेगा, जो रडार द्वारा पता लगाए बिना दुश्मन के वायु रक्षा नेटवर्क को जल्दी नष्ट करने में सक्षम होगा. इससे देश को रणनीतिक स्वायत्तता मिलेगी.

AMCA के लिए सरकार का रोडमैप

PM मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट समिति ने इस मेगा परियोजना के लिए 15,000 करोड़ की प्रारंभिक राशि को मंजूरी दी है. सरकार ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में बड़ा और ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव किया है. पहली बार AMCA प्रोजेक्ट के लिए सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की जगह निजी क्षेत्र को मुख्य भूमिका दी जा रही है.

सरकार की वर्तमान योजना

रक्षा मंत्रालय ने इस परियोजना के विकास और उत्पादन के लिए देश की तीन प्रमुख शॉर्टलिस्टेड निजी कंसोर्टियम कंपनियों को प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) जारी किया है.

  • दौड़ में निजी कंपनियां: इस दौड़ में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL के साथ साझेदारी में भारत फोर्ज, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के साथ साझेदारी में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) शामिल है.
  • समय सीमा: रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस सीमित समय सीमा में अगले 30 महीनों के भीतर पहला प्रोटोटाइप लॉन्च किया जा सकता है. विमान की पहली परीक्षण उड़ान 2028-2029 के बीच निर्धारित है और पूर्ण पैमाने पर उत्पादन 2035 तक शुरू होने की उम्मीद है.
  • दो चरणों में विकास (एमके-1 और एमके-2): वायुसेना की 6 स्क्वाड्रन (लगभग 120 विमान) खरीदने की योजना है. पहले दो स्क्वाड्रन AMCA Mk-1 संस्करण के होंगे, जिनमें अमेरिकी जनरल इलेक्ट्रिक F-414 इंजन का उपयोग किया जाएगा. बाद के चार स्क्वाड्रन अधिक उन्नत एएमसीए एमके-2 से लैस होंगे, जिसके लिए भारत फ्रांसीसी कंपनी सफ्रान के सहयोग से स्वदेशी रूप से शक्तिशाली 120 किलोन्यूटन (केएन) थ्रस्ट के साथ एक नया लड़ाकू इंजन विकसित कर रहा है.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में स्वदेशी और आधुनिक सैन्य प्रणालियों की भूमिका

मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच संक्षिप्त सैन्य संघर्ष आधुनिक भारतीय सैन्य इतिहास में एक प्रमुख मोड़ था. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले, जिसमें नागरिक मारे गए थे, के जवाब में, भारतीय बलों ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ नाम से एक अत्यधिक आक्रामक और सफल सैन्य अभियान शुरू किया. पहलगाम की पीड़ित महिलाओं के प्रतीकात्मक प्रतिशोध के रूप में इस ऑपरेशन को ‘सिंदूर’ नाम दिया गया था.

ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान को नुकसान

तत्कालीन वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने पुष्टि की थी कि इस त्वरित झड़प के दौरान भारतीय बलों ने पाकिस्तान के हवाई नेटवर्क को पूरी तरह से निष्क्रिय कर दिया था. 10 से 12 लड़ाकू विमान नष्ट हो गए (जिनमें F-16 और JF-17 जैसे प्रमुख विमान शामिल थे). इनमें से 5 विमानों को हवाई लड़ाई के दौरान हवा में मार गिराया गया और अन्य को जैकोबाबाद हवाई अड्डे के एक हैंगर में सटीक हथियारों से मार गिराया गया. पाकिस्तान का एक प्रमुख AWACS (हवाई निगरानी विमान) और एक C-130 परिवहन विमान भी नष्ट हो गया. पाकिस्तान में 270 किलोमीटर अंदर घुसकर 9 आतंकी कैंप और 11 सैन्य अड्डे, कमांड सेंटर और 4 रडार स्टेशन तबाह कर दिए गए.

स्वदेशी एवं आधुनिक हथियारों का योगदान

‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने साबित कर दिया कि भारत की हालिया रणनीतिक तैयारियां कितनी पुख्ता हैं. हालांकि भारत के पास राफेल और सुखोई-30 एमकेआई जैसे अग्रिम पंक्ति के विदेशी विमान थे, लेकिन बैकएंड सपोर्ट, मिशन कंप्यूटर और स्वदेशी हथियारों ने इस युद्ध की दिशा तय की. वायुसेना के तेजस लड़ाकू विमानों ने कॉम्बैट एयर पेट्रोलिंग में अहम भूमिका निभाई. सबसे ऐतिहासिक हवाई हमला ग्रुप कैप्टन अनिमेष पाटनी द्वारा किया गया था, जिन्होंने नव विकसित एस -400 मिसाइल प्रणाली की 40N6 मिसाइल दागी और लगभग 300-380 किलोमीटर की रिकॉर्ड दूरी से एक पाकिस्तानी सैन्य विमान को हवा में ही नष्ट कर दिया, जो वैश्विक इतिहास में सबसे लंबी दूरी की ‘सतह से हवा’ में मार करने वाली मार थी.

