Gujarat Police: गुजरात को ड्रग्स मुक्त बनाने की दिशा में गुजरात पुलिस ने बड़ा और अहम फैसला लिया है. राज्य के पुलिस महानिदेशक ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने अब प्रदेश के प्रत्येक जिले और शहर में डेडिकेटेड ‘एंटी नारकोटिक्स विंग’ यानी ANW स्थापित करने के आदेश दिए हैं. इन सभी यूनिट्स को अगले 7 दिनों के भीतर पूरी तरह कार्यरत करने के निर्देश दिए गए हैं. गुजरात पुलिस ड्रग्स माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है. गुजरात की लंबी समुद्री सीमा को देखते हुए राज्य में ड्रग्स की तस्करी रोकना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है. इसी दिशा में अब जिला और शहर स्तर पर एंटी नारकोटिक्स विंग को मजबूत किया जा रहा है.अब तक शहर और जिलों में LCB, SOG और स्थानीय पुलिस की टीमें नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों पर कार्रवाई करती थीं.
SP की निगरानी में काम करेगी ANW
ANW के गठन के बाद इन टीमों के अतिरिक्त एक अलग और विशेषज्ञ यूनिट ड्रग्स से जुड़े मामलों पर काम करेगी. पिछले पांच वर्षों में गुजरात पुलिस ने NDPS एक्ट के तहत 3,700 से अधिक मामले दर्ज कर 5,346 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इस दौरान करीब 13,600 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य और 1.36 लाख किलोग्राम से ज्यादा ड्रग्स जब्त किया गया है. पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई के जरिए अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी नेटवर्क पर भी बड़ा प्रहार किया गया है. नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक ANW यूनिट में कुल 8 पुलिस अधिकारी-कर्मचारी तैनात किए जाएंगे. जिसमें 1 पुलिस इंस्पेक्टर,1 पुलिस सब इंस्पेक्टर, 2 ASI/हेड कांस्टेबल, 4 पुलिस कांस्टेबल होंगे. जिला स्तर पर ANW सीधे पुलिस अधीक्षक (SP) की निगरानी में काम करेगी.
‘स्पेशलाइज्ड टास्क फोर्स’ के तौर पर काम करेगा विंग
वहीं अहमदाबाद शहर में 2, सूरत शहर में 2, वडोदरा शहर में 1 और राजकोट शहर में 1 यूनिट जॉइंट/एडिशनल सीपी के सुपरविजन में काम करेगी. एंटी नारकोटिक्स विंग को ‘स्पेशलाइज्ड टास्क फोर्स’ के तौर पर काम करना होगा. इसका मुख्य और विशेष फोकस सिर्फ NDPS से जुड़े अपराधों पर रहेगा. ANW के पुलिसकर्मियों को दूसरी पुलिसिंग या गैर-नारकोटिक्स ड्यूटी नहीं सौंपी जाएगी. राज्य स्तर की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स यानी ANTF द्वारा चिह्नित ड्रग्स पेडलर्स और हॉटस्पॉट्स पर ANW लगातार निगरानी रखेगी. इसके साथ ही ड्रग्स के आदतन अपराधियों के खिलाफ PIT-NDPS के तहत निरोधात्मक कार्रवाई के लिए CID क्राइम को प्रस्ताव भेजे जाएंगे.
‘ड्रग रिवॉर्ड पॉलिसी’ भी लागू
ANW के गठन के बावजूद स्थानीय पुलिस स्टेशनों को अपने क्षेत्र में NDPS मामलों की तलाश और कार्रवाई जारी रखनी होगी. खास बात यह है कि ANW की जांच के दौरान अगर स्थानीय पुलिस की लापरवाही या निष्क्रियता सामने आती है, तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. गुजरात पुलिस ने ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई को प्रोत्साहित करने के लिए ‘ड्रग रिवॉर्ड पॉलिसी’ लागू की है। इसके तहत ड्रग्स नेटवर्क का पता लगाने वाले पुलिसकर्मियों और मुखबिरों को प्रोत्साहन दिया जाता है. वहीं जान जोखिम में डालकर महत्वपूर्ण कार्रवाई करने वाले पुलिस जवानों के लिए ‘आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन’ की नीति भी लागू की गई है.
राज्यभर के नशामुक्ति केंद्र बनेंगे आधुनिक
ड्रग्स तस्करी के आधुनिक नेटवर्क को पकड़ने के लिए गुजरात पुलिस ने AI आधारित ‘NARIT’ सॉफ्टवेयर भी तैयार किया है. इसके जरिए डार्क वेब, वित्तीय लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शनों की पड़ताल कर वैज्ञानिक तरीके से जांच को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है. इसका उद्देश्य ड्रग्स मामलों में जांच की गुणवत्ता और अदालतों में कन्विक्शन रेट को बेहतर करना है. गुजरात सरकार की रणनीति सिर्फ ड्रग्स माफियाओं पर कार्रवाई तक सीमित नहीं है. नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए राज्यभर के नशामुक्ति केंद्रों को आधुनिक बनाने, बेहतर काउंसलिंग और उपचार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है. कुल मिलाकर, गुजरात पुलिस का यह नया कदम ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई को जिला और शहर स्तर तक और अधिक संगठित, विशेषज्ञ और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.
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