Home Latest News & Updates गलत तरीके से रद्द हुआ पर्चा, मीनाक्षी नटराजन के समर्थन में उतरे कांग्रेस के दिग्गज, आयोग से मिला शिष्टमंडल

गलत तरीके से रद्द हुआ पर्चा, मीनाक्षी नटराजन के समर्थन में उतरे कांग्रेस के दिग्गज, आयोग से मिला शिष्टमंडल

by Sanjay Kumar Srivastava 10 June 2026, 1:48 PM IST (Updated 10 June 2026, 1:49 PM IST)
10 June 2026, 1:48 PM IST (Updated 10 June 2026, 1:49 PM IST)
गलत तरीके से रद्द हुआ पर्चा, मीनाक्षी नटराजन के समर्थन में उतरे कांग्रेस के दिग्गज

RS Nomination: कांग्रेस का शिष्टमंडल बुधवार को चुनाव आयोग से मिला. शिष्टमंडल ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश से पार्टी की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नॉमिनेशन पेपर गलत तरीके से खारिज कर दिए गए. केसी वेणुगोपाल, रणदीप सुरजेवाला, जयराम रमेश, दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा और अभिषेक सिंघवी जैसे पार्टी के बड़े नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मीनाक्षी नटराजन के साथ आयोग से मुलाकात की और मांग की कि इस फैसले को बदला जाए.

नटराजन के खिलाफ कोई मामला नहीं

उन्होंने तर्क दिया कि नटराजन के खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है क्योंकि किसी भी अदालत ने उनके खिलाफ दायर निजी शिकायत पर अभी तक संज्ञान नहीं लिया है. कांग्रेस के लीगल सेल के प्रमुख सिंघवी ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला वास्तव में खराब और पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण है.

सिंघवी ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा मीनाक्षी नटराजन के नॉमिनेशन पेपर को बेहद अजीब तरीके से खारिज किए जाने पर उन्होंने मंगलवार को नटराजन और कांग्रेस के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं से बात की. उन्होंने कहा कि देखने पर ही यह साफ तौर पर गैर कानूनी लगता है क्योंकि कानून की नजर में सुश्री नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है.

कहा- निजी शिकायत पर सिर्फ एक नोटिस

उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि किसी की निजी शिकायत में, जिसे कोई भी किसी के खिलाफ दर्ज करा सकता है, तब तक कोई आपराधिक मामला नहीं बनता जब तक कि मजिस्ट्रेट या संबंधित जज उस पर संज्ञान न ले लें. इस मामले में ज्यादा से ज्यादा यह हुआ है कि कोर्ट ने निजी शिकायत पर उन्हें सिर्फ़ एक नोटिस जारी किया है, जबकि कोर्ट ने अभी उस पर संज्ञान भी नहीं लिया है.

असल में कोर्ट द्वारा उनकी बात सुनने के बाद संज्ञान लेने का मुद्दा अभी तय होना बाकी है. तो फिर, उस आपराधिक मामले का सवाल ही कहां उठता है जिसके बारे में उन्हें जानकारी देनी थी? उन्होंने कहा कि यह भारतीय कानून व्यवस्था में अच्छी तरह से स्थापित है, जिसमें इस मुद्दे पर सीधे तौर पर हाईकोर्ट का एक फैसला भी शामिल है. यह मुमकिन नहीं है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और तटस्थ रुख अपनाया हो. वरना, कानून के हिसाब से उनका नॉमिनेशन रद्द होने का कोई कारण नहीं बनता.

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News Source: PTI

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