Home Latest News & Updates नमामि गंगे की बड़ी कामयाबी: UP का सुरहा ताल बना भारत की 100वीं रामसर साइट, शोधित जल के उपयोग पर जोर

नमामि गंगे की बड़ी कामयाबी: UP का सुरहा ताल बना भारत की 100वीं रामसर साइट, शोधित जल के उपयोग पर जोर

by Nikul Patel 3 July 2026, 12:47 PM IST (Updated 4 July 2026, 10:22 AM IST)
3 July 2026, 12:47 PM IST (Updated 4 July 2026, 10:22 AM IST)
नमामि गंगे की बड़ी कामयाबी: उत्तर प्रदेश का सुरहा ताल बना भारत की 100वीं रामसर साइट, शोधित जल के पुनः उपयोग पर जोर

Namami Gange Mission: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के तहत गठित 19वीं एम्पावर्ड टास्क फोर्स (ETF) की बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई. बैठक में नमामि गंगे मिशन के तहत अब तक हुए कार्यों, चल रही परियोजनाओं और भविष्य की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई. इस दौरान गंगा और उसकी सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने, जैव-विविधता संरक्षण तथा शोधित जल के पुनः उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में बताया गया कि नमामि गंगे मिशन के तहत अब तक कुल 524 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिनकी कुल लागत 43,030 करोड़ रुपये है. इनमें से 355 परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं.

सीवेज प्रबंधन को मजबूत बनाने पर चर्चा

सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से गंगा और उसकी सहायक नदियों में प्रदूषण कम करने, सीवेज प्रबंधन को मजबूत बनाने और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर बनाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है. बैठक के दौरान विशेष रूप से आगरा और वाराणसी में स्थापित आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की प्रगति की समीक्षा की गई. अधिकारियों ने बताया कि ये अत्याधुनिक संयंत्र गंगा और यमुना नदी में बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. इससे न केवल नदी का जल अधिक स्वच्छ हो रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है. बैठक में शोधित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया.

करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है गंगा

सरकार का मानना है कि उपचारित पानी का दोबारा उपयोग जल संरक्षण के लिए बेहद आवश्यक है और इससे प्राकृतिक जल स्रोतों पर दबाव कम होगा. इसके साथ ही गंगा की अविरलता बनाए रखने और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए विभिन्न योजनाओं की भी समीक्षा की गई. जैव-विविधता संरक्षण को लेकर भी बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई. नदी से जुड़े आर्द्रभूमि क्षेत्रों (वेटलैंड्स) के संरक्षण, प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने तथा राष्ट्रीय जलीय जीव गंगा डॉल्फिन के संरक्षण के लिए चल रहे प्रयासों की प्रगति का आकलन किया गया. अधिकारियों ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है, इसलिए इसकी जैव-विविधता को सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.

जनअभियान बना नमामि गंगे मिशन

बैठक की एक प्रमुख उपलब्धि के रूप में उत्तर प्रदेश के सुरहा ताल को भारत की 100वीं रामसर साइट घोषित किए जाने का उल्लेख किया गया. यह उपलब्धि देश में आर्द्रभूमि संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है. रामसर साइट का दर्जा मिलने से सुरहा ताल के संरक्षण, जैव-विविधता संवर्धन और पर्यावरणीय महत्व को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है. बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि नमामि गंगे मिशन अब केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी पर आधारित एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान बन चुका है.

नदी संरक्षण में बढ़ रही लोगों की भागीदारी

नदी संरक्षण में आम नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों, स्थानीय निकायों और विभिन्न सरकारी एजेंसियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, जिससे गंगा को स्वच्छ और अविरल बनाए रखने के प्रयासों को मजबूती मिली है. सरकार ने दोहराया कि आने वाले समय में भी गंगा और उसकी सहायक नदियों की स्वच्छता, जल संरक्षण, सीवेज प्रबंधन, जैव-विविधता संरक्षण और शोधित जल के पुनः उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. साथ ही यह संकल्प भी दोहराया गया कि गंगा की निर्मलता और अविरलता को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अमूल्य प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता बना रहेगा.

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