Home राज्यDelhi हादसे ने छीनी पढ़ाई, अदालत ने दिया सहारा: आर्यन को मिलेंगे 1.62 करोड़ रुपये, जानें क्या है पूरा मामला?

हादसे ने छीनी पढ़ाई, अदालत ने दिया सहारा: आर्यन को मिलेंगे 1.62 करोड़ रुपये, जानें क्या है पूरा मामला?

by Sanjay Kumar Srivastava
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हादसे ने छीनी पढ़ाई, अदालत ने दिया सहारा: आर्यन को मिलेंगे 1.62 करोड़ रुपये, जानें क्या है पूरा मामला?

Delhi Motor Accident Claims Tribunal: दुर्घटना के समय वाहन का बीमा था, इसलिए न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी द न्यू इंडिया कंपनी लिमिटेड को पूरी मुआवजा राशि जमा करने का निर्देश दिया.

Delhi Motor Accident Claims Tribunal: सड़क हादसे के कारण कोई भी काम न कर पाने वाले युवक को अदालत ने बड़ी राहत दी है. साथ ही लापरवाह वाहन चालकों को भी सख्त संदेश दिया है. अदालत ने युवक को 1.62 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया है. दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने जुलाई 2024 में एक सड़क दुर्घटना में 53 प्रतिशत दिव्यांगता से पीड़ित 21 वर्षीय युवक को 1.62 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा दिया है. युवक द्वारा दायर याचिका पर न्यायाधिकरण अध्यक्ष विक्रम सुनवाई कर रहे थे. 1 जुलाई 2024 को आर्यन राणा घर जा रहा था, तभी एक तेज रफ्तार बस ने पीछे से उसकी स्कूटी को टक्कर मार दी. उसे गंभीर चोटें आईं और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया.

अदालत ने माना वाहन चालक की लापरवाही

आरोपियों ने मामले में झूठा फंसाए जाने का दावा किया था, लेकिन इस संबंध में कोई शिकायत दर्ज नहीं की थी. इसके अलावा बस के कंडक्टर ने गवाह के रूप में बयान दिया कि दुर्घटना वाले दिन याचिकाकर्ता की स्कूटी टक्कर मारने वाली बस से आगे थी और जब बस ने स्कूटी को ओवरटेक किया, तो बस उससे टकरा गई. 6 जनवरी को दिए गए फैसले में ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह माना जाता है कि दुर्घटना करने वाले वाहन के चालक की लापरवाही और गैरजिम्मेदारी, जो स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, न केवल इस दुर्घटना के लिए बल्कि उसके बाद होने वाली हर चीज के लिए भी जिम्मेदार थी. ट्रिब्यूनल ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता को चिकित्सकीय रूप से 53 प्रतिशत दिव्यांग प्रमाणित किया गया था. दुर्घटना के समय वह 21 वर्ष का था और विश्वविद्यालय का प्रथम वर्ष का छात्र था. युवक दुर्घटना के कारण अपनी शिक्षा जारी नहीं रख सका.

युवक काम करने में अक्षम

ट्रिब्यूनल ने कहा कि याचिकाकर्ता जिस प्रकार की दिव्यांगता से पीड़ित है, उससे पता चलता है कि याचिकाकर्ता कभी भी काम करके कमाई करने में सक्षम नहीं होगा. उसकी शारीरिक दिव्यांगता में थोड़ा सुधार हो सकता है, लेकिन वह कभी भी ऐसी नहीं होगी जिससे वह कमा सके. इसलिए यह मानना ​​उचित होगा कि याचिकाकर्ता की कार्यात्मक दिव्यांगता 90 प्रतिशत है. ट्रिब्यूनल ने उसे विभिन्न मदों के तहत 1.62 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा दिया, जिसमें 1.62 करोड़ रुपये भी शामिल हैं. भविष्य की आय के नुकसान के लिए 59.36 लाख रुपये. चूंकि दुर्घटना के समय वाहन का बीमा था, इसलिए न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी द न्यू इंडिया कंपनी लिमिटेड को पूरी मुआवजा राशि जमा करने का निर्देश दिया.

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News Source: Press Trust of India (PTI)

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