Home Latest News & Updates शर्मसार हुई इंसानियत : दिल्ली में आठ महीने से बंधक थे बच्चे, रोजाना मिलते थे सिर्फ 10 रुपए, पुलिस ने कराया आजाद

शर्मसार हुई इंसानियत : दिल्ली में आठ महीने से बंधक थे बच्चे, रोजाना मिलते थे सिर्फ 10 रुपए, पुलिस ने कराया आजाद

by Sanjay Kumar Srivastava 29 October 2026, 8:20 PM IST (Updated 29 October 2026, 8:22 PM IST)
29 October 2026, 8:20 PM IST (Updated 29 October 2026, 8:22 PM IST)
दिल दहला देने वाली खबर: दिल्ली में 8 महीने से बंधक थे बच्चे, रोजाना मिलते थे सिर्फ 10 रुपए, प्रशासन ने कराया आजाद

Child Labour: देश की राजधानी में इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है. पूर्वी दिल्ली के व्यस्त गांधी नगर इलाके में चल रहे ‘चाइल्ड लेबर रैकेट’ का भंडाफोड़ करते हुए प्रशासन ने 19 मासूम बच्चों को नरक जैसी फैक्ट्रियों से मुक्त कराया है. दिल को झकझोर देने वाली बात यह है कि इन मासूमों से दिन-रात कमरतोड़ काम कराने के बदले रोजाना महज 10 रुपए की भीख दी जा रही थी. छुड़ाए गए बच्चों की उम्र 10 से 17 साल के बीच है, जिनमें 14 साल से कम उम्र के 5 बेबस बच्चे और एक बच्ची भी शामिल है. उन्हें उत्तर प्रदेश और बिहार के गरीब परिवारों से बहला-फुसलाकर लाया गया था और पिछले 8 महीनों से उन्हें बंधक बनाकर रखा गया था.

9 फैक्ट्री मालिक गिरफ्तार

सरकारी अधिकारियों, दिल्ली पुलिस और ‘एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन’ (AVA) ने एक गुप्त सूचना के आधार पर जब इन फैक्ट्रियों पर अचानक धावा बोला, तो वहां का मंजर देखकर टीम के होश उड़ गए. तंग और अंधेरे कमरों में 15 बच्चे सिलाई-कढ़ाई के जानलेवा काम में जुटे थे, जबकि 4 बच्चे आर्टिफिशियल ज्वेलरी की पैकिंग कर रहे थे. इस बड़ी छापेमारी में एक्शन लेते हुए 9 फैक्ट्री मालिकों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनकी फैक्ट्रियों को सील कर दिया गया है. पुलिस अब इस पूरे रैकेट की जड़ों को खंगाल रही है कि आखिर इन मासूमों को दिल्ली लाकर बेचने वाले असली गुनहगार कौन हैं.

नहीं मिलता था भोजन

पूछताछ के दौरान पता चला कि 2 बच्चे रोज सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक काम करते थे. रात को फैक्ट्री के अंदर ही सोते थे और अगली सुबह फिर काम पर लग जाते थे. आरोप है कि बच्चों को हर हफ्ते 20 से 200 रुपये के बीच भुगतान किया जाता था. सबसे छोटे बच्चे, जो 10 साल का लड़का है, को दिन के सिर्फ 10 रुपये मिलते थे. वह इन पैसों से स्नैक्स और चॉकलेट खरीदता था, क्योंकि उसे खाने के लिए कोई भोजन नहीं दिया जाता था.

सभी को भेजा गया बाल गृह

FIR के अनुसार, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, श्रम विभाग, दिल्ली पुलिस, AVA, बेसिक फाउंडेशन और बाल विकास धारा की एक संयुक्त टीम ने ये छापे मारे. AVA के राष्ट्रीय समन्वयक धनंजय टिंगल ने बताया कि बच्चों को उनके घरों से बहुत दूर ले जाया गया था और उनसे उनका बचपन छीन लिया गया था. AVA के एक बयान के अनुसार, बचाए गए बच्चों की मेडिकल जांच कराई गई और फिर बाल कल्याण समिति के निर्देश पर उन्हें एक बाल गृह भेज दिया गया. गांधी नगर पुलिस स्टेशन में फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और मामले की आगे की जांच चल रही है.

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