Kalyan Banerjee: पश्चिम बंगाल में 15 सालों तक सत्ता में रहीं पार्टी टीएमसी इस समय बड़े संकट से जूझ रही है. विधानसभा चुनाव हारने के बाद जनता तो क्या खुद नेता भी ममता बनर्जी का हाथ छोड़ रहे हैं. हर दिन एक नई बगावत देखने को मिल रही है और इस्तीफों का सिलसिला जारी है. पार्टी टूटने और बागी गुट बन जाने के बाद अब ममता बनर्जी के सबसे चहीते सांसद कल्याण बनर्जी ने भी बगावत कर दी है. उन्होंने ममता दीदी को अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी और खुद में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया है.
‘भतीजे को चुनों या मुझे’
कल्याण बनर्जी ने खुद को अभिषेक के खिलाफ फर्जी हस्ताक्षर केस से अलग करते हुए कहा कि वे अब अभिषेक बनर्जी का केस नहीं लड़ेंगे. कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी से अपील करते हुए कहा, “मैंने साफ-साफ कह दिया है कि मैं अब अभिषेक बनर्जी के साथ नहीं रहूंगा. मैं उनके साथ काम भी नहीं करूंगा. उन्होंने मेरे साथ बदतमीजी की है, जिसे मैं कभी बर्दाश्त नहीं करूंगा. मैं ममता बनर्जी से साफ-साफ कहता हूं कि या तो अभिषेक को तृणमूल कांग्रेस में रखें और हमें पार्टी छोड़ने दें या हमें TMC में रखें और अभिषेक को पार्टी से निकाल दें.”
VIDEO | Kolkata: “I told Derek to tell Mamata choose between Abhishek Banerjee or a worker like me”, says TMC MP Kalyan Banerjee (@KBanerjee_AITC).
— Press Trust of India (@PTI_News) June 11, 2026
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क्यों नाराज हुए कल्याण बनर्जी
कल्याण बनर्जी का बयान डूबती हुई टीएमसी के लिए और जोर का धक्का है. कल्याण बनर्जी ने साफ तौर पर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. दरअसल, कल्याण बनर्जी अभिषेक के खिलाफ चल रहे फर्जी हस्ताक्षर मामले में उनके वकील के तौर लड़ रहे थे. अगली सुनवाई के लिए आज की तारीख तय की गई थी. उन्होंने कहा कि- मैं उनके केस के लिए तैयारी कर रहा था, लेकिन कल रात उन्होंने मेरे बेटे को फोन किया और कहा कि अब उनका पक्ष कोई और वकील रखेगा, जो पेशे में मुझसे बहुत जूनियर है. यह अभिषेक बनर्जी का अहंकार और बदतमीजी है. मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूंगा.”
कमजोर होती टीएमसी
टीएमसी के तीन राज्यसभा सांसदों ने लगातार इस्तीफा दे दिया है. आज प्रकाश चिक बराइक ने पार्टी और पद छोड़ने का ऐलान किया. इससे पहले राज्यसभा MP सुष्मिता देव ने भी बुधवार को पार्लियामेंट और पार्टी से इस्तीफा दे दिया. सोमवार को, राज्यसभा MP सुखेंदु शेखर रे ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया और बाद में पार्टी लीडरशिप के साथ मतभेदों का हवाला देते हुए तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के अपने फैसले की घोषणा की. पिछले हफ्ते, पार्टी के 80 में से 58 विधायक आधिकारिक तौर पर विधायक दल से अलग हो गए. यह संकट बाद में संसद तक फैल गया, जिसमें काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 से ज्यादा बागी लोकसभा सांसदों ने खुद को टीएमसी से अलग कर लिया और बीजेपी को समर्थन देने का दावा किया. ममता बनर्जी के लिए संकट दिन-प्रतिदिन और भी बड़ा होता जा रहा है. उनकी पार्टी धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही और उनके सभी चहेते नेता उनका साथ छोड़ रहे हैं.
हर दिन नया इस्तीफा! TMC के राज्यसभा MP प्रकाश बराइक ने छोड़ा पद, अब दीदी के साथ बस इतने नेता
