Gold Price Falls: सोना खरीदने वालों के लिए सोमवार की शुरुआत थोड़ी मायूस करने वाली रही. अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिकवाली बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच घरेलू बाजार में सोने की कीमत में गिरावट देखने को मिली. दिल्ली के सर्राफा बाजार में 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना 500 रुपये फिसलकर 1,55,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. इससे पहले शुक्रवार को सोना 1,55,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था. हालांकि, चांदी ने इस दौरान सोने से अलग रुख दिखाया. चांदी की कीमत 2,34,600 रुपये प्रति किलोग्राम, पर टिकी रही.
ग्लोबल मार्केट में सोने पर दबाव
सोने की कीमतों में ये कमजोरी सिर्फ भारतीय बाजार तक नहीं रही. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गोल्ड पर दबाव देखने को मिला. स्पॉट गोल्ड करीब 57.22 डॉलर यानी 1.3 फीसदी गिरकर 4,291.71 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया. वहीं चांदी में करीब 3 फीसदी की बड़ी गिरावट आई. ये 62.82 डॉलर प्रति औंस पर आ गई. इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म मडरेक्स के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत के मुताबिक, सोना करीब 4,300 डॉलर प्रति औंस और चांदी करीब 64 डॉलर के स्तर तक फिसल गई है. दोनों की कीमतों में ये लगातार तीसरे हफ्ते की गिरावट है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजहों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें भी शामिल हैं. निवेशक फेड रेट हाइक को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति बना रहे हैं.
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तेल बना परेशानी
सोने और चांदी पर दबाव बढ़ाने वाला एक बड़ा फैक्टर इस समय कच्चा तेल है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर करीब 103 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई. ये पिछले चार महीनों का नया हाई लेवल है. सऊदी अरब की ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन को ड्रोन हमलों के बाद बंद किए जाने की खबर के बीच कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आई. इससे महंगाई को लेकर चिंता और बढ़ गई है. जब तेल महंगा होता है तो पूरी अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है. ऐसे में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने या दरों में बढ़ोतरी करने पर विचार कर सकते हैं. इसका असर सोने की मांग पर भी पड़ सकता है.
फेड के फैसले पर टिकी नजर
महंगे तेल ने अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर तस्वीर को और पेचीदा बना दिया है. ऑस्ट्रेलिया एंड न्यूज़ीलैंड बैंकिंग ग्रुप यानी ANZ ने मार्च 2027 तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से 25 बेसिस प्वाइंट की तीन ब्याज दर बढ़ोतरी का अनुमान जताया है. बैंक का मानना है कि मिडिल ईस्ट में तनाव और हाई एनर्जी प्राइस महंगाई को बढ़ा सकती हैं. हालांकि, दूसरी तरफ अगर मिडिल ईस्ट का तनाव ऐसे ही बना रहता है तो सोने की सेफ हेवन एसेट वाली मांग भी मजबूत हो सकती है. यानी सोने के लिए फिलहाल तस्वीर थोड़ी अलग है.
फिर भी गोल्ड पर बुलिश
मौजूदा गिरावट के बावजूद ANZ ने सोने को लेकर अपना 12 महीने का लक्ष्य 5,400 डॉलर प्रति औंस रखा है. बैंक के मुताबिक गोल्ड ETF होल्डिंग्स में सुधार, सट्टेबाज़ी में बढ़ोतरी, चीन में संस्थागत मांग और भारत में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी सोने की मांग को सपोर्ट कर सकती है. इसका मतलब साफ है कि अभी सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव भले ही जारी हो, लेकिन लॉन्ग टर्म में इसके लिए कुछ मजबूत सपोर्टिंग फैक्टर मौजूद हैं. निवेशकों के लिए फिलहाल कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी डॉलर, फेड की ब्याज दरों और मिडिल ईस्ट के हालात पर नजर रखना बहुत जरूरी है.
News Source: PTI
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