Assam UCC Bill: असम सरकार ने सोमवार को विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पेश किया. पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर अतुल बोरा ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की तरफ से विधानसभा में ‘द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, 2026 बिल’ पेश किया गया. कांग्रेस, रायजोर दल और तृणमूल कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों ने इस कदम का विरोध किया और इसे पेश करने से पहले सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ अच्छी तरह सलाह-मशविरा करने की मांग की. अगर यह बिल पास होता है तो असम UCC लागू करने वाला तीसरा राज्य बन जाएगा.
अनुसूचित जनजाति पर लागू नहीं होगा UCC
सीएम सरमा ने बिल में ‘ऑब्जेक्ट और कारणों के स्टेटमेंट’ में कहा, “बिल का मकसद शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप को कंट्रोल करने वाले कानूनों को मजबूत और आसान बनाना है.” उन्होंने आगे कहा कि शादी के लिए, बिल में पुरुषों और महिलाओं के लिए कम से कम उम्र क्रमशः 21 साल और 18 साल तय की गई है और एक से ज्यादा शादी पर रोक लगाई गई है. हालांकि, बिल में कहा गया है कि यह असम में रहने वाली किसी भी अनुसूचित जनजाति पर लागू नहीं होगा.
इससे पहले, 13 मई को मुख्यमंत्री सरमा के दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट मीटिंग हुई थी. तब सरकार ने घोषणा की थी कि 21 से 26 मई तक चलने वाले मौजूदा विधानसभा सत्र के दौरान कानून पेश किया जाएगा.
कानून के पांच खास पहलू
राज्य सरकार के मुताबिक, ड्राफ्ट बिल को असम की खास विविधता और सामाजिक ताने-बाने के हिसाब से बनाया गया है. यह नया कानून खास तौर से समाज से जुड़े इन पांच नियमों को बदलेगा.
एक से ज्यादा शादी नहीं कर सकते: राज्य में एक से ज़्यादा शादी की प्रथा पर पूरी तरह से कानूनी रोक होगी.
शादी की उम्र: शादी के लिए महिला की उम्र 18 साल और पुरुष की उम्र 21 साल होनी चाहिए.
तलाक और निकाह का रजिस्ट्रेशन: सभी शादियों और तलाक को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करना जरूरी होगा.
बेटियों के लिए बराबर अधिकार: पुश्तैनी प्रॉपर्टी और विरासत के मामलों में महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार मिलेगा.
लिव-इन रिलेशनशिप की कानूनी जवाबदेही: लिव-इन रिलेशनशिप, यानी बिना शादी के साथ रहने वाले जोड़ों के लिए कड़े नियम लागू होंगे और रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा. ऐसे रिश्तों से पैदा हुए बच्चों को औपचारिक रूप से मान्यता और सुरक्षा दी जाएगी.
