Home Latest News & Updates क्यों होती है RSS प्रमुख के दौरों पर सियासत? मोहन भागवत ने तीन दिनों तक लखनऊ में टटोली समाज की नब्ज

क्यों होती है RSS प्रमुख के दौरों पर सियासत? मोहन भागवत ने तीन दिनों तक लखनऊ में टटोली समाज की नब्ज

by Rajeev Ojha 26 May 2026, 5:52 PM IST
26 May 2026, 5:52 PM IST
क्यों होती है आरएसएस प्रमुख के दौरों पर सियासत? मोहन भागवत ने तीन दिनों तक लखनऊ में टटोली समाज की नब्ज़

Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व्यक्ति निर्माण को अपना मूल कार्य बताता रहा है. व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र बनता है. संघ की मान्यता है कि व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र का निर्माण होता है. यही वजह है कि संघ अपनी शाखाओं और प्रशिक्षण वर्ग को खासी अहमियत देता है. इन दिनों लखनऊ में संघ का ऐसा ही एक प्रशिक्षण वर्ग चल रहा है, जिसमें उसके मुखिया यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंचालक डॉक्टर मोहन राव भागवत ने स्वयं प्रतिभाग किया. उनका यह प्रवास भले ही इस प्रशिक्षण वर्ग से संबंधित रहा लेकिन उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि वह अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपने स्वयंसेवकों के माध्यम से समाज की नब्ज टटोल रहे हैं.

11 जून तक आयोजित है कार्यकर्ता विकास वर्ग

संघ प्रमुख मोहन भागवत का लखनऊ दौरा मंगलवार को समाप्त हो गया. वैसे तो आधिकारिक तौर पर उनका यह दौरा संघ के प्रशिक्षण वर्ग से जुड़ा रहा लेकिन हमेशा की तरह इस बार भी उनके दौरे को राजनीतिक नजरिए से देखा गया. उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा का चुनाव होने वाला है. इस कारण भी संघ प्रमुख की यात्रा महत्वपूर्ण हो जाती है. माना जाता है उनके दौरे से भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की सक्रियता बढ़ जाती है और उनके आपसी मतभेद भी दूर होते हैं. यही वजह है कि उनके दौरों पर विपक्ष की भी नजर रहती है. दरअसल संघ के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र का कार्यकर्ता विकास वर्ग लखनऊ में निराला नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में 21 मई से 11 जून तक आयोजित है. इस विकास वर्ग में मोहन भागवत 24 मई से 26 मई तक मौजूद रहे. इन तीन दिनों में मोहन भागवत ने प्रशिक्षण वर्ग में आए शिक्षार्थियों के साथ संवाद के विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया.

भविष्य की रणनीति पर मंथन

संवाद का यह कार्यक्रम संघ के बौद्धिक प्रशिक्षण से जुड़ा रहा. इसमें उन्होंने कार्यकर्ताओं को संघ की रीति-नीति के साथ ही देश और समाज के सामने व्याप्त चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया. जाहिर है कि इन चुनौतियों से पार पाने के लिए भारतीय जनता पार्टी का सत्ता में होना आवश्यक है. बिना कुछ खुलकर कहे भी ऐसे आयोजनों का छिपा हुआ संदेश यही होता है. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन के कामकाज, अभियान और भविष्य की रणनीति पर मंथन भी किया. संघ के वर्तमान अभियानों, विस्तार और जमीनी स्तर पर चल रहे कार्यों की समीक्षा भी की. सूत्रों के मुताबिक इस दौरे में संघ प्रमुख ने सरकार और संगठन के बीच समन्वय के साथ-साथ दोनों के कामकाज की समीक्षा भी की. संवाद में उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में चल रही गतिविधियों, योजनाओं और उनके प्रभाव पर भी विचार किया गया, ताकि आगे की रणनीति को और प्रभावी बनाया जा सके.

प्रचारकों से लिया जाएगा फीडबैक

बैठकों में संघ के प्रचारकों से भी फीडबैक लिया जाएगा. जमीनी स्तर पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं के अनुभव और सुझावों के आधार पर अब संगठन की आगामी रूपरेखा तैयार की जाएगी. इससे संघ अपने कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएगा. राजनीतिक विश्लेषकों का हमेशा ही यह मानना रहा है कि संघ सीधे तौर पर भले ही चुनाव में शामिल नहीं होता है लेकिन उसकी गतिविधियां भारतीय जनता पार्टी को सीधे तौर पर ही लाभ पहुंचाती हैं. यही वजह है कि भाजपा की तरह ही संघ भी हमेशा विपक्ष के निशाने पर रहता है. अभी पिछले दिनों अपनी रायबरेली यात्रा के दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ ही संघ पर भी सीधे-सीधे हमला बोला था. विपक्ष संघ को भाजपा से अलग करके देखता ही नहीं है. विपक्ष हमेशा कहता रहा है कि संघ की सभी गतिविधियां भारतीय जनता पार्टी को सियासी लाभ पहुंचने के उद्देश्य होती हैं.

अमृत सरोवर योजना में UP अव्वलः पूरे देश में अकेले 30% सरोवरों का निर्माण कर रचा इतिहास, विकास को रफ्तार

You may also like

LT logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?