भारत की वायु सुदृढ़ीकरण नीति

रूस-यूक्रेन युद्ध और ड्रोन हमलों के बढ़ते चलन को देखते हुए भारत अपनी हवाई सीमाओं की सुरक्षा के लिए ‘बहुस्तरीय दृष्टिकोण’ अपना रहा है. तेजस के सफल परीक्षण के बाद भारत स्वदेशी लड़ाकू विमानों की एक पूरी शृंखला तैयार कर रहा है.

  • तेजस एमके-1ए और एमके-2: वायुसेना हल्के विमानों की कमी को पूरा करने के लिए 97 अधिक उन्नत तेजस एमके-1ए विमानों को शामिल कर रही है. इसके अतिरिक्त, एक भारी और अधिक शक्तिशाली तेजस एमके-2 विमान के विकास पर भी काम चल रहा है जो मिराज-2000 और मिग-29 विमानों की जगह लेगा.
  • ड्रोन और यूएवी का एकीकरण: हालांकि एलोन मस्क जैसी हस्तियों का मानना ​​है कि भविष्य केवल ड्रोन का है. जबकि भारतीय वायु सेना प्रमुख का स्पष्ट मानना है कि मानवयुक्त लड़ाकू विमान हमेशा प्रासंगिक रहेंगे. भारत अब मानवयुक्त विमान और मानवरहित वफादार विंगमैन ड्रोन (मानवयुक्त-मानवरहित टीमिंग) के संयोजन पर काम कर रहा है.
  • सुदर्शन चक्र एयर डिफेंस सिस्टम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के मुताबिक देश के महत्वपूर्ण नागरिक और सैन्य ढांचे को मिसाइल और हवाई हमलों से बचाने के लिए तीनों सेनाएं मिलकर ‘सुदर्शन चक्र एयर डिफेंस ग्रिड’ तैयार कर रही हैं, जो इजरायल के आयरन ड्रोन की तरह भारत के आसमान को अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान करेगा.

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भारत का वर्तमान रक्षा बजट (वित्त वर्ष 2026-27)

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत का कुल रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपये (7,84,678.3 करोड़ रुपये) आवंटित किया गया है. 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट में घोषित यह राशि सभी मंत्रालयों में सबसे अधिक है और केंद्र सरकार के कुल व्यय का लगभग 14.7% और देश की जीडीपी का लगभग 2% है. यह आवंटन पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) के बजटीय अनुमान से 15.19% अधिक है.

भारत का विदेशी विमान बाजार और आयात की स्थिति

हालांकि भारत ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत स्वदेशीकरण को बढ़ावा दे रहा है, लेकिन अपनी तात्कालिक सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत ने अतीत और वर्तमान में कई प्रमुख देशों से वायु प्रणाली और लड़ाकू विमान खरीदे हैं.

भारत इन देशों से खरीदता है सर्वाधिक रक्षा उपकरण

ऐतिहासिक रूप से और वर्तमान में भी रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा उपकरण आपूर्तिकर्ता है. भारतीय वायुसेना के बेड़े का एक बड़ा हिस्सा (जैसे सुखोई-30 एमकेआई और मिग-29 विमान) रूसी मूल का है. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में भारत ने किसी एक देश पर निर्भरता कम करने के लिए अपनी खरीदारी में विविधता लाई है और अब फ्रांस, अमेरिका और इजराइल से खरीदारी तेजी से बढ़ी है.

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इन देशों से खरीदे हैं विमान और हेलीकॉप्टर

फ्रांस: भारत ने हाल के वर्षों में फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन से अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमान खरीदे हैं, जो वायुसेना के सबसे घातक लड़ाकू विमान हैं. इससे पहले मिराज-2000 विमान भी फ्रांस से खरीदे गए थे.

रूस: वायुसेना का मुख्य आधार सुखोई Su-30 MKI विमान है, जिसे रूसी सहयोग से भारत में असेंबल किया गया था. इसके अलावा रूस से मिग-21, मिग-29 लड़ाकू विमान और मिल एमआई-17 ट्रांसपोर्ट हेलीकॉप्टर भी आए हैं.

अमेरिका: भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका से अत्याधुनिक टोही और परिवहन विमान खरीदे हैं, जिनमें सी-17 ग्लोबमास्टर III, सी-130जे सुपर हरक्यूलिस, पी-8आई पोसीडॉन (नौसेना के लिए समुद्री निगरानी के लिए) और अपाचे और चिनूक जैसे हमले और भारी लिफ्ट हेलीकॉप्टर शामिल हैं.

ब्रिटेन: पिछले दिनों भारत ने ब्रिटेन से जगुआर डीप अटैक एयरक्राफ्ट और हॉक एडवांस्ड जेट ट्रेनर एयरक्राफ्ट खरीदा था.

AMCA परियोजना सिर्फ लड़ाकू विमान बनाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भारत की संप्रभुता और रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक महाशक्ति बनने की दिशा में एक छलांग है. सार्वजनिक और निजी क्षेत्र का संयोजन, ऐतिहासिक रूप से 7.85 लाख करोड़ का उच्च रक्षा बजट, और ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ जैसी वास्तविक सैन्य सफलताओं से सीखे गए सबक साबित करते हैं कि भारत अब केवल हथियार आयातक होने के बजाय अपने दम पर अपने आसमान की रक्षा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है.

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