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16 साल बाद मिला न्याय: चालक के परिवार को 24.05 लाख का मुआवजा, ट्रक कंपनी को ठहराया जिम्मेदार

by Sanjay Kumar Srivastava
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16 साल बाद मिला न्याय: ठाणे ट्रिब्यूनल ने मृतक टैंकर चालक के परिवार को दिया 24.05 लाख का मुआवजा, ट्रक कंपनी को ठहराया जिम्मेदार

Thane Tribunal: ठाणे में टैंकर चालक के परिवार को 16 साल बाद न्याय मिला है. ठाणे ट्रिब्यूनल ने मृतक टैंकर चालक के परिवार को 24.05 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है.

Thane Tribunal: ठाणे में टैंकर चालक के परिवार को 16 साल बाद न्याय मिला है. ठाणे ट्रिब्यूनल ने मृतक टैंकर चालक के परिवार को दिया 24.05 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है. ट्रिब्यूनल ने ट्रक कंपनी को जिम्मेदार ठहराया है. फैसले से पीड़ित परिवार को काफी राहत मिली है.ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी के तर्क को खारिज कर दिया. कोर्ट ने टैंकर चालक की मौत पर ट्रक कंपनी को जिम्मेदार ठहराया है. ठाणे में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) ने लगभग 16 साल पहले सड़क दुर्घटना में मारे गए 26 वर्षीय टैंकर चालक के परिवार को 24.05 लाख रुपये का मुआवजा दिया है. दोषी ट्रक की बीमा कंपनी ने दावे का विरोध करते हुए तर्क दिया था कि 2010 में दुर्घटना के लिए 2020 में याचिका दायर की गई थी.

18 अप्रैल, 2010 की है घटना

कंपनी ने कहा कि यह दावा काफी समय बीतने के बाद किया गया, जिसका कोई मतलब नहीं है. इसमें ट्रक को पीछे से टक्कर मारने के लिए टैंकर चालक की ओर से लापरवाही का भी आरोप लगाया गया. हालांकि, एमएसीटी सदस्य आरवी मोहिते ने 5 मार्च को पारित आदेश में इन दलीलों को खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के उदाहरणों का हवाला देते हुए ट्रिब्यूनल ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम में 2019 संशोधन (दावे दाखिल करने के लिए छह महीने की सीमा लगाने) का अप्रैल 2022 से पहले होने वाली दुर्घटनाओं पर पूर्वव्यापी प्रभाव नहीं पड़ता है. घटना 18 अप्रैल, 2010 की है, जब फिरोज सिद्दीक अहमद शेख (उर्फ खान) एक रासायनिक टैंकर को लेकर झांसी की ओर जा रहा था. इस दौरान महाराष्ट्र के ठाणे जिले में मुंबई-आगरा राजमार्ग पर शाहपुर में कलांब गांव के पास आगे चल रहे एक ट्रक ने बिना किसी सिग्नल के अचानक ब्रेक लगा दिया जिससे टैंकर ट्रक से टकरा गया और सारा माल जल गया.

शेख की पत्नी और मां को मिलेगी राशि

हादसे में शेख जलने से घायल हो गया और उसी दिन उसकी मौत हो गई. ट्रिब्यूनल ने शेख की अनुमानित आय 12,000 रुपये प्रति माह आंकी और 24,05,800 रुपये का मुआवजा देते हुए भविष्य की संभावनाओं के लिए 40 प्रतिशत जोड़ा, जिसमें निर्भरता, कंसोर्टियम, संपत्ति और अंतिम संस्कार के खर्चों का नुकसान भी शामिल था. कोर्ट ने ट्रक के मालिक और उसके बीमाकर्ता को याचिका की तारीख (2020) से दावेदारों को 9 प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज के साथ संयुक्त रूप से और अलग-अलग राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया. आदेश में कहा गया है कि मुआवजे को शेख की पत्नी और मां के बीच विभाजित किया जाएगा. इसके अलावा राशि के कुछ हिस्से को सावधि जमा में रखा जाएगा, जो भविष्य में काम आएगा.

ये भी पढ़ेंः CAA पर सुप्रीम कोर्ट में अंतिम जंग: 5 मई से शुरू होगी निर्णायक सुनवाई, CJI की पीठ एक हफ्ते में तय करेगी भविष्य

News Source: PTI

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