Home Latest News & Updates चंपत राय के इस्तीफे पर ट्रस्ट में घमासान, संतों ने किया खुलकर बचाव! जानें क्या-क्या बोले?

चंपत राय के इस्तीफे पर ट्रस्ट में घमासान, संतों ने किया खुलकर बचाव! जानें क्या-क्या बोले?

by Kamlesh Kumar Singh 7 July 2026, 7:38 PM IST
7 July 2026, 7:38 PM IST
Turmoil within trust over Champat Rai resignation

Ram Mandir : अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में पूर्व महासचिव चंपत राय के इस्तीफे को लेकर अंदरखाने जबरदस्त घमासान देखने को मिला. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में अधिकांश ट्रस्टी चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करने के पक्ष में नहीं थे. कई संतों ने उन्हें पूरी तरह निर्दोष बताते हुए उनका खुलकर बचाव किया. बैठक के दौरान भावुक पल भी आए और इस्तीफे की प्रक्रिया पर भी कई गंभीर सवाल उठे. अब इस पूरे मामले को चुनौती देने की भी अंदर खाने चर्चा चल रही है.

इस्तीफे को लेकर हुई तीखी बहस

सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को हुई श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय के इस्तीफे को लेकर करीब पूरे समय तीखी बहस होती रही. अधिकांश ट्रस्टियों का कहना था कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी व्यक्ति को नैतिक रूप से जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा. खासतौर पर शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने चंपत राय के इस्तीफे का सबसे ज्यादा विरोध किया. वहीं स्वामी परमानंद और स्वामी दिनेंद्र दास ने भी कहा कि चंपत राय पूरी तरह निर्दोष हैं और उन्हें पद छोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं थी.

गोविंद देव गिरि ने पढ़ा प्रस्ताव

सूत्र बताते हैं कि बैठक के दौरान ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि जब प्रस्ताव पढ़ रहे थे, तब वे भावुक हो गए. बहस लगातार बढ़ने पर वरिष्ठ विधिवेत्ता के. परासरण ने हस्तक्षेप कर सभी पक्षों को शांत कराया और ट्रस्ट के नियमों का हवाला देते हुए आगे की प्रक्रिया स्पष्ट की. कुल मिलाकर चंपत राय को निर्दोष बताने में लिए वीएचपी के कुछ अधिकारी और संत सामने आ गए हैं. गोविन्द देव गिरि ने भी कहा चंपत राय चारित्रिक तौर पर शुद्ध व्यक्ति है उनके काम करने के तरीके की वजह से समस्या उपजी है.

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सवालों के घेरे में इस्तीफे की प्रक्रिया

बैठक के बाद अब इस्तीफे की पूरी प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है. ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का दावा है कि नियमों में एक महीने का नोटिस देने का प्रावधान है, लेकिन इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. इतना ही नहीं, बैठक की सूचना, प्रेस विज्ञप्ति और उससे जुड़े दस्तावेज बिना हस्ताक्षर के जारी किए जाने की भी बात कही जा रही है. सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि चंपत राय के त्यागपत्र की प्रति भी उपलब्ध नहीं है.

सूत्रों के अनुसार, चंपत राय के समर्थक और कुछ ट्रस्टी अब इस पूरी इस्तीफा प्रक्रिया को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं. बैठक में कई संतों ने यह सवाल भी उठाया कि यदि चढ़ावा चोरी के मामले में किसी कर्मचारी की भूमिका सामने आई है, तो फिर उसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी अकेले चंपत राय पर कैसे तय की जा सकती है. उनका कहना था कि जांच पूरी होने से पहले किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाना उचित नहीं होगा.

ट्रस्ट उन्हें निर्दोष बता रहा

चंपत राय के इस्तीफे को लेकर ट्रस्ट के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आ चुके हैं. एक ओर ट्रस्ट उन्हें निर्दोष बता रहा है, तो दूसरी ओर इस्तीफे की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में अब सबकी नजर ट्रस्ट की अगली बैठक और इस मामले में संभावित कानूनी चुनौती पर टिकी रहेगी. आने वाले दिनों में यह विवाद और राजनीतिक तथा कानूनी रूप ले सकता है.

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