Home Religious नवरात्रि के चौथे दिन माता कूष्मांडा से मांगे स्वास्थ्य और शक्ति, पूजा के बाद पढ़ें ये आरती और मंत्र

नवरात्रि के चौथे दिन माता कूष्मांडा से मांगे स्वास्थ्य और शक्ति, पूजा के बाद पढ़ें ये आरती और मंत्र

by Neha Singh
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Navratri Day 4

Navratri Day 4: नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित है, जिन्हें ब्रह्मांड की जननी माना जाता है. चलिए जानते हैं मां कूष्मांडा कौन हैं, माता का मंत्र और आरती क्या है.

22 March, 2026

नवरात्रि के नौ दिनों में हर घर में माता की पूजा होती है और माहौल में एक सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है. चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि में नौ दिन मां के अलग-अलग रूपों को समर्पित हैं. हर रूप के अपने गुण हैं, जो आपको शक्ति और शांति देते हैं. पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है. तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है. वहीं आज 22 मार्च यानी नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित है. चलिए जानते हैं मां कूष्मांडा कौन हैं, माता का मंत्र और आरती क्या है .

Navratri Day 4

ब्रह्मांड की रचयिता हैं मां कूष्मांडा

माता कूष्मांडा देवी दुर्गा का चौथा रूप हैं, जिन्हें ब्रह्मांड की रचयिता (ब्रह्मांड की जननी) माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि उन्होंने अपनी मंद मुस्कान से शून्य से ब्रह्मांड की रचना की. मां कूष्मांडा ऊर्जा, स्वास्थ्य और शक्ति की देवी हैं, जो मुख्य रूप से सौर मंडल में निवास करती हैं. देवी की अष्टभुजाओं में एक कमंडल , एक धनुष, तीर, एक कमल का फूल, अमृत कलश, एक चक्र और एक गदा होती है. देवी कूष्मांडा को आदिशक्ति, शक्ति और ज्ञान का प्रतीक भी माना जाता है.

मां कूष्मांडा का प्रिय रंग और भोग

नवरात्रि के चौथे दिन नारंगी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए, यह रंग मां को प्रिय है. वहीं पूजा के दौरान मां को मालपुआ का भोग लगाया जाता है. इसके अलावा उन्हें हलवा और दही भी चढ़ाया जाता है. पूजा के दौरान मंत्रों का जाप किया जाता है. साथ ही, पूजा का समापन आरती के साथ किया जाता है, इसलिए मां की पूजा करते समय मंत्र का जाप करें और आरती पढ़ें.

Navratri Day 4

मां कूष्मांडा की आरती

कूष्मांडा जय जग सुखदानी। मुझ पर दया करो महारानी ॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली। शाकंबरी मां भोली भाली ॥
लाखों नाम निराले तेरे । भक्त कई मतवाले तेरे ॥
भीमा पर्वत पर है डेरा। स्वीकारो प्रणाम ये मेरा ॥
सबकी सुनती हो जगदंबे। सुख पहुंचती हो मां अंबे ॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा। पूर्ण कर दो मेरी आशा ॥
मां के मन में ममता भारी। क्यों ना सुनेगी अरज हमारी ॥
तेरे दर पर किया है डेरा। दूर करो मां संकट मेरा ॥
मेरे कारज पूरे कर दो। मेरे तुम भंडारे भर दो ॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए। भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥

प्रार्थना मंत्र: सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

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