- दिल्ली से शालिनी झा की रिपोर्ट
Delhi Yamuna : दिल्ली में यमुना नदी की सफाई और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने ‘मिशन यमुना’ के तहत 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं का उद्देश्य यमुना नदी में गिरने वाले प्रदूषित पानी को रोकना, सीवेज सिस्टम को आधुनिक बनाना और राजधानी में जल प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना है.
नजफगढ़ ड्रेन को किया जा रहा साफ
सरकार की ओर से सबसे अधिक फोकस नजफगढ़ ड्रेन की सफाई पर है. नजफगढ़ ड्रेन को यमुना प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है, क्योंकि राजधानी का बड़ा हिस्सा इसी ड्रेन के जरिए प्रदूषित पानी यमुना में पहुंचाता है. लंबे समय से इस ड्रेन की सफाई और इसके आसपास की सीवेज व्यवस्था को सुधारने की मांग उठती रही है. अब सरकार ने बड़े स्तर पर ड्रेजिंग, गाद हटाने और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल की योजना तैयार की है, ताकि ड्रेन में जमा कचरा और जहरीले अपशिष्ट को कम किया जा सके.
STP को किया जाएगा अपग्रेड
इसके अलावा राजधानी के कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) को अपग्रेड करने की भी योजना बनाई गई है. पुराने और क्षमता से कम काम कर रहे एसटीपी की वजह से बड़ी मात्रा में बिना उपचारित गंदा पानी यमुना में पहुंच रहा था. नई परियोजनाओं के तहत इन प्लांट्स की क्षमता बढ़ाई जाएगी और आधुनिक तकनीकों को शामिल किया जाएगा, जिससे पानी को बेहतर तरीके से साफ किया जा सके. सरकार का दावा है कि इससे यमुना में गिरने वाले प्रदूषित पानी की मात्रा में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा.
किया जाएगा डिजिटल सिस्टम विकसित
‘मिशन यमुना’ के तहत मॉडर्न वाटर मैनेजमेंट सिस्टम पर भी जोर दिया जा रहा है. इसके अंतर्गत ड्रेनेज नेटवर्क को मजबूत करना, सीवर लाइन की निगरानी के लिए डिजिटल सिस्टम विकसित करना और जल निकासी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना शामिल है. अधिकारियों का कहना है कि नई तकनीकों की मदद से लीकेज, ओवरफ्लो और अवैध डिस्चार्ज जैसी समस्याओं पर तेजी से नियंत्रण पाया जा सकेगा.
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सार्वजनिक स्वास्थ्य पर रहेगा जोर
दिल्ली सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के जरिए सिर्फ यमुना की सफाई ही नहीं, बल्कि राजधानी में पर्यावरण संतुलन और सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाया जा सकेगा. यमुना नदी लंबे समय से प्रदूषण, झाग और गंदगी की समस्या से जूझ रही है. हर साल छठ पूजा और अन्य मौकों पर नदी की खराब स्थिति चर्चा का विषय बनती रही है. ऐसे में सरकार की यह पहल राजधानी के लिए एक बड़े पर्यावरणीय अभियान के रूप में देखी जा रही है.
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बजट मंजूर करने से समस्या का समाधान नहीं होगा. परियोजनाओं को तय समय पर पूरा करना, एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और लगातार निगरानी बेहद जरूरी होगी. अब देखना होगा कि ‘मिशन यमुना’ जमीन पर कितना असर दिखा पाता है और क्या दिल्लीवासियों को आने वाले समय में एक साफ और प्रदूषण मुक्त यमुना देखने को मिल पाएगी.
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