- हरियाणा से शालू मिरोक की रिपोर्ट
Dera Sacha Sauda : डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है. वह 30 दिन की पैरोल पर मंगलवार सुबह 6.30 बजे रोहतक की सुनारिया जेल से निकला और करीब सवा 9 बजे सिरसा डेरे पहुंच गया. उसके काफिले में टोयोटा लैंड क्रूजर, फॉर्च्यूनर लिजेंडर जैसी 8 महंगी गाड़ियां शामिल थीं.
16वीं बार मिली पैरोल
साध्वियों के यौन उत्पीड़न में उम्रकैद की सजा काट रहे राम रहीम की ये 16वीं पैरोल या फरलो है. इस साल के पहले 5 महीनों में ही वह दूसरी बार जेल से बाहर आया है. जनवरी-2026 में उसे 40 दिन की पैरोल मिली थी और वह फरवरी में ही वापस जेल लौटा था. वर्ष 2017 में सजा होने के बाद डेरा प्रमुख को इससे पहले 16 बार पैरोल और फरलो मिल चुकी.
रोहतक जेल प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए राम रहीम को सुबह जल्दी जेल से बाहर भेजा, ताकि भीड़ एकत्रित न हो पाए. सिरसा डेरे में राम रहीम के काफिले की एंट्री पिछले गेट से हुई. डेरामुखी के सिरसा पहुंचने के बाद पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है.
भगवंत सिंह स्यालका का विरोध
एसजीपीसी सदस्य एडवोकेट भगवंत सिंह सियालका ने डेरा सिरसा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल मिलने के मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. मीडिया से बातचीत करते हुए स्यालका ने कहा कि राम रहीम को पैरोल देना सिखों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला फैसला है. उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के आरोप लगे हों और जो हत्या एवं दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों में सजा काट रहा हो, उसे बार-बार पैरोल देना सरकारों की मंशा पर सवाल खड़े करता है.
बेअदबी मामले भी आए सामने
स्यालका ने कहा कि राम रहीम और उसके डेरा से जुड़े कई लोगों के नाम बेअदबी मामलों में सामने आए हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकारें उसे विशेष सुविधाएं दे रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों ने मिलकर अकाली दल के खिलाफ माहौल बनाया, लेकिन अब वही सरकारें राम रहीम के प्रति नरमी दिखा रही हैं.
उन्होंने कहा कि राम रहीम से जुड़े मामलों को फरीदकोट से चंडीगढ़ ट्रांसफर करना भी एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था. स्यालका ने आरोप लगाया कि इस व्यक्ति के लिए विशेष कानूनी प्रावधान किए गए और उसकी सजा से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए गए. उन्होंने कहा कि आम कैदियों पर लागू होने वाले नियम राम रहीम पर लागू नहीं किए जा रहे.
मनोहर लाल खट्टर पर साधा निशाना
एसजीपीसी सदस्य ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने सिख मामलों में हस्तक्षेप करते हुए अलग हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाई, जबकि पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी हरियाणा के गुरुद्वारों, स्कूलों और कॉलेजों को हर साल करोड़ों रुपये की सहायता देती थी.
स्यालका ने कहा कि जब भी देश में चुनाव आते हैं, उसी समय राम रहीम को पैरोल दे दी जाती है, जिससे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जाती है. उन्होंने इस मामले को सरकारों के ‘दोहरे मापदंड’ बताते हुए कहा कि एक तरफ बंदी सिंहों को रिहाई नहीं दी जाती, जबकि दूसरी तरफ गंभीर अपराधों में सजा काट रहे लोगों को बार-बार पैरोल दी जाती है.
रिहाई के लिए हो रही है संघर्ष
उन्होंने भाई बलवंत सिंह राजोआना और अन्य बंदी सिंहों का जिक्र करते हुए कहा कि शिरोमणि कमेटी लगातार उनकी रिहाई के लिए संघर्ष कर रही है. उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ भी इस मामले को लेकर बैठक हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया है.
शिरोमणि अकाली दल के नेता और पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने विरोध दर्ज करवाया. उन्होंने कहा कि राम रहीम को बार-बार पैरोल मिलना ये दर्शाता है कि उसके लिए कानून अलग है, जबकि आम लोगों के लिए कानून कुछ और है.
दोनों राज्यों की सरकार की मिलीभगत
उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को निशाने पर लेते हुए कहा कि भगवंत मान को इस मामले पर जवाब देना चाहिए कि पंजाब में दर्ज मामलों में राम रहीम के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही. मजीठिया ने आरोप लगाया कि केंद्र और हरियाणा की बीजेपी सरकार राम रहीम को बचाने की कोशिश कर रही है और इस मामले में हरियाणा सरकार और पंजाब सरकार की मिलीभगत भी साफ नजर आ रही है. एक कैदी होने के बावजूद राम रहीम को खास सुविधाएं और स्पेशल प्रिविलेज दिए जा रहे हैं, जो आम कैदियों को नहीं मिलते. उन्होंने कहा कि इस मामले में बीजेपी और आम आदमी पार्टी दोनों को जनता के सामने सच्चाई रखनी पड़ेगी. मजीठिया ने दावा किया कि ये पूरा मामला राजनीतिक सहयोग और प्रभाव के कारण हो रहा है, जिससे लोगों का कानून पर भरोसा कम हो रहा है.
आजीवन कारावास की मिली है सजा
दरअसल, दोषी राम रहीम 25 अगस्त, 2017 से जेल में हैं, जब उन्हें साध्वियों के यौन उत्पीड़न से संबंधित दो मामलों में 20 साल की कैद की सजा सुनाई गई थी। 17 जनवरी 2019 को उन्हें पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. हालांकि, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा के राम रहीम को बरी कर दिया था। मगर, कोर्ट ने 3 आरोपियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की सजा को बरकरार रखा है.
इसके अलावा अक्टूबर 2021 में, सीबीआई कोर्ट ने डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके तीन साल बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में भी डेरा प्रमुख को बरी कर दिया था.
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