Home Latest News & Updates सियासतः जीतू-उमंग की जुगलबंदी, एक चला रहा साइकिल तो दूसरा विस्थापितों के हक के लिए उतरा तालाब में

सियासतः जीतू-उमंग की जुगलबंदी, एक चला रहा साइकिल तो दूसरा विस्थापितों के हक के लिए उतरा तालाब में

by Nitin Thakur 14 July 2026, 7:07 PM IST (Updated 14 July 2026, 7:10 PM IST)
14 July 2026, 7:07 PM IST (Updated 14 July 2026, 7:10 PM IST)
जीतू-उमंग की जुगलबंदी, एक चला रहा साइकिल, दूसरा विस्थापितों के हक के लिए उतरा तालाब में

MP Politics: मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों कांग्रेस की एक नई और बेहद आक्रामक जुगलबंदी देखने को मिल रही है. एक तरफ जहां मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी युवाओं और किसानों के हक के लिए सडक़ पर पसीना बहाते हुए साइकिल चला रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार जल जंगल जमीन की जंग लड़ रहे आदिवासियों और विस्थापितों के समर्थन में सीधे तालाब में उतर गए हैं.

युवा स्वाभिमान यात्रा का शंखनाद

बता दें कि मंगलवार को इंदौर से पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के नेतृत्व में युवा स्वाभिमान यात्रा का शंखनाद हुआ. पटवारी खुद साइकिल चलाकर सीहोर होते हुए भोपाल की तरफ बढ़ रहे हैं. यात्रा का मकसद है बेरोजगारी, चौपट शिक्षा व्यवस्था और लगातार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ युवाओं की आवाज बुलंद करना. इस साइकिल यात्रा को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी जोश है. बुधवार को यह यात्रा सीहोर में विशाल जनसभा करने के बाद भोपाल पहुंचेगी, जहां मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की तैयारी है.

तालाब में उतरे उमंग सिंघार

इसी जुगलबंदी के दूसरे हिस्से में छतरपुर जिले के कुपी में रूंझ मझगांय और केन बेतवा लिंक परियोजना के कारण उजड़ रहे विस्थापित परिवारों की चीख सुनने खुद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार पहुंचे. धार जिले की गंधवानी सीट से कद्दावर आदिवासी विधायक सिंघार ने सिर्फ पीडि़तों के आंसू ही नहीं पोंछे बल्कि वे जल सत्याग्रह कर रहे आदिवासियों, दलितों और किसानों के समर्थन में खुद तालाब में उतर गए.

भूख हड़ताल पर बैठे हैं पीड़ित

कुपी में अपनी पैतृक जमीन, घने जंगलों और अपने वजूद को बचाने के लिए प्रभावित परिवार पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं. सिंघार के वहां पहुंचने से यह अनशन स्थल अब एक बड़े आंदोलन का केंद्र बन चुका है. अनशनकारियों को संबोधित करते हुए उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि बिना किसी पुख्ता व्यवस्था और सही मुआवजे के गरीबों के आशियाने उजाडऩे वाली सरकार की तानाशाही अब नहीं चलेगी. विकास के नाम पर आदिवासियों और गरीबों के जल, जंगल, जमीन को छीना जा रहा है. यह लड़ाई अब सिर्फ कुपी तक सीमित नहीं रहेगी. हम सडक़ से लेकर विधानसभा के भीतर तक विस्थापितों के इस संवेदनशील मुद्दे को पूरी ताकत से उठाएंगे.

सरकार के लिए बढ़ेंगी मुश्किलें

केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण अपनी जमीन गंवा रहे ग्रामीणों को अब नेता प्रतिपक्ष के रूप में एक मजबूत आवाज मिल गई है. जय किसान आंदोलन के नेता अमित भटनागर और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के इस संयुक्त मोर्चे से आने वाले दिनों में प्रदेश सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी होना तय माना जा रहा है.

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