Home राजनीति आपातकाल की 50वीं बरसी पर मोदी सरकार के मंत्रियों ने बयां किया दर्द, किसने क्या-क्या कहा?

आपातकाल की 50वीं बरसी पर मोदी सरकार के मंत्रियों ने बयां किया दर्द, किसने क्या-क्या कहा?

by Vikas Kumar 25 June 2025, 2:40 PM IST (Updated 27 June 2026, 11:22 AM IST)
25 June 2025, 2:40 PM IST (Updated 27 June 2026, 11:22 AM IST)
Modi Cabinet Ministers

आपातकाल की 50वीं बरसी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक्स पोस्ट के जरिए कांग्रेस को घेरा है.

Emergency: पीएम मोदी की कैबिनेट में शामिल नेताओं ने भी आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है. इस कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “‘आपातकाल’ कांग्रेस की सत्ता की भूख का ‘अन्यायकाल’ था. 25 जून 1975 को लगे आपातकाल में देशवासियों ने जो पीड़ा और यातना सही, उसे नई पीढ़ी जान सके, इसी उद्देश्य से मोदी सरकार ने इस दिन को ‘संविधान हत्या दिवस’ का नाम दिया. यह दिवस बताता है कि जब सत्ता तानाशाही बन जाती है, तो जनता उसे उखाड़ फेंकने की ताकत रखती है. आपातकाल कोई राष्ट्रीय आवश्यकता नहीं, बल्कि कांग्रेस और एक व्यक्ति की लोकतंत्रविरोधी मानसिकता का परिचायक था. प्रेस की स्वतंत्रता कुचली गई, न्यायपालिका के हाथ बाँध दिए गए और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया. देशवासियों ने ‘सिंहासन खाली करो’ का शंखनाद किया और तानाशाही कांग्रेस को उखाड़ फेंका. इस संघर्ष में बलिदान देने वाले सभी वीरों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि.”

राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी ने क्या कहा?

डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आज से पचास साल पहले भारतीय लोकतंत्र का आपातकाल के माध्यम से गला घोंटने का कुत्सित प्रयास किया गया था. आपातकाल को लोग आज भी भारतीय लोकतंत्र के सबसे काले अध्याय के रूप में याद रखते हैं. संविधान को दरकिनार करते हुए जिस तरीके से देश पर आपातकाल थोपा गया वह सत्ता के दुरुपयोग और तानाशाही का बहुत बड़ा उदाहरण है. तमाम विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया. ऐसी कोई संवैधानिक संस्था नहीं बची थी जिसका गलत इस्तेमाल न किया गया हो. मगर इस देश में जो लोकतांत्रिक परम्पराएं रही हैं उनको चाह कर भी तत्कालीन सरकार मिटा नहीं पायी. आज भारत में लोकतंत्र जीवित है, इसके लिए आपातकाल में जिन्होंने भी संघर्ष किया, जेल काटी और यातनाएं सहीं, उन सभी का बहुत बड़ा योगदान है. भारत की आने वाली पीढ़ियां उनका योगदान कभी भुला नहीं सकतीं. प्रधानमंत्री मोदी ने 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाने का निर्णय लिया है, ताकि हर देशवासी को स्मरण रहे कि तानाशाही कैसे लोकतंत्र की हत्या करने का प्रयास करती है.” सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पोस्ट में लिखा, “विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र को अक्षुण्ण रखने के लिए और लोकतंत्र को पुनर्स्थापित करने के लिए तानाशाही आपातकाल का प्रखर विरोध करने वाले सभी सत्याग्रहियों को वंदन.”

निर्मला सीतारमण और जेपी नड्डा क्या बोले?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक्स पोस्ट में लिखा, “आपातकाल “कानूनों के शस्त्रीकरण, न्यायिक स्वतंत्रता के हनन और कानून के शासन की अवहेलना के संयोजन के कारण हुआ. कांग्रेस में उन लोगों के लिए जिनके हाथों में हमारे संविधान की एक प्रति है – 50 साल बाद भारत उस अत्याचार को याद करता है.” बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने लिखा, “25 जून 1975 की आधी रात को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ‘आंतरिक अशांति’ का बहाना बनाकर भारत पर आपातकाल थोप कर देश के संविधान की हत्या कर दी थी. 50 वर्ष बाद भी कांग्रेस उसी मानसिकता के साथ चल रही है, उसकी नीयत आज भी वैसी ही तानाशाही वाली है.”

ये भी पढ़ें- आपातकाल को ‘काला अध्याय’ बताकर कांग्रेस पर बरसे बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री

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