MP News : मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता यूसीसी को लेकर सियासत का पारा चढ़ गया है. राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विपक्ष पर हमला बोला है. मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा है कि कांग्रेस हर विषय को देशहित के बजाय केवल हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक के चश्मे से देखना बंद करें. साथ ही समान नागरिक संहिता पर अपना रुख स्पष्ट करें.
CM को सौंपी UCC की विस्तृत रिपोर्ट
विधानसभा परिसर में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कैलाश जोशी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने यह बातें कहीं. सीएम यादव ने कहा कि यूसीसी समिति ने मुझे विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है. इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय पर देश के सभी धर्मों के नागरिकों ने खुले मन से अपने विचार और सुझाव रखे हैं, लेकिन कांग्रेस अब तक इस पर चुप्पी साधे हुए है. चाहे यूसीसी हो या भोजशाला का मुद्दा कांग्रेस हमेशा तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति करती आई है. अब समय आ गया है कि जब उसे अपना स्टैंड साफ करना चाहिए.
9.58 लाख लोगों के सुझावों से तैयार हुआ महाड्राफ्ट
दरअसल, मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता की रूपरेखा तैयार करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने 13 जुलाई को मुख्यमंत्री को अपना अंतिम प्रतिवेदन सौंप दिया है. मुख्यमंत्री ने तय समय-सीमा में रिपोर्ट तैयार करने के लिए समिति के सदस्यों को धन्यवाद दिया. यह पूरी रिपोर्ट 3 खंडों में संकलित की गई है, जिसे तैयार करने के लिए जिला, राज्य और डिजिटल स्तर पर व्यापक जन परामर्श अभियान चलाया गया था. समिति को कुल 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जिनका प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार गहन विश्लेषण किया गया है.
आदिवासियों को दायरे से बाहर रखने की अनुशंसा
समिति द्वारा तैयार किए गए इस प्रस्तावित विधेयक में कुल 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां हैं. इस ड्राफ्ट की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण सिफारिश यह है कि इसमें प्रदेश के अनुसूचित जनजातियों यानी आदिवासी समुदाय को पूरी तरह से यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की अनुशंसा की गई है. समिति ने माना है कि आदिवासियों की अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं, प्रथाएं और रीति-रिवाज हैं, जिनका संरक्षण बेहद जरूरी है.
कांग्रेस के पाले में गेंद
अब जब यूसीसी का ड्राफ्ट सरकार की मेज पर आ चुका है तो इस पर सियासी घमासान और तेज होने के आसार हैं. आदिवासियों को बाहर रखने की सिफारिश से जहां सरकार ने एक बड़े वर्ग को साधने की कोशिश की है. वहीं, सीएम के तीखे बयानों के बाद अब देखना होगा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर क्या रणनीति अपनाती है.
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