Home Latest News & Updates एक ही दिन में फूटा बागी नेताओं की एकता का गुब्बारा, लीडरशिप को लेकर ऋतब्रत से भिड़े उनके ही विधायक

एक ही दिन में फूटा बागी नेताओं की एकता का गुब्बारा, लीडरशिप को लेकर ऋतब्रत से भिड़े उनके ही विधायक

by Neha Singh 5 June 2026, 2:11 PM IST (Updated 5 June 2026, 4:40 PM IST)
5 June 2026, 2:11 PM IST (Updated 5 June 2026, 4:40 PM IST)
Ritabrata Group Chaos

Ritabrata Group Chaos: टीएमसी में इस समय गजब का राजनीतिक खेल देखने को मिल रहा है. 58 बागी विधायकों के TMC पर कब्जा करने के एक दिन बाद ही ऋतब्रत बनर्जी के लीडरशिप वाले बागी खेमे में बेचैनी के संकेत दिखने लगे हैं. पार्टी में फूट पड़ने के बाद बागी नेताओं की एकता का गुब्बारा भी फूट गया है. कुछ विधायकों ने ऋतब्रत द्वारा ममता बनर्जी को केवल सलाहकार बनाए जाने का विरोध किया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि ममता बनर्जी सुप्रीम लीडर बनी रहें और चेतावनी दी कि अगर उन्हें सिर्फ एक एडवाइजर बना दिया गया तो वे ग्रुप में अपनी जगह पर फिर से सोच सकते हैं.

बागी फिर कर सकते हैं बगावत

नए नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के लीडरशिप में बागी लेजिस्लेचर ग्रुप की मीटिंग के बाद अलग-अलग आवाजें सामने आईं. मीटिंग के बाद विधायक गुलशन मलिक ने रिपोर्टर्स से कहा, “हमें बताया गया था कि पार्टी ममता बनर्जी की लीडरशिप में चलती रहेगी. वह सिर्फ एक एडवाइजर नहीं हैं. हम चाहते हैं कि पार्टी उनकी लीडरशिप में काम करे.” यह मांग रीताब्रत के बुधवार के उस प्रपोजल के बाद सामने आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री को नई लेजिस्लेचर पार्टी के “चीफ एडवाइजर” के तौर पर काम करना चाहिए.

पंचला के विधायक ने कहा, “अगर ममता बनर्जी को सुप्रीम लीडर नहीं माना जाता है, तो हमें सोचना होगा कि हमें इस ग्रुप में रहना चाहिए या नहीं।” इस नई मांग खुद ऋतब्रत को नया झटका लग गया है, जिन्होंने एक दिन पहले ममता बनर्जी को झटका दिया था.विधायकों की मांग इसलिए अहम हैं क्योंकि ऋतब्रत के का समर्थन करने वाले 58 MLA में से कई ने बगावत के दौरान बार-बार कहा था कि उनकी लड़ाई ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं है, बल्कि उनके भतीजे और पार्टी के पूर्व नेशनल जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी के बढ़ते असर के खिलाफ है.

ममता से बैर नहीं, अभिषेक की खैर नहीं

असेंबली स्पीकर को सौंपे पत्र में, बागियों ने ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस की चेयरपर्सन के तौर पर मान्यता देना जारी रखा, जबकि उन्होंने यह साफ कर दिया कि वे अब विधायक दल के कामकाज पर अभिषेक बनर्जी के अधिकार को स्वीकार नहीं करते हैं। यह अंतर बगावत का मुख्य पॉलिटिकल तर्क बन गया है. ममता के प्रति पूरी वफादारी है, लेकिन अभिषेक का विरोध जारी रहेगा. बागी विधायकों के लिए, यह उन आरोपों से बचने का एक ढाल बन गया है कि वे पार्टी के शुरुआती लीडरशिप स्ट्रक्चर को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं.

पहली बार आया TMC पर संकट

बता दें, बुधवार को, 58 विधायकों ने स्पीकर को पत्र सौंप कर पार्टी पर कंट्रोल हासिल कर लिया. निकाले गए नेता ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुना गया, जिससे पार्टी के 28 साल के इतिहास में सबसे बड़ा अंदरूनी संकट शुरू हो गया. इस बगावत ने पार्टी की लीडरशिप, उत्तराधिकार और भविष्य की दिशा पर बड़े सवाल खड़े हो गए. TMC के बनने के बाद यह पहली बार था जब उसके विधायकों के एक बड़े हिस्से ने पार्टी की सेंट्रल लीडरशिप को खुले तौर पर चुनौती दी और खुद को उसकी राजनीतिक विरासत का असली वारिस बताया.

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News Source: PTI

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