Delhi News : दिल्ली के राजौरी गार्डन विधानसभा क्षेत्र के विष्णु गार्डन में एक बार फिर रिहायशी इलाके में कथित तौर पर संचालित जींस फैक्ट्रियों को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. इलाके के निवासियों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से मकानों के बीच फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिससे न केवल लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है बल्कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हैं. लोगों का कहना है कि कई बार पुलिस और प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका.
कई इकाइयों को किया गया था सील
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, एक साल पहले विधायक और वर्तमान मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की पहल पर इलाके की कई फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी और कई इकाइयों को सील भी कर दिया गया था. हालांकि, अब लोगों का दावा है कि इनमें से कई फैक्ट्रियां दोबारा संचालित होने लगी हैं. उनका कहना है कि कार्रवाई के बाद कुछ समय तक स्थिति सामान्य रही, लेकिन धीरे-धीरे फिर से पहले जैसी गतिविधियां शुरू हो गईं.
इलाके में बढ़ा अपराध
लाइव टाइम्स की टीम जब ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए विष्णु गार्डन पहुंची तो अधिकांश स्थानीय लोग कैमरे पर बोलने से बचते नजर आए. उनका कहना था कि खुलकर बोलने पर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, एक स्थानीय निवासी ने कैमरे पर अपनी बात रखते हुए दावा किया कि इलाके में लगातार अपराध बढ़ा है और कई परिवार सुरक्षा कारणों से अपना घर छोड़कर दूसरे इलाकों में चले गए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी लोगों में चिंता बनी हुई है. स्थानीय निवासी ने यह भी कहा कि कई बार पुलिस से शिकायत की गई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई.

तीन मंजिला इमारत के अंदर पहुंची LT टीम
ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान लाइव टाइम्स की टीम एक तीन मंजिला फैक्ट्री के भीतर भी पहुंची. टीम ने देखा कि अलग-अलग मंजिलों पर उत्पादन का काम चल रहा था. एक हिस्से में मजदूर काम कर रहे थे, जबकि दूसरी तरफ कुछ लोग बैठे हुए थे. टीम ने मौके पर मौजूद लोगों से फैक्ट्री के संचालन, लाइसेंस और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर सवाल पूछे. रिपोर्टिंग के दौरान परिसर में बिजली के एक कथित अवैध कनेक्शन को लेकर भी सवाल उठाए गए. जब टीम ने ऊपरी मंजिल पर जाने की कोशिश की तो वहां मौजूद लोगों ने दरवाजा बंद कर दिया और आगे जाने की अनुमति नहीं दी. पूछे गए सवालों का भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया.
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पहचान पत्र संदिग्ध प्रतीत हुआ
फैक्ट्री के भीतर मौजूद कुछ मजदूरों से उनकी पहचान से जुड़े दस्तावेज भी दिखाने को कहा गया. इस दौरान एक व्यक्ति द्वारा दिखाया गया पहचान पत्र संदिग्ध प्रतीत हुआ. टीम के अनुसार, दस्तावेज का डिजिटल सत्यापन करने की कोशिश की गई, लेकिन उसका सत्यापन नहीं हो सका. संबंधित व्यक्ति ने खुद को मेरठ का निवासी बताया. हालांकि, वह अपनी पहचान से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सका. बातचीत के दौरान उसे हिंदी समझने और बोलने में भी कठिनाई होती दिखाई दी. लाइव टाइम्स स्वतंत्र रूप से यह पुष्टि नहीं कर सका कि संबंधित व्यक्ति की वास्तविक पहचान क्या है या उसके दस्तावेज वैध थे अथवा नहीं. इस संबंध में सक्षम सरकारी एजेंसियों की आधिकारिक जांच और पुष्टि आवश्यक है.
अवैध फैक्ट्रियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए
इस पूरे मामले में स्थानीय लोगों की मांग है कि रिहायशी इलाके में चल रही कथित अवैध फैक्ट्रियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, वहां काम कर रहे लोगों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो संबंधित विभाग सख्त कार्रवाई करे. वहीं, इस मामले में पुलिस, प्रशासन और संबंधित विभागों का पक्ष भी लिया जाना जरूरी है ताकि पूरे मामले की तस्वीर सभी पक्षों के साथ सामने आ सके.
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- दिल्ली से शालिनी झा की रिपोर्ट
