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UCC पर आर-पारः भोपाल में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा मंथन, 17 को दिल्ली में महाआंदोलन का ऐलान

by Nitin Thakur 14 September 2026, 6:35 PM IST
14 September 2026, 6:35 PM IST
UCC पर आर-पार, भोपाल में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा मंथन, 17 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर महाआंदोलन का ऐलान

UCC: यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC को लेकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सियासी और धार्मिक हलचल तेज हो गई है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की भोपाल के खानूगांव में हुई अहम बैठक के बाद मुस्लिम धर्मगुरुओं और नेताओं ने UCC के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है. शहर काजी मुश्ताक अली नदवी और कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने साफ कहा है कि मुस्लिम समाज को UCC किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है. उन्होंने 17 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान भी किया है.

पर्सनल लॉ में दखल बर्दाश्त नहीं

भोपाल के खानूगांव कैंपस में हुई ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक के बाद बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में UCC के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी गई. शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने दोटूक शब्दों में कहा कि देश का संविधान धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की गारंटी देता है, ऐसे में पर्सनल लॉ में किसी भी तरह का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. शहर काजी ने अपने बयान में संघ के पूर्व सरसंघ चालक एमएस गोलवलकर के 1972 के एक भाषण का हवाला देकर नया मोड़ ला दिया.

देश की एकता के लिए सिविल कोड जरूरी नहीं

उन्होंने कहा कि गोलवलकर ने भी माना था कि देश की एकता के लिए सिविल कोड जरूरी नहीं है. काजी साहब ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो हुकूमतें अल्पसंख्यकों पर जुल्म करती हैं, उनका सूरज गुरूब यानी अस्त हो जाता है और उनका सफीना यानी जहाज डूब जाता है. यूसीसी के समर्थन में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की दी जा रही दलीलों पर पलटवार करते हुए शहर काजी ने कहा कि इस्लाम ने बहुत पहले ही मां, बेटी, पत्नी और जायदाद के हक में महिलाओं को पूरे अधिकार दिए हैं. इसलिए इस मुद्दे को पर्सनल लॉ के दायरे में ही समझा जाना चाहिए. वहीं बोर्ड के सदस्य और कांग्रेस नेता आरिफ मसूद ने 17 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले बड़े आंदोलन का ऐलान किया.

सुप्रीम कोर्ट तक मजबूती से लड़ने की तैयारी

उन्होंने मुस्लिम समाज के साथ-साथ देश के सभी सेक्युलर नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की. इसके साथ ही मसूद ने वकीलों और समाज के लोगों से अपील की कि वे बिना सोचे-समझे अलग से कोई कानूनी याचिका न लगाएं क्योंकि बोर्ड की पूरी लीगल टीम इस लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट तक मजबूती से लडऩे का ड्राफ्ट तैयार कर चुकी है. भोपाल से उठी यह आवाज अब 17 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर गूंजने वाली है. बोर्ड ने इसे सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक और कानूनी लड़ाई करार दिया है. अब देखना होगा कि सरकार इस विरोध पर क्या रुख अपनाती है.

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