Home Latest News & Updates राज्यपाल ने शैलेश मटियानी शैक्षिक पुरस्कार से शिक्षकों को किया सम्मानित, कहा- राष्ट्र का चरित्र गढ़ता है अध्यापक

राज्यपाल ने शैलेश मटियानी शैक्षिक पुरस्कार से शिक्षकों को किया सम्मानित, कहा- राष्ट्र का चरित्र गढ़ता है अध्यापक

by Mayank Rai 5 September 2026, 5:32 PM IST (Updated 5 September 2026, 5:40 PM IST)
5 September 2026, 5:32 PM IST (Updated 5 September 2026, 5:40 PM IST)
राष्ट्र का चरित्र गढ़ता है अध्यापक, शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार से सम्मानित हुए शिक्षक

Shailesh Matiyani Award: राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने शिक्षक दिवस के अवसर पर शनिवार को लोक भवन में आयोजित शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार समारोह में वर्ष 2025 के लिए चयनित 19 शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को सम्मानित किया. राज्यपाल ने सभी सम्मानित शिक्षकों को पुरस्कार प्रदान कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं.

विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ संस्कार भी देता है शिक्षक

इस अवसर पर शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक केवल एक पेशे से जुड़ा व्यक्ति नहीं, बल्कि पीढ़ियों को दिशा देने वाला और राष्ट्र के भविष्य को गढ़ने वाला मार्गदर्शक होता है. शिक्षक विद्यार्थियों को ज्ञान देने के साथ संस्कार देता है, उनकी प्रतिभा को पहचानता है और उन्हें जीवन की सही दिशा दिखाता है. उन्होंने कहा कि हजारों शिक्षकों के बीच चयनित होकर यह सम्मान प्राप्त करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है. राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि उसकी कक्षा के कितने विद्यार्थियों ने अच्छे अंक प्राप्त किए. शिक्षक की वास्तविक सफलता तब है, जब किसी सामान्य परिवार का बच्चा आगे बढ़कर देश की पहचान बने और यह कहे कि सपने देखना और उन्हें पूरा करने का विश्वास उसे अपने गुरु से मिला. उन्होंने कहा कि विद्यार्थी के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानना, उसमें आत्मविश्वास जगाना और आगे बढ़ने का साहस देना शिक्षक का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है.

हिन्दी साहित्य के संवेदनशील कथाकार थे मटियानी

राज्यपाल ने कहा कि हिन्दी साहित्य के संवेदनशील कथाकार शैलेश मटियानी ने पहाड़ के सामान्य जन के जीवन, संघर्ष और संवेदनाओं को अपनी लेखनी के माध्यम से सशक्त स्वर दिया. उनके नाम पर प्रदान किया जाने वाला यह पुरस्कार शिक्षकों के समर्पण, संघर्ष, संवेदनशीलता और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी का सम्मान है. राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि बच्चों में सोचने, समझने, प्रश्न करने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना है. भविष्य की शिक्षा में तकनीक की शक्ति और शिक्षक की संवेदना का समन्वय आवश्यक है. तकनीक सीखने के नए अवसर उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उन अवसरों का सही दिशा में उपयोग कराने का कार्य शिक्षक ही करेगा.

विद्यार्थियों में आत्मविश्वास जगाएं शिक्षक

इस मौके पर राज्यपाल ने कहा कि बच्चों को आधुनिक ज्ञान के साथ अपनी जड़ों से जोड़ना भी शिक्षकों का महत्वपूर्ण दायित्व है. हमारी लोकसंस्कृति, पर्यावरण, परंपराएं और हिमालयी जीवन-पद्धति हमारी अमूल्य विरासत हैं. आधुनिक शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना का समन्वय बच्चों को आत्मविश्वासी, संवेदनशील और संतुलित व्यक्तित्व प्रदान कर सकता है. राज्यपाल ने कहा कि विद्यालय ऐसा स्थान होना चाहिए, जहां बच्चा भय से नहीं, उत्साह से आए और प्रश्न पूछना कमजोरी नहीं, बल्कि सीखने की शुरुआत माना जाए. प्रत्येक बच्चे को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए. बच्चों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस देना शिक्षकों की जिम्मेदारी है. उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों को विषयगत ज्ञान के साथ जीवन जीने की कला, ज्ञान के साथ संस्कार, सफलता के साथ संवेदनशीलता और ‘राष्ट्र सर्वापरि’ का भाव भी सिखाएं. उन्होंने कहा कि एक सच्चा शिक्षक विद्यार्थी को अज्ञान से ज्ञान और निराशा से आशा की ओर ले जाता है.

हिन्दी साहित्य को समृद्ध करने में मटियानी का रहा महत्वपूर्ण योगदान

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार करीब 70 हजार शिक्षकों में से 19 शिक्षकों का चयन करना चुनौतीपूर्ण कार्य है. उन्होंने सभी चयनित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके उत्कृष्ट कार्य और शिक्षा के प्रति समर्पण का प्रमाण है. उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार प्रसिद्ध साहित्यकार एवं कथाकार शैलेश मटियानी के नाम पर प्रदान किया जाता है.

शैलेश मटियानी ने हिन्दी साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और 100 से अधिक पुस्तकों की रचना की. उन्होंने कहा कि प्रदेश के विद्यालयी पुस्तकालयों में शैलेश मटियानी की प्रमुख कृतियों को उपलब्ध कराया जाएगा ताकि विद्यार्थी उनके साहित्य और लेखन से परिचित हो सकें तथा उत्तराखण्ड की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सकें. इस अवसर पर अपर सचिव राज्यपाल रीना जोशी, अपर सचिव शिक्षा नमामि बंसल, महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोंडे सहित शिक्षक विभाग के अन्य अधिकारी एवं शिक्षक शिक्षिकाएं उपस्थित रहे.

सम्मानित होने वाले शिक्षक

प्रारंभिक शिक्षा श्रेणी (कुल 12 शिक्षक)

विष्णुपाल सिंह नेगी (जनपद पौड़ी गढ़वाल), लखपत सिंह रावत (जनपद चमोली), पृथ्वी सिंह रावत (जनपद उत्तरकाशी), वीरेंद्र सिंह रावत (जनपद देहरादून), रोबिन कुमार (जनपद हरिद्वार), महेश्वर प्रसाद सेमवाल (जनपद टिहरी), शशिकांत नौटियाल (जनपद रुद्रप्रयाग), जहीर अब्बास (जनपद चंपावत), नौ सिंह (जनपद ऊधमसिंह नगर), डॉ. श्वेता मजगांई (जनपद नैनीताल), विक्रम सिंह परिहार (जनपद पिथौरागढ़), त्रिलोक सिंह अधिकारी (जनपद अल्मोड़ा)।

माध्यमिक शिक्षा श्रेणी (कुल 06 शिक्षक)

नरेंद्र सिंह नेगी (जनपद पौड़ी गढ़वाल), डॉ. सुमन ध्यानी शर्मा (जनपद चमोली), डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव (जनपद देहरादून), कमलेश पंवार (जनपद हरिद्वार) नवीन चंद्र पंत (जनपद चंपावत), विशन सिंह मेहता,जनपद नैनीताल

प्रशिक्षण संस्थान श्रेणी (कुल 01 शिक्षक)

डॉ. सुबोध सिंह बिष्ट ,जनपद उत्तरकाशी

विशेष सम्मान (राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता)

मंजूबाला ,जनपद चंपावत

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