Home राज्यमहाराष्ट्र Women Safety : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिया महिलाओं के प्रति नजरिया बदलने पर जोर

Women Safety : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिया महिलाओं के प्रति नजरिया बदलने पर जोर

by Arsla Khan 3 September 2024, 6:34 PM IST (Updated 18 August 2025, 10:40 AM IST)
3 September 2024, 6:34 PM IST (Updated 18 August 2025, 10:40 AM IST)
Women Safety: President Draupadi Murmu stressed on changing the attitude towards women

Women Safety In India : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (President Droupadi Murmu) ने मुंबई में संबोधन के दौरान महिलाओं के प्रति नजरिया बदलने की बात कही है.

03 September, 2024

Women Safety In India: पिछले कुछ महीनों के दौरान महिलाओं पर अत्याचार की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ-साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (President Droupadi Murmu) भी चिंता जता चुकी हैं. ताजा मामले में राष्ट्रपति ने मंगलवार को एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति हमें नजरिया बदलने की जरूरत है. मुंबई में महाराष्ट्र विधान परिषद के शताब्दी समारोह में अपने संबोधन में द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत की आधी आबादी महिलाओं की है और देश को आगे ले जाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में उनकी सक्रिय भागीदारी आवश्यक है.

कोलकाता में हुए दुष्कर्म का भी किया जिक्र

उन्होंने कहा कि महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक प्रगति के बगैर देश का विकास उस तरह से नहीं हो सकता जैसा होना चाहिए. इस मौके पर राष्ट्रपति ने जोर देकर यह भी कहा कि महिलाओं को देखने के तरीके को बदलने की आवश्यकता है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की यह टिप्पणी महिलाओं के खिलाफ अपराध के हाल के मामलों की पृष्ठभूमि में आई है. इसमें कोलकाता के एक सरकारी अस्पताल में एक जूनियर डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या शामिल है, जिससे बड़े पैमाने पर आक्रोश फैल गया है.

‘खुलेआम घूमते रहते हैं अपराधी’

इस मौके पर उन्होंने महान मराठा योद्धा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज की मां वीरमाता जीजाबाई और महिला शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले के योगदान की सराहना की. यहां पर बता दें कि पिछले दिनों भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश में महिला अपराध को लेकर चिंता जताई थी. इतना ही नहीं, उन्होंने यहां तक कहा था कि साधन संपन्न लोग अपराध करने के बाद भी बेखौफ और खुलेआम घूमते रहते हैं. वहीं, जो लोग उनके अपराधों से पीड़ित होते हैं, वे डरे-सहमे रहते हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि गांवों के गरीब लोग अदालत जाने से डरते हैं.

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