Home Latest News & Updates विधानसभा से पहले MLC चुनाव में होगा सीधा मुकाबला, शिक्षकों और स्नातकों की पसंद से मिलेगा 2027 का संकेत

विधानसभा से पहले MLC चुनाव में होगा सीधा मुकाबला, शिक्षकों और स्नातकों की पसंद से मिलेगा 2027 का संकेत

by Rajeev Ojha 2 June 2026, 1:33 PM IST
2 June 2026, 1:33 PM IST
विधानसभा से पहले MLC चुनाव में होगा सीधा मुकाबला, शिक्षकों और स्नातकों की पसंद से मिलेगा 2027 का संकेत

UP Politics: यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव टलने के बाद अब विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव का सेमी फाइनल माना जाने लगा है. इन 11 सीटों के चुनाव में यूपी के शिक्षकों और स्नातकों की पसंद का पता चलेगा. जाहिर है कि शिक्षक और स्नातक समाज की मुखर आवाज माने जाते हैं और सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं. ऐसे में यह चुनाव का परिणाम सियासी दलों को आईना दिखाने वाला होगा. विधान परिषद की इन 11 सीटों का चुनाव इसी साल दिसंबर में होना है. इसके सदस्यों का कार्यकाल छह साल होता है.

बीजेपी ने की 5 प्रत्याशियों की घोषणा

चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने सभी 11 सीटों से प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है, जबकि भाजपा ने अभी केवल पांच प्रत्याशियों की घोषणा की है. सभी पांचों प्रत्याशी मौजूदा एमएलसी हैं. इसमें स्नातक सीटों में लखनऊ से अवनीश कुमार सिंह और आगरा से डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह के अलावा शिक्षक सीटों में लखनऊ से उमेश द्विवेदी, बरेली-मुरादाबाद से डॉ. हरी सिंह ढिल्लो और मेरठ से श्रीचंद शर्मा प्रत्याशी बनाए गए हैं. भाजपा इस चुनाव में सभी 11 सीटें जीतने की कोशिश में है. इस कारण पिछला चुनाव जीतने वाले निर्दलीय एमएलसी को पार्टी में लाने की तैयारी है. आगरा शिक्षक सीट से निर्दल चुनाव जीते आकाश अग्रवाल के भाजपा में शामिल होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है.

वहीं गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) के एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी के भी भाजपा में शामिल होने की पूरी संभावना है. शर्मा गुट के ही नेता और पूर्व एमएलसी सुरेश त्रिपाठी के भी भाजपा में आने की चर्चा है. बताते हैं कि वे इस बार इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट से भाग्य आजमाना चाह रहे हैं.

भारतीय जनता पार्टी यूपी में लगातार तीसरी बार अपनी सरकार बनाने के लिए इस चुनाव के जरिए मनोवैज्ञानिक बढ़त लेने की कोशिश में है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जल्द ही सभी मंडलों का दौरा शुरू करने वाले हैं. शिक्षकों और स्नातकों को लुभाने के लिए सरकार कई मोर्चों पर काम भी कर रही है. सरकार ने यूपी में एक तरफ जहां सरकारी भर्तियों का पिटारा खोला है, वहीं शिक्षकों को कैशलेश इलाज की सुविधा देने का आदेश भी कर दिया है. इनमें निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षक भी शामिल हैं.

सपा ने भी आजमाए चेहरों पर लगाया दांव

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी विधान परिषद चुनाव में आजमाए हुए चेहरों पर ही दांव लगाया है. जिन पांच उम्मीदवारों की घोषणा पहले की गई थी, इनमें तीन मौजूदा सदस्यों को ही टिकट दिया गया है. वाराणसी शिक्षक सीट से मौजूदा एमएलसी लाल बिहारी यादव को फिर टिकट दिया गया है. इसी तरह इलाहाबाद-झांसी से डॉ. मान सिंह यादव, वाराणसी स्नातक सीट से आशुतोष सिन्हा को टिकट दिया गया है. लखनऊ स्नातक सीट से कांति सिंह को टिकट दिया गया है. कांति सिंह पिछला चुनाव हार गई थीं.

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक खंड से इस बार कमलेश कुमार को टिकट दिया गया है, जबकि पिछली बार अवधेश यादव को टिकट दिया गया था. सपा ने छह प्रत्याशियों के नाम की घोषणा बाद में की. इनमें लखनऊ शिक्षक सीट से सुनील कुमार पटेल, अलीगंज सीट से डॉ. चंद्र प्रकाश गुप्ता, मेरठ-गाजियाबाद सीट से नितिन कुमार तोमर, सहारनपुर सीट से परमेंद्र भाटी, बरेली-मुरादाबाद सीट से हाजी मोहम्मद दानिश अख्तर और आगरा से शशांक यादव शामिल हैं. सपा के सभी 11 प्रत्याशी चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं. सपा की कोशिश है कि इस चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करके सत्तारूढ़ भाजपा के सामने चुनौती पेश की जाए, जिससे अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में मनोवैज्ञानिक लाभ मिल सके.

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News Source: PTI

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